मुनिडीह कोल वाशरी हादसा: 20-20 लाख मुआवजा, आश्रितों को नौकरी और बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा

धनबाद के मुनिडीह कोल वाशरी हादसे में 4 मजदूरों की मौत के बाद बीसीसीएल प्रबंधन, प्रशासन और परिजनों के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ। प्रत्येक परिवार को 20-20 लाख मुआवजा, नौकरी, बच्चों की शिक्षा और चिकित्सा सुविधा देने पर सहमति बनी।

मुनिडीह कोल वाशरी हादसा: 20-20 लाख मुआवजा, आश्रितों को नौकरी और बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा
त्रिपक्षीय वार्ता में बनी सहमति।
  •  मृतकों के परिवारों को 20 लाख
  • नौकरी और DAV में बच्चों का दाखिला

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद के मुनिडीह कोल वाशरी में हुए दर्दनाक हादसे के बाद आखिरकार मृतकों के परिजनों के लिए राहत का रास्ता खुल गया है। शनिवार शाम हुए इस हादसे में चार मजदूरों की मौत के बाद परिजनों और श्रमिक संगठनों के भारी विरोध के बीच देर रात बीसीसीएल प्रबंधन, प्रशासन, ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों और पीड़ित परिवारों के बीच लंबी त्रिपक्षीय वार्ता हुई। इस वार्ता के बाद एक आधिकारिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

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समझौते के तहत हादसे में जान गंवाने वाले चारों श्रमिकों के परिवारों को कुल 20-20 लाख रुपये की अनुग्रह राशि, एक आश्रित को नौकरी, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा सुविधा और अंतिम संस्कार सहायता देने पर सहमति बनी है।

20 लाख रुपये का मुआवजा, दो किस्तों में भुगतान

समझौते के अनुसार प्रत्येक मृतक परिवार को कुल 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि दो चरणों में दी जाएगी। पहली किस्त के रूप में 10 लाख रुपये अगले 10 दिनों के भीतर दिए जाएंगे, जबकि दूसरी किस्त के रूप में 10 लाख रुपये अगले 20 दिनों के भीतर भुगतान किए जाएंगे। बताया गया कि दूसरी किस्त की राशि बीसीसीएल डीओ धारकों से वसूली कर दी जाएगी। इसके अलावा अंतिम संस्कार के लिए तत्काल राहत स्वरूप प्रत्येक परिवार को 75-75 हजार रुपये की राशि भी दी जाएगी।

आश्रित को नौकरी, बच्चों की पढ़ाई का भी जिम्मा

बीसीसीएल प्रबंधन ने प्रत्येक मृतक परिवार के एक पात्र आश्रित को मुनिडीह परियोजना की आउटसोर्सिंग कंपनी में एचपीसी वेतनमान पर संविदात्मक नौकरी देने पर भी सहमति दी है। साथ ही मृतकों के बच्चों को डीएवी स्कूल में प्रवेश दिलाने में प्रबंधन मदद करेगा। परिवारों को चिकित्सा सुविधा और बीसीसीएल के मानकों के अनुसार अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

कैसे हुआ हादसा?

यह दर्दनाक घटना शनिवार शाम करीब पांच बजे मुनिडीह ओपी क्षेत्र स्थित बीसीसीएल मुनिडीह कोल वाशरी के लोडिंग प्वाइंट पर हुई। बताया जा रहा है कि लगभग 40 से 43 फीट ऊंचे स्लरी डंप के नीचे मजदूरों को ट्रक लोडिंग के लिए भेजा गया था। इसी दौरान करीब पांच टन वजनी कोयला स्लरी का मलबा अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा, जिसकी चपेट में छह मजदूर आ गए। इस हादसे में माणिक बाउरी, दिनेश बाउरी, दीपक बाउरी और हेमलाल गोप की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

परिजनों ने शव रखकर किया प्रदर्शन

घटना के बाद आक्रोशित परिजन और ग्रामीणों ने कोल वाशरी गेट के सामने शव रखकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। श्रमिक संगठनों ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही, जिसके बाद प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन को वार्ता के लिए आगे आना पड़ा।

सुरक्षा में भारी लापरवाही के आरोप

सूत्रों के अनुसार मजदूरों पर बेहतर गुणवत्ता का स्लरी लोड करने का दबाव बनाया जा रहा था। मना करने पर नौकरी से हटाने की धमकी तक दी गई थी। आरोप है कि इसी दबाव में मजदूरों को असुरक्षित स्थान पर काम करने भेजा गया, जिसके कारण यह बड़ा हादसा हुआ।सुरक्षा में लापरवाही को लेकर कोल वाशरी जीएम अरिंदम मुस्ताफी, एजेंट, प्रोजेक्ट ऑफिसर राजेंद्र पासवान और सेफ्टी अधिकारी विद्यासागर बर्णवाल जांच के घेरे में आ गए हैं।

मुख्यालय को सूचना देने में भी हुई देरी

सबसे बड़ी लापरवाही यह भी सामने आई है कि हादसे की सूचना बीसीसीएल मुख्यालय को करीब दो घंटे बाद दी गई। इससे राहत और बचाव कार्य में देरी हुई। बताया जा रहा है कि कोल इंडिया चेयरमैन ने पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं।

पूर्व मुखिया ने उठाए गंभीर सवाल

मौके पर मौजूद और मृतक परिवारों की ओर से वार्ता में शामिल गोपनाडीह पंचायत के पूर्व मुखिया छोटू कुमार दास ने कहा कि यह घटना पूरी तरह सुरक्षा में लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने कहा, “प्रबंधन ने 20-20 लाख मुआवजा और नौकरी देने पर सहमति दी है, लेकिन हमारी मांग है कि दोषियों पर कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।”

कोयला खदानों की सुरक्षा फिर सवालों के घेरे में

मुनिडीह हादसे ने एक बार फिर धनबाद की कोयला खदानों और वाशरियों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि उत्पादन के दबाव में मजदूरों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में श्रमिकों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।