धनबाद पुलिस की लापरवाही, दुष्कर्म पीड़िता का वीडियो वायरल, FIR तक नहीं! SSP को हाईकोर्ट ने किया तलब

झारखंड हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता का आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बावजूद FIR दर्ज नहीं करने पर धनबाद पुलिस को फटकार लगाई है। कोर्ट ने SSP प्रभात Kumar को व्यक्तिगत रूप से तलब कर जवाब मांगा है।

धनबाद पुलिस की लापरवाही, दुष्कर्म पीड़िता का वीडियो वायरल, FIR तक नहीं! SSP को हाईकोर्ट ने किया तलब
झारखंड हाईकोर्ट (फाइल फोटो)।

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड उच्च न्यायालय ने धनबाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी जताते हुए जिले के SSP प्रभात कुमार को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मामला एक दुष्कर्म पीड़िता के आपत्तिजनक वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने और उसके बावजूद FIR दर्ज नहीं किए जाने से जुड़ा है।

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हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि जब शिकायत में संज्ञेय अपराध का स्पष्ट उल्लेख है, तब अब तक प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई। अदालत ने इसे पुलिस की गंभीर लापरवाही माना है।
क्रिमिनल अपील की सुनवाई में उठा मामला
यह मामला क्रिमिनल अपील (डीबी) संख्या 53/2025 से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट, रांची में न्यायमूर्ति सुजीत नारायण और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ में हुई। मामले में आरोपी रवी साव को पहले ही अपील बेल मिल चुकी थी। उसे पीड़िता के साथ दुष्कर्म के मामले में सजा सुनाई गई थी, जिसके खिलाफ उसने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।
जेल से छूटते ही आरोपी पर नया आरोप
पीड़िता की ओर से जुलाई 2025 में एक आवेदन दाखिल किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि जेल से बाहर आने के बाद आरोपी रवी साव ने उसका आपत्तिजनक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। पीड़िता ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए आरोपी की जमानत रद्द करने की मांग की। याचिका में कहा गया कि आरोपी जेल से छूटने के बाद भी लगातार अवैध गतिविधियों में शामिल है और पीड़िता को मानसिक प्रताड़ना दे रहा है।
साइबर पुलिस को शिकायत, फिर भी FIR नहीं
पीड़िता ने इस मामले की शिकायत साइबर पुलिस में भी दर्ज कराई थी। शिकायत में स्पष्ट रूप से संज्ञेय अपराध का उल्लेख था। इसके बावजूद पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। हाईकोर्ट ने पहले इस मामले में धनबाद पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में शिकायत को सही माना, लेकिन FIR दर्ज नहीं होने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया।
कोर्ट ने पूछा—जब अपराध स्पष्ट है तो FIR क्यों नहीं?
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने तीखा सवाल किया—जब शिकायत और पुलिस रिपोर्ट दोनों में अपराध की पुष्टि हो चुकी है, तो फिर FIR दर्ज करने में देरी क्यों? इस पर अदालत ने पुलिस की उदासीनता पर नाराजगी जाहिर करते हुए SSP प्रभात कुमार को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया।
मंगलवार को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की गई है, जहां धनबाद SSP को कोर्ट के समक्ष जवाब देना होगा। इस मामले ने एक बार फिर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
झारखंड हाईकोर्ट के इस सख्त रुख को न्याय व्यवस्था की गंभीरता और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।