दिल्ली में ‘विकसित भारत @2047’ पर मंथन: ग्रामीण समृद्धि, किसानों की खुशहाली और सुशासन पर जोर
नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में “विकसित भारत @2047” विषय पर आयोजित कार्यशाला में ग्रामीण भारत के रूपांतरण, किसानों की समृद्धि, भूमि पारदर्शिता, डिजिटल सशक्तिकरण और सुशासन पर गहन चर्चा हुई। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा सांसद, विधायक और नीति विशेषज्ञ शामिल हुए।
- किसानों से लेकर भूमि प्रबंधन तक हुई बड़ी चर्चा
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk) : देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर के गुलमोहर हॉल में सोमवार को “विकसित भारत @2047 हेतु ग्रामीण भारत का रूपांतरण: समन्वय, सुशासन एवं ग्रामीण समृद्धि” विषयक एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च एंड चेंज फाउंडेशन (NFPRC Foundation) द्वारा किया गया, जिसमें देशभर के वरिष्ठ सांसदों, विधायकों, केंद्रीय मंत्रियों, नीति विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने भाग लिया।
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कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री Narendra Modi के “विकसित भारत @2047” के संकल्प को मजबूत आधार प्रदान करना था। इसमें ग्रामीण भारत के सर्वांगीण विकास, किसानों की समृद्धि, भूमि प्रबंधन, आजीविका सुदृढ़ीकरण और सुशासन जैसे विषयों पर गंभीर और सार्थक मंथन हुआ।
बैठक की अध्यक्षता राज्यसभा सांसद एवं NFPRC Foundation के अध्यक्ष Tarun Chugh ने की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब ग्रामीण भारत आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त बनेगा। इसके लिए सरकार, समाज और नीति-निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री Jitendra Singh, राज्यसभा सांसद Sudhanshu Trivedi, वरिष्ठ नीति विशेषज्ञ एवं पूर्व आर्थिक सलाहकार परिषद सदस्य Ashok Gulati, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी बी.के. अग्रवाल सहित कई प्रमुख हस्तियों ने अपने विचार रखे।मौके पर चतरा सांसद कालीचरण सिंह, जमशेदपुर सांसद Bidyut Baran Mahato, मुख्य सचेतक सह विधायक नवीन जायसवाल, विधायक राज सिन्हा, विधायक अमित यादव, कुशवाहा शशिभूषण मेहता सहित विभिन्न राज्यों से अनेक सांसदों और विधायकों की उपस्थिति रही।
बैठक में विशेष रूप से ग्रामीण रोजगार के अभिसरण एवं संतृप्ति की पुनर्कल्पना, भूमि पारदर्शिता, डिजिटल एवं संपत्ति सशक्तिकरण के माध्यम से ग्रामीण विकास, तथा सरकारी योजनाओं के जरिए किसानों को सशक्त बनाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और तकनीकी सुविधाओं को मजबूत किया जाए, तो भारत का समग्र विकास स्वतः तेज होगा। भूमि प्रबंधन में पारदर्शिता और डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली को बढ़ावा देना भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना गया।
वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण भारत की समृद्धि ही विकसित भारत की आधारशिला है। गांव मजबूत होंगे तो देश मजबूत होगा। किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं को रोजगार देने और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से ही भारत 2047 तक विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि “विकसित भारत @2047” केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का साझा संकल्प है। इसके लिए समन्वित, प्रभावी और जनहितकारी प्रयासों की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के चिंतन, संवाद और नीति-आधारित विमर्श निश्चित रूप से देश के समग्र विकास को नई दिशा प्रदान करेंगे और ग्रामीण भारत को विकास की मुख्यधारा में और अधिक मजबूती से स्थापित करेंगे।






