झारखंड CM हाउस घेराव केस में बड़ा ट्विस्ट: लंबोदर महतो बरी, सुदेश महतो पर आरोप कायम; जांच पर उठे गंभीर सवाल
2021 के झारखंड CM हाउस घेराव मामले में अदालत ने पूर्व विधायक लंबोदर महतो को बरी कर दिया, जबकि आजसू अध्यक्ष सुदेश महतो समेत पांच नेताओं पर आरोप बरकरार रखे। फैसले के बाद जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री आवास घेराव के 2021 के चर्चित मामले में अदालत के हालिया फैसले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आजसू पार्टी (AJSU) के पूर्व विधायक लंबोदर महतो को अदालत से बड़ी राहत मिली है, जबकि पार्टी अध्यक्ष सुदेश महतो समेत पांच अन्य नेताओं पर आरोप बरकरार रखे गए हैं।
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इस फैसले के बाद न केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है, बल्कि पुलिस जांच की निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 8 सितंबर 2021 का है, जब आजसू पार्टी ने पिछड़ा वर्ग (OBC) से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया था। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पार्टी नेता रांची पहुंचे थे। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ उग्र हो गई थी और सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की गई। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी थी। तत्कालीन अंचलाधिकारी विजय केरकेट्टा की शिकायत पर लालपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
किन नेताओं पर दर्ज हुआ था मामला?
पुलिस ने इस मामले में आजसू अध्यक्ष सुदेश महतो, सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी, पूर्व विधायक लंबोदर महतो, रामचंद्र सहिस, शिवपूजन महतो सहित कुल छह नेताओं को आरोपी बनाया था। इन सभी पर दंगा, सरकारी कार्य में बाधा, पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट, निषेधाज्ञा उल्लंघन और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं।
हाईकोर्ट से मिली थी सशर्त जमानत
मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को सशर्त जमानत दी थी। अदालत ने पीड़ित पुलिसकर्मियों को कुल 80 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही आरोपियों को मोबाइल नंबर नहीं बदलने और जांच में सहयोग करने जैसी शर्तें भी दी गई थीं। इसके बाद 5 मार्च 2022 को सभी नेताओं ने निचली अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जहां उन्हें 25-25 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत मिल गई थी।
23 अप्रैल को आया बड़ा मोड़
मामले में 23 अप्रैल को बड़ा मोड़ आया, जब एमपी-एमएलए कोर्ट में आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी हुई। अदालत ने छह में से केवल पांच नेताओं के खिलाफ आरोप तय किए, जबकि पूर्व विधायक लंबोदर महतो को आरोपमुक्त कर दिया गया।
लंबोदर महतो को कैसे मिली राहत?
लंबोदर महतो की ओर से अदालत में विधानसभा उपस्थिति रजिस्टर पेश किया गया। इसमें दावा किया गया कि घटना के समय वे विधानसभा सत्र में मौजूद थे। इसी दस्तावेज के आधार पर अदालत ने उन्हें राहत देते हुए आरोपमुक्त कर दिया।
फैसले पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
अदालत के इस फैसले के बाद विवाद और गहरा गया है। प्रदर्शन के दौरान ली गई तस्वीरों में लंबोदर महतो की मौजूदगी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या केवल विधानसभा उपस्थिति रजिस्टर के आधार पर किसी को पूरी तरह राहत दी जा सकती है? राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि जिस दिन सुदेश महतो ने भी विधानसभा में उपस्थिति दर्ज कराई थी, उस तथ्य को राहत के आधार के रूप में क्यों नहीं माना गया। यही वजह है कि अब जांच एजेंसियों की निष्पक्षता और केस की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक असर भी संभव
यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील माना जा रहा है। आजसू पार्टी लंबे समय से पिछड़ा वर्ग और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ मुखर रही है।
ऐसे में सुदेश महतो पर आरोप कायम रहना और लंबोदर महतो को राहत मिलना आने वाले समय में झारखंड की राजनीति को और गर्मा सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस फैसले का असर आगामी राजनीतिक रणनीतियों और विपक्षी एकजुटता पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या?
अब पांच नेताओं के खिलाफ अदालत में ट्रायल आगे बढ़ेगा। वहीं लंबोदर महतो को मिली राहत पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और कानूनी बहस दोनों जारी रहने की संभावना है।
झारखंड की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।






