"दुनिया ताकत की भाषा समझती है": मोहन भागवत बोले- हिंदुओं को आत्मरक्षा के लिए बनना होगा शक्तिशाली

तिरुवनंतपुरम में RSS के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया ताकत की भाषा समझती है और हिंदुओं को आत्मरक्षा के लिए मजबूत बनना होगा। उन्होंने हिंदू राष्ट्र, पाकिस्तान से संवाद और भारत की सांस्कृतिक पहचान पर भी विस्तार से अपनी बात रखी।

"दुनिया ताकत की भाषा समझती है": मोहन भागवत बोले- हिंदुओं को आत्मरक्षा के लिए बनना होगा शक्तिशाली
मोहन भागवत का संदेश: ताकतवर बनो, तभी दुनिया सुनेगी।

   HighLights

  • हिंदू केवल धर्म नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत और सांस्कृतिक पहचान है
  • पाकिस्तान को लेकर कहा- बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं होने चाहिए
  • "हम हिटलर नहीं हैं", इसलिए अच्छे तत्वों को बचाए रखना जरूरी
  • पाकिस्तान में आज भी बड़ी संख्या में लोग विभाजन को गलत मानते हैं

तिरुवनंतपुरम(Threesocieties.com Desk): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने कहा है कि आज की दुनिया सच्चाई से ज्यादा ताकत का सम्मान करती है। इसलिए हिंदू समाज को अपनी सुरक्षा, स्वाभिमान और अस्तित्व की रक्षा के लिए संगठित और शक्तिशाली बनना होगा। उन्होंने यह बातें RSS के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में कहीं।

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भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि यदि कोई राष्ट्र शक्तिशाली है तो दुनिया उसकी गलतियों को भी नजरअंदाज कर देती है, लेकिन कमजोर की बात कोई नहीं सुनता। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि दुनिया का व्यवहार शक्ति के आधार पर चलता है, इसलिए समाज को आत्मरक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए सामर्थ्यवान बनना आवश्यक है।

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हिंदू केवल धर्म नहीं, सांस्कृतिक पहचान

RSS प्रमुख ने स्पष्ट किया कि संघ जब "हिंदू" शब्द का प्रयोग करता है तो उसका आशय किसी एक पूजा-पद्धति या धार्मिक व्यवस्था से नहीं होता। उन्होंने कहा कि हिंदू भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान का प्रतीक है, जिसके अंतर्गत विविध परंपराएं, मान्यताएं और जीवनशैलियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना, उसमें अपनत्व की भावना बढ़ाना और उसे आत्मविश्वास से भरना है। भागवत ने कहा कि भारत हमेशा से एक राष्ट्र रहा है और उसकी पहचान हिंदू सभ्यता से जुड़ी हुई है।

मुसलमानों और ईसाइयों को लेकर क्या बोले?

भागवत ने कहा कि जब स्वयंसेवक मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोगों से मिलते हैं तो वे उन्हें बताते हैं कि सांस्कृतिक विरासत, पूर्वजों और भारतीय परंपराओं के दृष्टिकोण से वे भी इसी सभ्यता का हिस्सा हैं। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि इस विचार से हर कोई सहमत नहीं होता।

पाकिस्तान को लेकर संघ प्रमुख का बड़ा बयान

कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान और भारत के संबंधों पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि RSS की कोई अलग विदेश नीति नहीं है और संगठन केंद्र सरकार की नीतियों का समर्थन करता है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के भीतर आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद हैं जो भारत के विभाजन को ऐतिहासिक भूल मानते हैं। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान में कई बुद्धिजीवी, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता ऐसे हैं जो दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों की वकालत करते हैं और कट्टर विचारधाराओं का विरोध करते हैं।

"हम हिटलर नहीं हैं"

भागवत ने भविष्य की संभावित परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि कभी ऐसा समय आता है जब भारत पाकिस्तान पर निर्णायक बढ़त हासिल कर लेता है, तब भी वहां के लोगों के साथ मानवीय व्यवहार करना होगा। उन्होंने कहा, "हम हिटलर नहीं हैं। यह हमारी संस्कृति नहीं है। अन्याय और अत्याचार का अंत होना चाहिए, लेकिन जो अच्छा है उसे बचाए रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।"भागवत ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में संवाद के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए जाने चाहिए। बातचीत और संपर्क के माध्यम खुले रखना ही भारतीय परंपरा और सभ्यता की पहचान है।

RSS को लेकर गलतफहमियों का जिक्र

अपने संबोधन में संघ प्रमुख ने कहा कि RSS दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है, लेकिन इसके बारे में सबसे ज्यादा गलतफहमियां भी फैली हुई हैं। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों की वर्दी और अनुशासन को देखकर कई लोग इसे अर्धसैनिक संगठन समझ लेते हैं, जबकि वास्तव में यह समाज निर्माण और राष्ट्र सेवा का संगठन है।

शताब्दी वर्ष में संगठन विस्तार पर जोर

RSS अपने शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य संगठन के विचारों को समाज तक पहुंचाना, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना और युवाओं को राष्ट्र निर्माण के कार्यों से जोड़ना बताया जा रहा है।भागवत के इस बयान को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें उन्होंने हिंदू समाज की शक्ति, भारत की सांस्कृतिक पहचान, पाकिस्तान के साथ संवाद और भविष्य की चुनौतियों पर संघ का दृष्टिकोण स्पष्ट किया है।