पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी की पार्टी में महाभूकंप! TMC के 60 विधायक पहुंचे विधानसभा, अलग गुट बनाने की तैयारी

पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर बड़ा सियासी संकट गहराता दिख रहा है। 58 से अधिक विधायकों के बागी होने की खबरों के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या ममता बनर्जी की पार्टी टूट जाएगी? जानिए दलबदल कानून, दो-तिहाई गणित और बंगाल की सियासत का पूरा समीकरण।

पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी की पार्टी में महाभूकंप! TMC के 60 विधायक पहुंचे विधानसभा, अलग गुट बनाने की तैयारी
ममता बनर्जी (फाइल फोटो)।
  • विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC में गुटबाजी खुलकर सामने आई 
  • ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के साथ करीब 60 विधायक विधानसभा पहुंचे 
  • दो-तिहाई विधायकों का दावा सही हुआ तो दलबदल कानून से बच सकता है गुट 
  • निष्कासित विधायकों को बनाया जा सकता है नए शक्ति केंद्र का चेहरा 
  • बंगाल की राजनीति में ‘महाराष्ट्र मॉडल’ की चर्चा तेज

कोलकाता (Threesocieties.com Desk) : पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल आता दिखाई दे रहा है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। बुधवार को निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के साथ करीब 60 विधायकों के विधानसभा पहुंचने से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

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सूत्रों के अनुसार, ये विधायक खुद को ‘असली TMC’ साबित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं और विधानसभा में अलग शक्ति केंद्र बनाने की तैयारी चल रही है। माना जा रहा है कि ये विधायक स्पीकर को प्रस्ताव सौंपकर विपक्ष के नेता, मुख्य सचेतक और अन्य महत्वपूर्ण पदों को लेकर दावा पेश कर सकते हैं।

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दो-तिहाई संख्या का दावा, क्या बदल जाएगा खेल?

राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि क्या बागी गुट के पास वास्तव में दो-तिहाई संख्या है? विधानसभा में फिलहाल TMC के कुल 80 विधायक बताए जा रहे हैं। ऐसे में दलबदल कानून से बचने के लिए कम से कम 52 विधायकों का समर्थन जरूरी होगा।

सूत्रों के मुताबिक, संभावित बागी गुट के चेहरे के रूप में उभर रहे ऋतब्रत बनर्जी दावा कर रहे हैं कि उनके साथ दो-तिहाई से ज्यादा विधायक मौजूद हैं। अगर यह दावा सही साबित होता है तो बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो सकता है।

कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद?

पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विपक्ष के नेता से जुड़े एक प्रस्ताव में कथित फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप लगाया। इसके बाद विधानसभा सचिवालय में मामला दर्ज हुआ और जांच CID तक पहुंच गई। इसी बीच पार्टी नेतृत्व ने दोनों विधायकों की भूमिका पर सवाल उठाए और बाद में उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया। निष्कासन के बाद दोनों नेताओं ने खुलकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

दलबदल कानून क्या कहता है?

भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम हिस्सा बन गया है। कानून के अनुसार—• यदि विधायक पार्टी छोड़ता है या व्हिप के खिलाफ जाता है तो अयोग्यता का सामना कर सकता है।  2003 से पहले एक-तिहाई विधायकों के अलग होने पर राहत मिलती थी, लेकिन यह प्रावधान खत्म कर दिया गया। अब केवल दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से होने वाला विलय ही मान्य माना जाता है। यानी अगर बागी गुट के पास वास्तव में 52 से ज्यादा विधायक हैं तो वे कानूनी सुरक्षा हासिल कर सकते हैं।

क्या दो हिस्सों में बंट सकती है TMC?

अगर दोनों गुट खुद को ‘असली TMC’ बताने लगते हैं, तो मामला चुनाव आयोग तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में पार्टी का नाम, चुनाव चिन्ह और राजनीतिक विरासत को लेकर लड़ाई शुरू हो सकती है। महाराष्ट्र में शिवसेना विवाद की तरह बंगाल में भी चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट सिर्फ पार्टी का नहीं बल्कि ममता बनर्जी के नेतृत्व की सबसे बड़ी परीक्षा भी बन सकता है।

आगे क्या?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में 60 विधायक बागी खेमे में हैं या यह सिर्फ शक्ति प्रदर्शन है? अगर संख्या दो-तिहाई से कम रही तो बागी नेताओं पर अयोग्यता और निष्कासन की तलवार लटक सकती है। बंगाल की राजनीति में शुरू हुआ यह घमासान आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल पूरे राज्य की नजर विधानसभा और बागी खेमे की अगली चाल पर टिकी हुई है।