BIT सिंदरी में UPSC का मंत्र: IAS कर्ण सत्यार्थी बोले—सिर्फ पढ़ाई नहीं, व्यक्तित्व विकास से मिलती है सफलता

बीआईटी सिंदरी में UPSC अभ्यर्थियों के लिए आयोजित प्रेरक सत्र में IAS कर्ण सत्यार्थी ने सफलता के मंत्र साझा किए। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा में सफलता केवल रटने से नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, सही रणनीति और मानसिक संतुलन से मिलती है।

BIT सिंदरी में UPSC का मंत्र: IAS कर्ण सत्यार्थी बोले—सिर्फ पढ़ाई नहीं, व्यक्तित्व विकास से मिलती है सफलता
IAS कर्ण सत्यार्थी ने सफलता के मंत्र किए साझा।
  • AIR-09 रैंक हासिल करने वाले IAS कर्ण सत्यार्थी ने छात्रों को दी रणनीतिक तैयारी
  • उत्तर लेखन और मानसिक संतुलन बनाए रखने की सीख

धनबाद (Threesocieties.com Desk): बी.आई.टी. सिंदरी के करियर डेवलपमेंट सेंटर (CDC) द्वारा सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए एक विशेष प्रेरक सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रहे IAS कर्ण सत्यार्थी (UPSC CSE 2015, AIR-09), जिन्होंने छात्रों को UPSC में सफलता के लिए जरूरी रणनीति, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास के महत्व पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

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अपने संबोधन में IAS कर्ण सत्यार्थी ने स्पष्ट कहा कि UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता केवल किताबें रटने से नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए एक सर्वांगीण व्यक्तित्व का विकास आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार को न केवल विषयों की गहरी समझ होनी चाहिए, बल्कि उसके भीतर विश्लेषण क्षमता, उत्तर लेखन कौशल, सामाजिक समझ और मानसिक संतुलन भी होना चाहिए।
आईआईटी खड़गपुर से माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सेवा तक के अपने सफर को साझा करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि लक्ष्य के प्रति समर्पण और निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी है। उन्होंने कहा कि हर छात्र को अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने की दिशा में लगातार काम करना चाहिए।
‘स्टैटिक’ और ‘डायनेमिक’ विषयों के बीच संतुलन बनाए रखने की सलाह

तैयारी की रणनीति पर बात करते हुए उन्होंने ‘स्टैटिक’ और ‘डायनेमिक’ विषयों के बीच संतुलन बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इतिहास, भूगोल, राजनीति जैसे स्थिर विषयों के साथ-साथ समसामयिक घटनाओं की गहरी समझ भी बेहद जरूरी है। अध्याय-वार मजबूत पकड़ और नियमित अभ्यास को उन्होंने सफलता का मूल मंत्र बताया। कोचिंग के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय है। यदि कोई छात्र स्व-अध्ययन से बेहतर तैयारी कर सकता है तो कोचिंग आवश्यक नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आर्थिक स्थिरता और कड़ी मेहनत दोनों ही इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए उन्होंने बैकअप विकल्पों पर भी विचार करें
मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए उन्होंने बैकअप विकल्पों पर भी विचार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एमबीए जैसे विकल्प छात्रों के आत्मविश्वास को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं और असफलता की स्थिति में वैकल्पिक रास्ता प्रदान करते हैं। परीक्षा के विभिन्न चरणों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि CSAT केवल क्वालिफाइंग पेपर होता है, जबकि मेन्स परीक्षा में उत्तर लेखन की गुणवत्ता सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि उत्तर लिखते समय सामाजिक, आर्थिक और कानूनी पहलुओं को शामिल करने से उत्तर अधिक प्रभावशाली बनता है और परीक्षक पर बेहतर प्रभाव पड़ता है।

स्थानीय परिवेश और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा
उन्होंने विद्यार्थियों को अपने स्थानीय परिवेश और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की भी प्रेरणा दी। झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर का उल्लेख करते हुए उन्होंने मंदार वाद्ययंत्र और कुड़ुख भाषा जैसे स्थानीय तत्वों को समझने और सम्मान देने की बात कही। उनका मानना था कि प्रशासनिक सेवा में स्थानीय संस्कृति की समझ एक अधिकारी को बेहतर निर्णय लेने में मदद करती है।
कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) पंकज राय, CDC अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) घनश्याम सहित कई वरिष्ठ प्राध्यापक उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने इस सत्र को बेहद प्रेरणादायक बताया और कहा कि इससे उन्हें UPSC की तैयारी को लेकर नई दिशा और स्पष्टता मिली।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह प्रेरक सत्र न केवल छात्रों के लिए मार्गदर्शक साबित हुआ, बल्कि उन्हें अपने सपनों को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी दे गया।