Bihar BJP का बड़ा संगठनात्मक दांव: 5 विधायकों को 52 जिलों की कमान, सरकार-संगठन के बीच बनेंगे सेतु
Bihar Politics News: बिहार भाजपा ने संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के लिए 5 विधायकों को 52 संगठनात्मक जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है। ये विधायक कार्यकर्ताओं से संवाद, संगठन की निगरानी और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार का काम करेंगे।
Highlights
- भाजपा ने बिहार के 52 संगठनात्मक जिलों के लिए 5 विधायकों को समन्वयक नियुक्त किया
- संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने की रणनीति पर काम
- विधायक कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे और संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी करेंगे
- केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी दी गई
- आगामी चुनावों को देखते हुए बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की तैयारी
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार भाजपा ने संगठन को और अधिक मजबूत तथा सक्रिय बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पार्टी नेतृत्व ने राज्य के 52 संगठनात्मक जिलों के लिए पांच विधायकों को समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी है। इन विधायकों का मुख्य कार्य संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना, कार्यकर्ताओं से संवाद बनाए रखना तथा केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना होगा।
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भाजपा का मानना है कि संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही पार्टी की जमीनी पकड़ और मजबूत होगी। इसी रणनीति के तहत विभिन्न संभागों के लिए अनुभवी विधायकों को जिम्मेदारी दी गई है।
किस विधायक को मिली कौन-सी जिम्मेदारी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने प्रदेश संगठन में लंबे समय तक काम कर चुके अरवल विधायक मनोज शर्मा को मिथिला और तिरहुत संभाग के 12 संगठनात्मक जिलों का दायित्व सौंपा है। इसी तरह औरंगाबाद के विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह को मगध और शाहाबाद संभाग के 10 संगठनात्मक जिलों की जिम्मेदारी दी गई है।कल्याणपुर विधायक सचींद्र सिंह को चंपारण और सारण संभाग के 10 जिलों में संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय का कार्य सौंपा गया है।

पूर्णिया विधायक विजय खेमका भागलपुर, कोसी और सीमांचल संभाग से जुड़े 10 संगठनात्मक जिलों का कामकाज देखेंगे। वहीं, कुम्हरार विधायक संजय गुप्ता को पटना, मुंगेर, बेगूसराय और नालंदा संभाग से जुड़े 10 संगठनात्मक जिलों के समन्वय की जिम्मेदारी मिली है।
क्या होगी इन विधायकों की भूमिका
पार्टी की ओर से नियुक्त किए गए ये विधायक अपने-अपने जिलों में स्थानीय पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के साथ नियमित संवाद बनाए रखेंगे। संगठन की गतिविधियों की समीक्षा करेंगे और कार्यकर्ताओं की समस्याओं को प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाएंगे।इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, उपलब्धियों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए चलाए जाने वाले अभियानों में भी इनकी अहम भूमिका होगी।
चुनावी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा फैसला
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा का यह कदम आगामी चुनावी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संगठन को और अधिक सक्रिय बनाने की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सीधे नेतृत्व से जोड़ने पर जोर दे रही है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय से सरकार की उपलब्धियों को जनता तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा और पार्टी का जनाधार भी मजबूत होगा।
बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने पर फोकस
भाजपा लंबे समय से बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। पांच विधायकों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी बेहतर होगी और कार्यकर्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान भी संभव हो सकेगा।राजनीतिक गलियारों में इस निर्णय को भाजपा के संगठन विस्तार अभियान और आगामी चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।






