धनबाद। लोकसभा चुनाव संपन्न होने के साथ ही धनबाद जिला कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया है। चुनाव परिणाम से पहले विरोधियों पर भीतरघात व पार्टी कैंडिडेट अनुपमा सिंह के खिलाफ काम करने का आरोप लगया जा रहा है। धनबाद जिला कांग्रेस प्रसिडेंट मंगलवार को दो उपाध्यक्ष सहित नौ लोग पार्टी से छह वर्षों के लिए कांग्रेस से निष्कासित कर दिया है। हालांकि इनमें से तीन लोग पार्टी छोड़कर पहले ही बीजेपी में शामिल हो चुके है।
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कांग्रेस की ओर से जिन लोगों के निष्कासन का पत्र जारी किया गया है, उनमें ललन चौबे, मनोज कुमार सिंह, राजीव रंजन चौबे, उमा चरण महतो, रामचंद्र शर्मा, रामप्रवेश शर्मा, क्रिट भूषण रुंज ,मुकेश राणा, जगदीश साव शामिल है। राजीव रंजन चौबे जिला महामंत्री व रामचंद्र शर्मा जिला उपाध्यक्ष है। जबकि रामप्रवेश शर्मा सक्रिय सदस्य है। क्रिट भूषण रुंज भी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष पद पर थे।
धनबाद जिला कांग्रेस प्रसिडेंट संतोष कुमार सिंह 28 मई को पत्र जाी कर नौ नेताओं को पार्टी से निष्कासन की सूचना दी है। पत्र में कहा गया है कि धनबाद लोकसभा चुनाव में आपलोगों के क्रियाकलाप से कांग्रेस पार्टी की छवि धूमिल हुई है। आप लोगों ने पार्टी में रहते हुए पार्टी विरोधी कार्य किया है। अतः आप लोगो को 6 वर्ष के लिए कांग्रेस पार्टी से निष्कासित किया जाता है।
जानकार सोर्सेज का कहना है कि कांग्रेस पार्टी ने पार्टी विरोधी कार्य करने के लिए कुछ और लोगों को चिन्हित किया है। इन नेताओं के निष्कासन के अनुशंसा प्रदेश समिति से की गई है। वहां से अनुमति मिलते ही उनके निष्कासन की कार्रवाई की घोषणा होग। धनबाद लोकसभा क्षेत्र में 25 मई को हुए वोटिंग में कांग्रेस में भी भितरघात की बात कही जा रही है। रिजल्ट आने के बाद धनबाद जिला में कांग्रेस की राजनीति में कुछ उलटफेर की संभावना जतायी जा रही है।
आरोप लग रहा है कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष व कैंडिडेट के करीबी लोग अपने राजनीतिक विरोधियों को भीतरघात का आरोप लगाकर पार्टी से निकलवाने की तैयारी में हैं। हालांकि ऐसे लोगों ने जिला अध्यक्ष के खिलाफ पुख्ता सबूत जमा किया है। मौका मिलते ही सबूत को सार्वजनिक किया जा सकता है। पार्टी से निकाले गये नेताओं ने कहा है कि जिला अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह खुद पार्टी विरोधी कार्य करते रहे हैं। उन्हें पार्टी विरोधी कार्य के लिए कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा था। लोकसभा चुनाव में ददई दूबे व विधानसभा चुनाव में झरिया में कैंडिडेट के खिलाफ काम करने का आरोप लग चुका है। बीजेपी एमपी व एमएलए के साथ राजनीतिक नजदीकियां का भी आरोप लगता रहा है। अन्य कई गंभीर आरोप हैं।