धनबाद: BCCL की मुनीडीह कोल वाशरी में मौत का पहाड़! 3 लाख टन स्लरी के खेल में दब गए 4 मजदूर, ‘अर्थ तंत्र’ पर बवाल

धनबाद के मुनीडीह कोल वाशरी में स्लरी लोडिंग के दौरान मलबा गिरने से 4 दिहाड़ी मजदूरों की मौत हो गई। हादसे के बाद 3 लाख टन स्लरी कोयले के स्टॉक, सुरक्षा लापरवाही और कथित ‘अर्थ तंत्र’ पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

धनबाद: BCCL की मुनीडीह कोल वाशरी में मौत का पहाड़! 3 लाख टन स्लरी के खेल में दब गए 4 मजदूर, ‘अर्थ तंत्र’ पर बवाल
बीसीसीएल में सुरक्षा मानकों पर उठ रहे सवाल।

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद के मुनीडीह स्थित बीसीसीएल (BCCL) की कोल वाशरी में शनिवार शाम हुए भीषण हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। स्लरी (वाश कोल डस्ट) लोडिंग के दौरान अचानक मलबा भरभराकर गिर पड़ा, जिसमें दबकर चार दिहाड़ी मजदूरों की मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में मातम पसरा है, वहीं स्थानीय लोगों और मजदूरों का गुस्सा भी खुलकर सामने आ गया है।

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हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल वाशरी परिसर में जमा करीब तीन लाख टन स्लरी कोयले के स्टॉक और उससे जुड़े कथित ‘अर्थ तंत्र’ पर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस स्लरी कोयले के उठाव और लोडिंग में लंबे समय से बड़े पैमाने पर गड़बड़ी चल रही थी, जिसमें अधिकारियों, ठेकेदारों और स्थानीय स्तर पर मिलीभगत का खेल जारी था।

मौत का पहाड़ बन गया स्लरी का ढेर

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोडिंग प्वाइंट पर करीब आधा दर्जन विशाल स्लरी कोयले के पहाड़ जैसे ढेर जमा थे। ये ढेर इतने ऊंचे थे कि कभी भी खिसकने का खतरा बना रहता था, लेकिन इन्हें हटाने या सुरक्षित करने का कोई इंतजाम नहीं किया गया। शनिवार शाम करीब सवा पांच बजे, जब मजदूर ट्रकों में मैन्युअल लोडिंग कर रहे थे, तभी अचानक ऊपर से भारी मात्रा में मलबा गिर पड़ा। मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और वे मलबे में दब गए। मौके पर चीख-पुकार, अफरातफरी और आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। साथी मजदूरों ने उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

मृतकों की पहचान

इस हादसे में जिन चार मजदूरों की मौत हुई, उनकी पहचान इस प्रकार हुई है—

माणिक बाउरी (45), गोपीनाथडीह
दिनेश बाउरी (52), गोपीनाथडीह
दीपक बाउरी (50), समशिखरा
मोड़ा गोप (59), रुदी कपूरिया

वहीं गोपीनाथडीह की सुनीता देवी इस हादसे में बाल-बाल बच गईं। वह किसी तरह मलबे से बाहर निकलने में सफल रहीं।

‘अर्थ तंत्र’ पर फूटा लोगों का गुस्सा

हादसे के बाद आक्रोशित परिजन और स्थानीय लोग वाशरी गेट पर जुट गए। लोगों ने आरोप लगाया कि स्लरी कोयले की निकासी में नियमों को ताक पर रखकर अवैध ढंग से लोडिंग कराई जा रही थी। भीड़ में कई लोग बीसीसीएल अधिकारियों, ठेकेदारों और लोकल मुंशी की मिलीभगत की खुलकर चर्चा कर रहे थे। स्थानीय स्तर पर गोराई, लाला, गोप और पासवान जैसे नाम भी आरोपों के घेरे में लिए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर केवल आर्थिक लाभ को प्राथमिकता दी गई, जिसकी कीमत चार गरीब मजदूरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

सुरक्षा मानकों की खुली पोल

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा प्रबंधन की गंभीर विफलता का उदाहरण बन गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इतने जोखिमपूर्ण कार्य के दौरान मौके पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। न तो ढलान नियंत्रण की व्यवस्था थी, न ही स्लरी ढेर की स्थिरता की नियमित निगरानी। मजदूर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों और निगरानी के काम कर रहे थे। इस घटना ने बीसीसीएल की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और कार्यस्थल प्रोटकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सात ट्रक मौके पर, काम पूरी तरह बंद

हादसे के बाद फिलहाल वाशरी में काम पूरी तरह बंद कर दिया गया है। लोडिंग प्वाइंट के पास सात ट्रक खड़े पाए गए, जिनमें से दो ट्रकों में आधा कोयला पहले से लोड था। वाशरी प्रबंधन ने परिसर के अंदर और बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। स्थानीय पुलिस, सीआईएसएफ, मुनीडीह ओपी, पुटकी और भागाबांध थाना की टीम राहत और कानून-व्यवस्था में जुटी रही।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे

मुनीडीह कोल वाशरी में यह पहला हादसा नहीं है। करीब पांच वर्ष पहले वेस्टर्न वाशरी जोन के अंतर्गत मेंटेनेंस कार्य के दौरान गियर बॉक्स और ड्रम बदलते समय चेन टूट गई थी, जिससे 704 बेल्ट का चौथा तल्ला भरभराकर गिर गया था। उस हादसे में आधा दर्जन ठेका मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए थे।

इसके अलावा सितंबर 2025 में बीसीसीएल ब्लॉक-2 क्षेत्र की न्यू मधुबन वाशरी में करीब 100 फीट ऊंचा साइलो प्लांट ढह गया था, जिसमें 5,000 टन कोयले का मलबा गिरा था। एक मजदूर 12 घंटे तक फंसा रहा था।

1983 से चल रही है मुनीडीह वाशरी

बताया जाता है कि मुनीडीह कोल वाशरी की स्थापना वर्ष 1983 में हुई थी। इसकी वार्षिक क्षमता लगभग 1.6 मिलियन टन है। इतने बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान में बार-बार हादसों का होना प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि इस बार जांच केवल कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होती है। चार मजदूरों की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब सुरक्षा पर ‘अर्थ तंत्र’ हावी हो जाता है, तो सबसे पहले गरीब मजदूर ही उसकी कीमत चुकाते हैं।