ट्विशा शर्मा मौत केस में बड़ा एक्शन: कोर्ट से सरेंडर ड्रामा फेल, पति समर्थ हिरासत में… BCI ने भी सस्पेंड किया लाइसेंस
भोपाल की मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह ने जबलपुर कोर्ट में सरेंडर की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उसका वकालत लाइसेंस भी सस्पेंड कर दिया है। मामले की जांच अब CBI करेगी और AIIMS की टीम दोबारा पोस्टमार्टम करेगी।
भोपाल (Threesocieties.com Desk): मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब देशभर में सुर्खियों का केंद्र बन चुका है। इस हाई-प्रोफाइल केस में शुक्रवार को जबलपुर जिला अदालत परिसर में करीब दो घंटे तक हाई-वोल्टेज ड्रामा चला, जब मुख्य आरोपी और ट्विशा के पति समर्थ सिंह ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में सरेंडर करने की कोशिश की। हालांकि उसकी यह रणनीति पूरी तरह फेल हो गई और अंततः भोपाल पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
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मामले में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (BCI) ने समर्थ सिंह का वकालत लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। अब इस पूरे मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है, जबकि दिल्ली AIIMS की विशेषज्ञ टीम ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम करेगी।
कोर्ट परिसर बना हाई-वोल्टेज ड्रामे का केंद्र
शुक्रवार दोपहर जैसे ही समर्थ सिंह के जबलपुर जिला अदालत पहुंचने की खबर फैली, कोर्ट परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई। मीडिया, वकील, पुलिस और ट्विशा शर्मा के परिजन बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। समर्थ सिंह खुद को मीडिया की नजरों से बचाने के लिए मास्क, टोपी, गमछा और चश्मे में दिखाई दिया। वह लगातार कोर्ट रूम बदलता रहा और अपने वकीलों के साथ कानूनी विकल्प तलाशता रहा। कभी सीजेएम कोर्ट, कभी जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट तो कभी बार एसोसिएशन कक्ष—करीब दो घंटे तक सरेंडर की कानूनी कवायद चलती रही। लेकिन कानूनी क्षेत्राधिकार की बाधा उसके रास्ते में सबसे बड़ी दीवार बन गई।
“जबलपुर कोर्ट में सरेंडर मान्य नहीं”
ट्विशा पक्ष के अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने स्पष्ट कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक समर्थ सिंह केवल भोपाल की अधीनस्थ अदालत या जांच अधिकारी (IO) के समक्ष ही आत्मसमर्पण कर सकता है। यही वजह रही कि जबलपुर जिला अदालत की किसी भी कोर्ट ने उसके सरेंडर आवेदन पर कोई आदेश पारित नहीं किया। कानूनी आधार नहीं मिलने के कारण समर्थ सिंह की पूरी रणनीति धरी की धरी रह गई।
कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी, मीडिया से बचता रहा समर्थ
घटनाक्रम के दौरान अदालत परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। समर्थ सिंह मीडिया के सवालों से लगातार बचता नजर आया। वहीं कुछ मीडियाकर्मियों और ट्विशा पक्ष के वकीलों ने आरोप लगाया कि समर्थ समर्थक कुछ लोगों ने कवरेज रोकने की कोशिश की और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच देर शाम भोपाल पुलिस सक्रिय हुई और समर्थ सिंह को सुरक्षित तरीके से ओमती थाने ले जाया गया। बाद में उसे भोपाल रवाना कर दिया गया।
BCI का बड़ा एक्शन: वकालत लाइसेंस सस्पेंड
मामले की गंभीरता को देखते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी बड़ा कदम उठाया है। BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि अधिवक्ता समर्थ सिंह को तत्काल प्रभाव से वकालत करने से निलंबित किया जाता है। आदेश के अनुसार, जब तक उसके खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह किसी भी अदालत में प्रैक्टिस नहीं कर सकेगा।
क्या है पूरा मामला?
33 वर्षीय ट्विशा शर्मा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं। पिछले वर्ष उनकी शादी भोपाल निवासी अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी। 12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में उनका शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया, लेकिन ट्विशा के मायके वालों ने गंभीर आरोप लगाए। परिवार का कहना है कि शादी के बाद लगातार दहेज की मांग की जा रही थी और ट्विशा को मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि ट्विशा का जबरन गर्भपात कराया गया और उन्हें मानसिक रूप से बीमार साबित करने के लिए दवाइयां दी जाती थीं।
CCTV फुटेज ने बढ़ाए सवाल
परिवार के अनुसार, घर के CCTV फुटेज में ट्विशा सुबह सामान्य हालत में छत की ओर जाती दिखती हैं। बाद में अफरा-तफरी के बीच उनका शव नीचे लाया जाता नजर आता है। इसी के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। भोपाल पुलिस ने समर्थ सिंह और उसकी मां गिरिबाला सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के लिए 30 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। वहीं उसका पासपोर्ट रद्द कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
CBI करेगी जांच, AIIMS टीम करेगी दोबारा पोस्टमार्टम
मामले की संवेदनशीलता और बढ़ते विवाद को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच CBI को सौंप दी है। इसके अलावा, भोपाल में हुए शुरुआती पोस्टमार्टम पर सवाल उठने के बाद मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने दिल्ली AIIMS की विशेषज्ञ टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने की अनुमति दी है।
बताया जा रहा है कि पिछले 10 दिनों से ट्विशा का शव मेडिकल फ्रीजर में सुरक्षित रखा गया है। AIIMS की टीम अब भोपाल पहुंचकर नए सिरे से फॉरेंसिक जांच करेगी और रिपोर्ट सीधे अदालत को सौंपेगी।
सास गिरिबाला सिंह पर भी गिरी गाज
मामले में ट्विशा की सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह का नाम भी सामने आया है। उन्हें पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है, लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें भोपाल कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया है। अब पूरे देश की नजर इस हाई-प्रोफाइल केस की अगली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।






