झारखंड में वर्दी वालों की जेब खाली! पुलिसकर्मियों को 2 महीने से वेतन नहीं, पुलिस एसोसिएशन ने CM से लगाई गुहार
झारखंड में पुलिसकर्मियों को दो महीने से वेतन नहीं मिलने पर संकट गहरा गया है। बच्चों की फीस, बैंक EMI और घरेलू खर्च ठप होने से परेशान पुलिस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल वेतन भुगतान की मांग की है।
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में कानून-व्यवस्था संभालने वाले पुलिस पदाधिकारी इन दिनों खुद आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। राज्य के हजारों पुलिसकर्मियों को पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके परिवारों पर गंभीर असर पड़ा है। बच्चों की स्कूल फीस बकाया है, बैंक की EMI बाउंस हो रही है और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया है।
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इस गंभीर स्थिति को लेकर झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द वेतन भुगतान नहीं हुआ तो पुलिस महकमे में असंतोष और अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
मुख्यमंत्री को भेजा गया पत्र, पुलिस बल की पीड़ा सामने आई
झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश संयुक्त सचिव-सह-कोषाध्यक्ष राकेश कुमार पांडेय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पुलिस बल की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वर्दी पहनकर दिन-रात जनता की सुरक्षा में लगे जवान आज खुद आर्थिक असुरक्षा के घेरे में हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि मार्च माह का वेतन अब तक पुलिस पदाधिकारियों के खातों में नहीं पहुंचा है। आयकर और राज्य सेवा शुल्क की भारी कटौती के बाद वेतन लगभग शून्य हो गया है। तकनीकी कारणों और ट्रेजरी से जुड़ी विसंगतियों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
“वेतन शून्य, चुनौतियां अनंत”
एसोसिएशन ने पत्र में भावुक शब्दों में लिखा है कि पुलिसकर्मियों के घरों में आज पाई-पाई का संकट है। बच्चों की स्कूल फीस समय पर जमा नहीं हो पा रही है। कई परिवारों के सामने राशन और दवा तक की समस्या खड़ी हो गई है। बैंकों की EMI समय पर नहीं चुकने के कारण खाते डिफॉल्ट की स्थिति में पहुंच रहे हैं। इससे भविष्य में पुलिसकर्मियों का क्रेडिट स्कोर खराब होने का खतरा बढ़ गया है। कई जवान मानसिक तनाव में हैं, जिसका असर उनकी कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है।
ट्रेजरी विवाद की जांच हो, लेकिन वेतन रोकना अन्याय
एसोसिएशन ने स्पष्ट कहा है कि यदि राज्य की ट्रेजरी में किसी प्रकार की विसंगति या घोटाले की आशंका है, तो उसकी निष्पक्ष जांच अवश्य होनी चाहिए। लेकिन इसकी आड़ में पुलिसकर्मियों का वेतन रोकना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। पत्र में सवाल उठाया गया है कि एक मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान अधिकारी अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कैसे निभा सकता है? ऐसी स्थिति न केवल पुलिस व्यवस्था बल्कि पूरे सुशासन की नींव को कमजोर कर सकती है।
जल्द समाधान नहीं हुआ तो बढ़ सकता है असंतोष
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर वेतन भुगतान सुनिश्चित कराया जाए। एसोसिएशन का कहना है कि पुलिसकर्मी सरकार की रीढ़ हैं, यदि वही आर्थिक संकट में रहेंगे तो राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ना तय है।
पुलिस महकमे में बढ़ती नाराजगी को देखते हुए यह मामला अब केवल वेतन भुगतान का नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और सुशासन की परीक्षा बन गया है।






