BCCL की भोजूडीह कोल वाशरी चालू, अब 20 लाख टन कोयले की होगी धुलाई; स्टील सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा

Dhanbad News: बीसीसीएल ने 341 करोड़ रुपये की लागत से बनी भोजूडीह कोकिंग कोल वाशरी का व्यावसायिक परिचालन शुरू किया। 20 लाख टन वार्षिक क्षमता वाली इस आधुनिक वाशरी से स्टील सेक्टर को उच्च गुणवत्ता वाला धुला कोयला मिलेगा।

BCCL की भोजूडीह कोल वाशरी चालू, अब 20 लाख टन कोयले की होगी धुलाई; स्टील सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा
धनबाद से देश के स्टील सेक्टर को बड़ी सौगात।
  • 341 करोड़ की भोजूडीह कोल वाशरी से व्यावसायिक परिचालन शुरू
  • स्टील सेक्टर को बड़ी सौगात:उत्पादन क्षमता में होगा इजाफा
  • स्टील सेक्टर को मिलेगा उच्च गुणवत्ता वाला धुला कोयला

धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयलांचल के लिए बड़ी औद्योगिक खबर सामने आई है। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने भोजूडीह स्थित अत्याधुनिक कोकिंग कोल वाशरी का व्यावसायिक परिचालन शुरू कर दिया है। करीब 341 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह वाशरी अब देश के स्टील सेक्टर के लिए उच्च गुणवत्ता वाले धुले हुए कोकिंग कोयले की आपूर्ति करेगी।

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बीसीसीएल द्वारा शेयर बाजार को दी गई जानकारी के अनुसार, भोजूडीह कोल वाशरी का कमर्शियल ऑपरेशन 26 मई से प्रभावी हो गया है। यह वाशरी 2.0 एमटीपीए यानी लगभग 20 लाख टन कच्चे कोयले की वार्षिक धुलाई क्षमता रखती है।

आयातित कोकिंग कोयले पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम

देश में इस्पात उद्योग की बढ़ती जरूरतों के कारण भारत अभी भी कोकिंग कोयले के आयात पर काफी निर्भर है। इससे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। ऐसे समय में बीसीसीएल की यह नई पहल घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वाशरी के शुरू होने से न केवल उच्च गुणवत्ता वाले धुले कोयले की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि देश की औद्योगिक क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

आधुनिक तकनीक से होगी बेहतर गुणवत्ता की कोयला धुलाई

भोजूडीह कोल वाशरी को मध्यम क्षमता वाली तीन-उत्पाद आधारित कोकिंग कोल वाशरी के रूप में विकसित किया गया है। इसमें आधुनिक कोयला प्रसंस्करण तकनीकों का उपयोग किया गया है।

इसमें शामिल प्रमुख तकनीकें:

• Heavy Medium Cyclone Technology
• Spiral Concentrator System
• Froth Flotation Process

इन तकनीकों की मदद से कोयले की बेहतर सफाई और शोधन किया जाएगा, जिससे उच्च गुणवत्ता वाला धुला कोकिंग कोयला तैयार होगा।

बीओएम मॉडल पर बना है प्रोजेक्ट

बीसीसीएल के अनुसार, इस वाशरी का निर्माण Build-Operate-Maintain (BOM) मॉडल के तहत किया गया है। इस प्रोजेक्ट को एसीबी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया। इस मॉडल के तहत निजी भागीदारी और तकनीकी दक्षता का उपयोग करते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

क्या बोले बीसीसीएल के सीएमडी?

बीसीसीएल के सीएमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक तकनीकों से लैस भोजूडीह कोल वाशरी कंपनी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि— “यह परियोजना न केवल बीसीसीएल की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगी, बल्कि देश के इस्पात क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने और औद्योगिक मजबूती बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”

धनबाद और कोयलांचल की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के शुरू होने से धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। साथ ही कोल सेक्टर से जुड़े रोजगार, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को भी मजबूती मिलेगी। भोजूडीह वाशरी का व्यावसायिक संचालन शुरू होना बीसीसीएल और कोयलांचल के लिए एक महत्वपूर्ण औद्योगिक उपलब्धि माना जा रहा है।