Dhanbad : शार्टकट के बल तात्कालिक सफलता संभव है, स्थाई नहीं: हरिवंश
कोयलांचल के वयोवृद्ध पत्रकार बनखंडी मिश्र की पुस्तक अतीत के झरोखे से का विमोचन शुक्रवार को राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने किया। आइआइटी आइएसएम के गोल्डेन जुबली हॉल में आयोजित समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मनमोहन पाठक व संचालन उत्तम मुखर्जी ने किया। पत्रकार प्रशांत झा ने स्वागत भाषण दिया।
- इतिहास की जितनी बेहतर जानकारी होगी, भविष्य उतना ही श्रेष्ठ होगा
- बनखंडी मिश्र की पुस्तक अतीत के झरोखे से का विमोचन
धनबाद। कोयलांचल के वयोवृद्ध पत्रकार बनखंडी मिश्र की पुस्तक अतीत के झरोखे से का विमोचन शुक्रवार को राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने किया। आइआइटी आइएसएम के गोल्डेन जुबली हॉल में आयोजित समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मनमोहन पाठक व संचालन उत्तम मुखर्जी ने किया। पत्रकार प्रशांत झा ने स्वागत भाषण दिया।
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समारोह को संबोधित करते हुए हरिवंश ने कहा कि पत्रकारिता का मूल काम बेहतर समाज सृजन है। पत्रकारिता ने दुनिया व समाज को हर संकट में नयी राह दिखायी है। राज्यसभा के उप सभापति ने कहा कि आज दुनिया के सामने कई चुनौतियां हैं। इनसे ज्ञान के बल ही निबटा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आनेवाले दिनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबसे बड़ी चुनौती बनने वाली है, पर इसके दोनों पहलु हैं। इससे कई पारंपरिक क्षेत्र की नौकरियां जायेंगी, तो रोजगार के नये अवसर भी मिलेंगे। इसमें तलाशना क्या है यह सोचना होगा। हरिवंश ने चैट जीपीटी आदि की चर्चा करते हुए कहा आज बदलाव का दौर है। इन सब पर विजय इमानदार प्रयास के बल संभव है। क्योंकि शार्टकट के बल तात्कालिक सफलता संभव है, स्थाई नहीं।

पुस्तकों में है हर संकट का समाधान
पत्रकार बनखंडी मिश्र की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अगर आपमें जुनून है, तो कोई भी ताकत आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। उप सभापति ने कहा कि पुस्तकें हमेशा से उपयोगी रही हैं। हर संकट का समाधान पुस्तकों में होता है। पुस्तक पढ़ने की आदत रखनी चाहिए। इनसे अतीत की जानकारी मिलती है। अतीत की जानकारी जितनी बेहतर होगी, भविष्य उतना ही अच्छा होगा। बदल रहे समाज की चर्चा करते हुए कहा कि पहले समाज में सबसे ज्यादा सम्मान शिक्षकों को मिलता था, आज अवैध रूप से धन अर्जित करने वालों को देते हैं। उन्होंने कहा कि हर चीज के लिए सिर्फ राजनीति को ही दोष देना उचित नहीं है। हर क्षेत्र में गिरावट आयी है। इसे दूर करना होगा।

झारखंड को समझने में पुस्तकें रही हैं सहायक : पूर्णिमा सिंह
झरिया एमएलए पूर्णिमा नीरज सिंह ने कहा कि झारखंड से उनका बहुत पुराना नाता नहीं रहा है। यहां आने के बाद कई पुस्तकों को बढ़ कर झारखंड की समस्या व इतिहास के बारे में जानकारी मिली। इसका बहुत लाभ मिला। बचपन से ही कहा जाता था कि किताबें पढ़ो, यह सुझाव अब जीवन में सार्थक लग रहा है। उन्होंने बनखंडी मिश्र की पुस्तक की चर्चा करते हुए कहा कि यहां के युवाओं व लोगों के लिए यह काफी सहायक होगी।पूर्णिमा नीरज सिंह ने कहा कि यह पुस्तक लोगों के दिलों पर अविस्मरणीय छाप छोड़ेगा। क्योंकि इस पुस्तक के माध्यम से लोग धनबाद के विभूतियों के बारे में जान सकेंगे कि किस तरह से लोगों ने देश के लिए अपना योगदान देकर झरिया और धनबाद का नाम रोशन किया। बनखंडी मिश्र की यह तीसरी पुस्तक है जिसमें धनबाद और झरिया के बारे में उल्लेखित किया गया है।
पुस्तक विमोचन समारोह में आइआइटी आइएसएम के डायरेक्टर प्रोफोसर राजीव शेखर, साहबगंज के जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसके दुबे, सेल (सीसीएसओ) के जीएम अनिल अलहातू, बीसीसीएल के जीएमपी विद्युत साह, सीनीयर जर्नलिस्ट जीवेश रंजन सिंह, चंदन शर्मा, ज्ञानवर्द्धन मिश्र, जीटा के अध्यक्ष अमितेश सहाय, महासचिव राजीव शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।






