झारखंड कांग्रेस में बगावत के सुर! मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने उठाए सवाल, बेटे का इस्तीफा—नेतृत्व पर संकट गहराया
झारखंड कांग्रेस में कमेटी विस्तार के बाद घमासान तेज हो गया है। मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की मांग उठाई है, जबकि उनके बेटे प्रशांत किशोर ने सचिव पद से इस्तीफा दे दिया। कई नेता भी नेतृत्व से नाराज हैं।
रांची (Threesocieties.com Desk) : झारखंड प्रदेश कांग्रेस में कमेटी विस्तार के साथ ही सियासी घमासान तेज हो गया है। पार्टी के अंदर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है, जहां मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रदेश नेतृत्व को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
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सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उनके बेटे प्रशांत किशोर ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सचिव बनाए जाने के बावजूद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने उठाए बड़े सवाल
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू को लिखे पत्र में ‘जंबो-जेट कमेटी’ के गठन पर सवाल उठाते हुए इसे अव्यवहारिक बताया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी कमेटी (314 सदस्य) 81 सीटों वाले राज्य में कितनी प्रभावी होगी, यह बड़ा सवाल है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि पार्टी में “एक आंख में सुरमा और दूसरे में काजल” की नीति अपनाई जा रही है, जिससे कार्यकर्ताओं में भ्रम और नाराजगी है।
योगेंद्र साव के निष्कासन पर भी उठे सवाल
राधाकृष्ण किशोर ने पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के निष्कासन को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने पूछा कि आखिर उनका दोष क्या था, जिन्हें तीन साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया। गौरतलब है कि योगेंद्र साव को 21 मार्च को अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित किया गया था। उस समय पार्टी के अंदर से कोई बड़ा विरोध नहीं आया था, लेकिन अब यह मुद्दा फिर से तूल पकड़ रहा है।
रमा खलखो की पदोन्नति पर भी विवाद
मंत्री ने रमा खलखो को चुनाव प्रबंध समिति में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी की आलोचना की, उन्हें ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे दी गई।
बेटे का इस्तीफा बना बड़ा संकेत
प्रशांत किशोर, जिन्हें हाल ही में प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सचिव बनाया गया था, उन्होंने पद स्वीकारने के तुरंत बाद ही इस्तीफा भेज दिया। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें किसी बड़े पद की उम्मीद थी और प्राथमिकताओं में बदलाव का हवाला देते हुए उन्होंने पद छोड़ दिया।
कई और नेता भी नाराज
सिर्फ एक परिवार ही नहीं, बल्कि कई अन्य नेता भी संगठन से नाराज बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया समन्वयक संजय कुमार ने भी अपनी नाराजगी जताई है। एक पूर्व मंत्री भी संगठन विस्तार से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कई नेताओं ने अभी सार्वजनिक रूप से बयान नहीं दिया है, लेकिन अंदरखाने असंतोष बढ़ता जा रहा है।
क्या कांग्रेस नेतृत्व लेगा बड़ा फैसला?
झारखंड कांग्रेस में बढ़ती नाराजगी ने पार्टी नेतृत्व के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। अब सवाल यह है कि क्या हाईकमान संगठन में बदलाव करेगा या फिर यह असंतोष आगे और बड़ा रूप लेगा। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर समय रहते स्थिति को नहीं संभाला गया, तो इसका असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है।






