रूस से बिहार तक का सफर, विवादों से पुराना रिश्ता; हर्ष फायरिंग में सजा पाने वाले पहले विधायक बने राजू सिंह

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से 4 साल की सजा मिलने के बाद भाजपा विधायक राजू सिंह की विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई है। रूस और यूक्रेन से पढ़ाई कर बिहार की राजनीति में बड़ा नाम बने राजू सिंह अब हर्ष फायरिंग मामले में विधायकी गंवाने वाले पहले विधायक बन गए हैं। साहेबगंज सीट पर अब उपचुनाव होगा।

रूस से बिहार तक का सफर, विवादों से पुराना रिश्ता; हर्ष फायरिंग में सजा पाने वाले पहले विधायक बने राजू सिंह
4 साल की सजा के साथ गई विधायकी।

     Highlights:

  • दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भाजपा विधायक राजू सिंह को हर्ष फायरिंग मामले में 4 साल की सजा सुनाई
  • दो साल से अधिक सजा मिलने के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त हो गई
  • हर्ष फायरिंग मामले में विधायकी गंवाने वाले राजू सिंह देश के पहले विधायक बन गए 
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(3) के तहत उनकी सदस्यता खत्म हुई
  • साहेबगंज विधानसभा सीट अब रिक्त मानी जाएगी और छह महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाएगा
  • रूस और यूक्रेन में पढ़ाई करने वाले राजू सिंह का सफर बिजनेस से राजनीति तक पहुंचा था

मुजफ्फरपुर (Threesocieties.com Desk): बिहार की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले साहेबगंज के भाजपा विधायक डॉ. राजू कुमार सिंह का राजनीतिक सफर जितना दिलचस्प रहा, उतना ही विवादों से भी घिरा रहा। रूस और पूर्व सोवियत देशों से उच्च शिक्षा हासिल कर बिहार की राजनीति में कदम रखने वाले राजू सिंह अब एक ऐसे मामले के कारण सुर्खियों में हैं, जिसने न केवल उनकी राजनीतिक पारी पर विराम लगा दिया है बल्कि एक नया रिकॉर्ड भी बना दिया है।

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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वर्ष 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में उन्हें चार साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता भी तत्काल प्रभाव से समाप्त हो गई है।

हर्ष फायरिंग में विधायकी गंवाने वाले पहले विधायक

देश में कई सांसद और विधायक आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद अपनी सदस्यता खो चुके हैं, लेकिन हर्ष फायरिंग के मामले में किसी विधायक की सदस्यता समाप्त होने का यह पहला मामला माना जा रहा है। चार साल की सजा मिलने के बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) स्वतः लागू हो गई, जिसके तहत दो वर्ष या उससे अधिक की सजा पाने वाला कोई भी सांसद या विधायक तत्काल प्रभाव से अयोग्य हो जाता है।

रूस से शुरू हुआ सफर, बिहार की राजनीति तक पहुंचे

डॉ. राजू कुमार सिंह का जन्म 12 जनवरी 1970 को हुआ था। वे बिहार के सबसे अधिक शिक्षित नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने यूक्रेन की प्रतिष्ठित एलवीओवी पॉलिटेक यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग और उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद उन्होंने पीएचडी की मानद उपाधि हासिल की और व्यवसाय की दुनिया में कदम रखा। उनका दवा कारोबार भारत ही नहीं बल्कि रूस, अमेरिका समेत कई देशों तक फैला हुआ बताया जाता है।

दबंग छवि और विवादों से पुराना नाता

1990 के दशक में उत्तर बिहार की राजनीति में सक्रिय होने के दौरान उनकी पहचान एक मजबूत और प्रभावशाली नेता के रूप में बनी। स्थानीय राजनीति में विरोधियों के खिलाफ मुखर रुख और क्षेत्रीय मुद्दों पर आक्रामक राजनीति ने उन्हें लोकप्रिय बनाया, लेकिन इसी दौरान विवाद भी उनके साथ जुड़े रहे। मंत्री बनने के बाद भी उन पर मारपीट और दबाव बनाने जैसे आरोप लगते रहे। पिछले वर्ष राजद नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भी उनके खिलाफ आरोप लगाए गए थे।

लोजपा से शुरू हुई राजनीति

राजू सिंह ने वर्ष 2005 में लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में प्रवेश किया था। बाद में उन्होंने जनता दल यूनाइटेड का दामन थामा और लगातार तीन बार साहेबगंज सीट से विधायक बने। 2015 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2020 में वीआईपी पार्टी के टिकट पर उन्होंने शानदार वापसी की। बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए और 2025 के चुनाव में एक बार फिर जीत दर्ज करते हुए पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे।

मंत्री पद तक पहुंचे

राजनीतिक प्रभाव और संगठन में मजबूत पकड़ के कारण उन्हें बिहार सरकार में पर्यटन मंत्री की जिम्मेदारी भी मिली। मंत्री बनने के बाद उनका राजनीतिक कद और बढ़ गया था।

किस कानून के तहत गई सदस्यता?

राजू सिंह की सदस्यता जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(3) के तहत समाप्त हुई है। इस प्रावधान के अनुसार यदि किसी सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में दो वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है तो वह तत्काल प्रभाव से अयोग्य हो जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं, सजा पूरी करने के बाद भी वह अगले छह वर्षों तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकता।

'लिली थॉमस' फैसले के बाद तुरंत जाती है सदस्यता

पहले दोषी जनप्रतिनिधियों को अपील के लिए तीन महीने का समय मिलता था, लेकिन 2013 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक 'लिली थॉमस बनाम भारत संघ' फैसले के बाद यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई। अब निचली अदालत से दो साल या उससे अधिक की सजा मिलते ही सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है।

साहेबगंज में होगा उपचुनाव

राजू सिंह की सदस्यता समाप्त होने के साथ ही साहेबगंज विधानसभा सीट रिक्त मानी जाएगी। विधानसभा सचिवालय की अधिसूचना के बाद चुनाव आयोग उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगा। नियमों के अनुसार यदि विधानसभा का कार्यकाल एक वर्ष से अधिक बचा हो तो छह महीने के भीतर उस सीट पर उपचुनाव कराना अनिवार्य होता है। ऐसे में आने वाले महीनों में साहेबगंज की राजनीति फिर गर्म होने वाली है।

बिहार की राजनीति में बड़ा संदेश

राजू सिंह का मामला बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश के जनप्रतिनिधियों के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि अदालत से दो वर्ष से अधिक की सजा मिलने के बाद राजनीतिक पद बचाना अब संभव नहीं है।

रूस और यूक्रेन की यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर बिहार की राजनीति के शिखर तक पहुंचने वाले राजू सिंह का सफर अब कानूनी लड़ाई और राजनीतिक भविष्य की नई चुनौतियों के बीच खड़ा नजर आ रहा है।