घटते कामगार, बढ़ते पेंशनभोगी,डगमगाया कोयला मजदूरों का पेंशन फंड, CMPFO ने मांगी 15,424 करोड़ उपयोग की अनुमति
CMPFO Pension Fund Crisis: कोयला खान भविष्य निधि संगठन (CMPFO) का पेंशन फंड 240 करोड़ रुपये के सालाना घाटे में पहुंच गया है। घटते कामगारों और बढ़ते पेंशनभोगियों के बीच 15,424 करोड़ रुपये के पब्लिक अकाउंट फंड के उपयोग, संपत्तियों की बिक्री और NPS लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
- कोयला कामगारों की पेंशन पर मंडराया संकट
- 240 करोड़ सालाना घाटे में CMPFO
धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयला खदानों में वर्षों तक कठिन और जानलेवा परिस्थितियों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों की पेंशन पर अब बड़ा संकट मंडराने लगा है। कोयला खान भविष्य निधि संगठन (CMPFO) का पेंशन फंड गंभीर वित्तीय असंतुलन का शिकार हो गया है। स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि यह फंड हर साल लगभग 240 करोड़ रुपये के घाटे में चल रहा है।
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इस संकट ने केंद्र सरकार, कोयला मंत्रालय और मजदूर संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। फंड को बचाने के लिए अब पब्लिक अकाउंट में जमा 15,424.01 करोड़ रुपये के उपयोग, अनुपयोगी संपत्तियों की बिक्री और नए कर्मचारियों के लिए नई पेंशन व्यवस्था लागू करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
घटते कामगार और बढ़ते पेंशनभोगी बने सबसे बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार CMPFO की मौजूदा वित्तीय परेशानी की सबसे बड़ी वजह कोयला खदानों में नियमित कर्मचारियों की संख्या में लगातार गिरावट है। निजीकरण, मशीनीकरण और नई नियुक्तियों में कमी के कारण फंड में अंशदान देने वाले कर्मचारियों की संख्या घट रही है। दूसरी ओर, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसका सीधा असर पेंशन फंड पर पड़ रहा है, जहां आय कम और व्यय लगातार बढ़ता जा रहा है। यही असंतुलन अब CMPFO की वित्तीय स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
1.16% से बढ़ाकर 7% हुआ अंशदान, फिर भी नहीं सुधरी स्थिति
अक्टूबर 2017 तक कोयला कंपनियां मजदूरी का केवल 1.16 प्रतिशत हिस्सा पेंशन फंड में जमा करती थीं। बाद में इसे बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया, ताकि फंड को स्थिर बनाया जा सके। लेकिन यह बढ़ोतरी भी पर्याप्त साबित नहीं हुई। लगातार बढ़ते पेंशन भुगतान और कम होती नई जमा राशि के कारण घाटा कम होने के बजाय और गहराता गया। इससे स्पष्ट हो गया कि केवल अंशदान बढ़ाने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
CMPFO आयुक्त ने मांगी 15,424 करोड़ के उपयोग की अनुमति
फंड की स्थिति संभालने के लिए CMPFO आयुक्त ने केंद्र सरकार से पब्लिक अकाउंट (PL Account) में जमा 15,424.01 करोड़ रुपये के उपयोग की अनुमति मांगी है। यह राशि वर्षों से जमा है, लेकिन इसका उपयोग सीमित दायरे में ही संभव है। यदि सरकार इसकी अनुमति देती है, तो इससे पेंशन फंड को तत्काल राहत मिल सकती है। इसके साथ ही सरकार द्वारा प्रति कर्मचारी दिए जाने वाले 26.72 रुपये के योगदान को भी कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के बराबर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।
अनुपयोगी जमीनें बिक सकती हैं, किराए पर भी दी जायेंगी
CMPFO के पास देशभर में कई ऐसी जमीनें और संपत्तियां हैं जो वर्तमान में किसी उपयोग में नहीं हैं। संगठन ने सुझाव दिया है कि इन संपत्तियों को बेचकर या लीज पर देकर अतिरिक्त आय जुटाई जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे फंड को कुछ हद तक आर्थिक सहारा मिल सकता है और घाटे को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित मंत्रालयों की मंजूरी के बाद ही संभव होगा।
नए कर्मचारियों के लिए NPS या Unified Pension Scheme पर विचार
भविष्य में संकट को नियंत्रित करने के लिए नए कर्मचारियों के लिए ‘एकीकृत पेंशन योजना’ (Unified Pension Scheme) या ‘राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली’ (NPS) लागू करने की संभावना भी तलाश की जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो भविष्य के कर्मचारियों को वर्तमान CMPFO पेंशन मॉडल के बजाय नई पेंशन प्रणाली के तहत लाया जा सकता है। हालांकि, यह फैसला आसान नहीं होगा क्योंकि इसका सीधा असर लाखों कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ेगा।
मजदूर संगठनों की दो टूक—पेंशन में कटौती स्वीकार नहीं
CMPFO की वित्तीय स्थिति और प्रस्तावित बदलावों को लेकर मजदूर संगठनों ने कड़ा रुख अपना लिया है। यूनियनों का कहना है कि कोयला खदानों में काम करना सामान्य नौकरी नहीं, बल्कि बेहद जोखिम भरा और जानलेवा कार्य है। ऐसे में श्रमिकों की पेंशन सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी। मजदूर नेताओं ने साफ कहा है कि सरकार को फंड बचाने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने चाहिए, लेकिन कर्मचारियों के अधिकारों और भविष्य के साथ समझौता नहीं होना चाहिए।
आने वाले दिनों में बड़ा फैसला संभव
CMPFO की वित्तीय हालत अब उस मोड़ पर पहुंच चुकी है जहां सरकार को जल्द ठोस निर्णय लेना होगा। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले वर्षों में लाखों कोयला कामगारों और पेंशनभोगियों की आर्थिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। अब सबकी नजर केंद्र सरकार, कोयला मंत्रालय और श्रम मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हुई है। कोयला मजदूरों की पेंशन सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक सम्मान का भी बड़ा सवाल बन चुकी है।






