PoK में पाकिस्तान के खिलाफ बगावत तेज! रावलकोट में गूंजा- 'हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं', भारत से जुड़ने की मांग
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी आंदोलन तेज हो गया है। रावलकोट में प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान का हिस्सा होने से इनकार करते हुए भारत के साथ जुड़ने की चेतावनी दी है। राशन संकट, इंटरनेट बंदी और दमन के आरोपों के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।
HighLights:
- रावलकोट के ईदगाह मैदान में हजारों लोगों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया
- प्रदर्शनकारियों ने कहा कि PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं
- खाद्यान्न, ईंधन और दवाइयों की आपूर्ति रोकने का आरोप इस्लामाबाद सरकार पर लगाया गया
- जम्मू कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में कई दिनों से आंदोलन जारी है
- प्रदर्शनकारियों ने सस्ती बिजली, राशन, रोजगार और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की मांग की
- सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में अब तक 22 लोगों की मौत और सैकड़ों लोग घायल
रावलकोट (Threesocieties.com Desk): पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी आंदोलन अब बड़े जनविद्रोह का रूप लेता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को रावलकोट के ईदगाह मैदान में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई और कहा कि वे खुद को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानते हैं।
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प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद सरकार क्षेत्र के लोगों को सामूहिक सजा दे रही है और खाद्यान्न, ईंधन तथा दवाइयों की आपूर्ति को जानबूझकर बाधित किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे तो लोग अपने अस्तित्व और जीवन बचाने के लिए दूसरे विकल्प तलाशने को मजबूर होंगे।
'हम पाकिस्तान में नहीं हैं', प्रदर्शनकारियों का बड़ा दावा
रावलकोट के ईदगाह मैदान में जुटे लोगों ने कहा कि पाकिस्तान सरकार लगातार उनके अधिकारों का हनन कर रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे किसी भी प्रकार की तानाशाही स्वीकार नहीं करेंगे और क्षेत्र के लोगों को उनका लोकतांत्रिक अधिकार मिलना चाहिए।आंदोलन का नेतृत्व कर रही जम्मू कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं ने कहा कि स्थानीय जनता को पाकिस्तान सरकार के राशन या सहायता की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सरकार को इस क्षेत्र की जरूरत है।
कई दिनों से जारी है आंदोलन
PoK के विभिन्न इलाकों में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन जारी हैं। आंदोलनकारी सस्ती बिजली, सस्ता राशन, बेहतर सड़कें, रोजगार के अवसर और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा संगठन पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगाने के बावजूद आंदोलन कमजोर नहीं पड़ा है, बल्कि इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
रक्षा मंत्री के बयान से बढ़ा विवाद
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के उस बयान के बाद और बढ़ गया, जिसमें रावलकोट और मीरपुर के लोगों को "वास्तविक कश्मीरी नहीं" बताया गया था। इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में भारी नाराजगी देखने को मिली और विरोध प्रदर्शन तेज हो गए।
राशन और दवाइयों की कमी से बढ़ी परेशानी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए खाद्यान्न, ईंधन और दवाइयों की सप्लाई प्रभावित की जा रही है। कई बाजारों में जरूरी सामानों की भारी कमी देखी जा रही है, जिससे आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार आंदोलन को कुचलने के लिए आर्थिक दबाव और प्रशासनिक कार्रवाई का सहारा ले रही है।
इंटरनेट बंदी और कार्रवाई से बढ़ा तनाव
रिपोर्टों के अनुसार, जून के पहले सप्ताह से ही PoK के कई हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट और सोशल मीडिया सेवाओं को बंद कर दिया गया है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो बाहरी दुनिया तक न पहुंच सकें। इसके साथ ही आंदोलन से जुड़े कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिसे प्रदर्शनकारी लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के रूप में देख रहे हैं।
22 लोगों की मौत, हालात तनावपूर्ण
लगभग दो सप्ताह से जारी प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में अब तक कम से कम 22 लोगों की मौत होने और सैकड़ों लोगों के घायल होने की खबर है। कई इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात बने हुए हैं और सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे इस्लामाबाद सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।






