छाताबाद भू-धंसान पर फूटा गुस्सा: ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो का किया घेराव, बोले- हादसे के वक्त कहां थे?

Dhanbad News: धनबाद के कतरास स्थित छाताबाद में भीषण भू-धंसान के बाद ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो का घेराव कर विरोध जताया। हादसे में आधा दर्जन से अधिक घर ध्वस्त हुए, कई परिवार बेघर हो गए। ग्रामीणों ने अवैध खनन को जिम्मेदार बताते हुए पुनर्वास और मुआवजे की मांग की।

छाताबाद भू-धंसान पर फूटा गुस्सा: ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो का किया घेराव, बोले- हादसे के वक्त कहां थे?
लेश्वर महतो को विरोध के बीच लौटना पड़ा।

      HighLights:

  • धनबाद के छाताबाद में भू-धंसान के बाद ग्रामीणों का फूटा गुस्सा।
  • पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो को ग्रामीणों ने घेरकर देर से पहुंचने पर जताई नाराजगी।
  • ग्रामीणों ने कहा- हादसे के वक्त कोई जनप्रतिनिधि नहीं आया, अब राजनीति करने पहुंचे हैं।
  • जलेश्वर महतो ने अवैध खनन को हादसे की वजह बताते हुए बीसीसीएल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया।
  • भू-धंसान में आधा दर्जन से अधिक घर ध्वस्त, कई परिवारों का पुनर्वास शुरू।

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद के कतरास स्थित छाताबाद में हुए भीषण भू-धंसान के बाद स्थानीय लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को प्रभावित परिवारों का हाल जानने पहुंचे पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता जलेश्वर महतो को ग्रामीणों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। नाराज लोगों ने उन्हें घेर लिया, नारेबाजी की और सवाल किया कि जब हादसे के समय लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे थे तब कोई जनप्रतिनिधि मदद के लिए क्यों नहीं पहुंचा। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पूर्व मंत्री को समर्थकों की सलाह पर घटनास्थल से वापस लौटना पड़ा।

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हादसे के वक्त नहीं आए, अब क्यों आए?

ग्रामीणों ने जलेश्वर महतो से साफ कहा कि जब मंगलवार सुबह भू-धंसान की घटना हुई और कई परिवार बेघर हो गए, तब किसी जनप्रतिनिधि ने उनकी सुध नहीं ली। अब हालात गंभीर होने के बाद केवल राजनीतिक औपचारिकता निभाने के लिए पहुंचने का कोई औचित्य नहीं है। युवाओं और महिलाओं ने कहा कि उन्हें ऐसे जनप्रतिनिधि नहीं चाहिए जो संकट की घड़ी में साथ न खड़े हों। लोगों ने कहा, "आपको प्रणाम करते हैं, अब वापस जाइए।"

समझाने की कोशिश भी नहीं आई काम

विरोध के बीच जलेश्वर महतो ने ग्रामीणों को शांत कराने और अपनी बात रखने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह हादसा अवैध कोयला खनन का परिणाम है और इसके लिए बीसीसीएल प्रबंधन जिम्मेदार है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले को जिला प्रशासन और बीसीसीएल के सीएमडी के समक्ष उठाया जाएगा ताकि प्रभावित परिवारों का पुनर्वास और गोफ की भराई जल्द कराई जा सके। हालांकि आक्रोशित ग्रामीण उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हुए और लगातार विरोध करते रहे।

कैसे हुआ था छाताबाद में भू-धंसान?

मंगलवार सुबह करीब आठ बजे छाताबाद चार नंबर में अचानक तेज धमाके जैसी आवाज हुई। कुछ ही क्षणों में जमीन धंसने लगी और आधा दर्जन से अधिक मकान देखते ही देखते जमींदोज हो गए। आसपास के एक दर्जन से अधिक घरों में बड़ी दरारें पड़ गईं। इतना ही नहीं, इलाके का एक बड़ा तालाब भी जमीन के भीतर समा गया। घटना के दौरान लोगों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।

सड़क जाम कर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

हादसे के बाद प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों ने कतरास-भटमुरना मुख्य सड़क को जाम कर दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि लंबे समय से क्षेत्र में चल रहे अवैध कोयला खनन के कारण जमीन कमजोर हो गई और यह हादसा हुआ। ग्रामीणों ने सुरक्षित पुनर्वास, उचित मुआवजा, स्थायी आवास और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

प्रशासन और बीसीसीएल हरकत में

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, जिला प्रशासन और बीसीसीएल के अधिकारी मौके पर पहुंचे। गोविंदपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक सत्यकाम आनंद, बाघमारा के अंचलाधिकारी गिरिजानंद किस्कू सहित कई अधिकारी राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। प्रशासन ने प्रभावित इलाके की घेराबंदी कर दी है तथा भू-धंसान का दायरा बढ़ने की आशंका को देखते हुए दो दर्जन से अधिक अन्य परिवारों को भी सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है। बीसीसीएल की रेस्क्यू टीम प्रभावित घरों से लोगों का जरूरी सामान और दस्तावेज निकालने का काम कर रही है।

कई परिवार बेघर, पुनर्वास की मांग तेज

भू-धंसान में कई परिवारों के घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं, जबकि आसपास के कई मकानों में बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। प्रभावित परिवारों ने तत्काल पुनर्वास, उचित मुआवजा और स्थायी आवास की मांग की है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सभी प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाया जाएगा और पुनर्वास से जुड़ी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।