नक्सलमुक्त हुआ बिहार! 25 साल से फरार इनामी माओवादी सुरेश कोड़ा ने AK-47 संग किया सरेंडर

तीन लाख के इनामी माओवादी सुरेश कोड़ा ने AK-47 और अन्य हथियारों के साथ सरेंडर किया। STF की बड़ी सफलता के साथ बिहार को नक्सलमुक्त घोषित किया गया। जानें 25 साल से फरार इस नक्सली के अपराध और पुनर्वास पैकेज की पूरी जानकारी।

नक्सलमुक्त हुआ बिहार! 25 साल से फरार इनामी माओवादी सुरेश कोड़ा ने AK-47 संग किया सरेंडर
सुरेश कोड़ा ने एके-47 और अन्य हथियार सौंपे।
  • STF की बड़ी कामयाबी
  • बिहार अब पूरी तरह नक्सलमुक्त घोषित
  •  तीन लाख के इनामी सुरेश कोड़ा ने AK-47, AK-56, INSAS राइफल पुलिस को सौंपे

पटना/मुंगेर (Threesocieties.com Desk)।  बिहार के लिए ऐतिहासिक दिन साबित हुआ, जब राज्य के आखिरी बड़े हथियारबंद माओवादी सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम ने बुधवार को आत्मसमर्पण कर दिया। तीन लाख के इनामी और पिछले 25 वर्षों से फरार चल रहे इस कुख्यात नक्सली ने बिहार एसटीएफ और मुंगेर प्रक्षेत्र के डीआइजी के समक्ष सरेंडर किया। इसके साथ ही बिहार को आधिकारिक तौर पर नक्सलमुक्त घोषित कर दिया गया है।

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हथियारों के साथ सरेंडर

आत्मसमर्पण के दौरान सुरेश कोड़ा ने पुलिस को एक AK-47, एक AK-56, दो INSAS राइफल b  505 जिंदा कारतूस सौंपे। एसटीएफ के [rpr कुंदन कृष्णन ने कहा कि अब राज्य की सीमा के अंदर कोई बड़ा हथियारबंद नक्सली सक्रिय नहीं है। यह सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता है।

25 साल से था सक्रिय, 60 से ज्यादा केस दर्ज

मुंगेर प्रक्षेत्र के डीआइजी राकेश कुमार ने बताया कि सुरेश कोड़ा पर मुंगेर, लखीसराय और जमुई जिलों में हत्या, अपहरण, रंगदारी, विस्फोटक अधिनियम और आर्म्स एक्ट समेत 50 से अधिक मामले दर्ज हैं। वह भाकपा (माओवादी) की स्पेशल एरिया कमेटी का कमांडर और सक्रिय सशस्त्र दस्ते का सदस्य रहा है। लड़ैयाटाड़ थाना क्षेत्र के पैसरा गांव का निवासी सुरेश पिछले दो दशकों से पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था।

सुरेश कोड़ा के चर्चित अपराध

2008: धरहरा में चौकीदार की गला काटकर हत्या

2012: खैरा थाना क्षेत्र में विस्फोट और आगजनी

2017: लखीसराय के कजरा में मुखिया की हत्या

2018: महिला की गला रेतकर हत्या

2018: जमुई में दो भाइयों की हत्या

2018: एसएसबी जवान की हत्या

निर्माण कार्य में लगे 7 वाहनों को आग के हवाले

कई बार पुलिस बल पर फायरिंग और मुठभेड़

एक मुठभेड़ में वह पहाड़ी इलाके में घिर गया था, लेकिन AK-47 से फायरिंग कर फरार हो गया था।

पहाड़ी इलाकों में था छिपा

सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों तक वह मुंगेर, लखीसराय और जमुई के पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय था। भारी मात्रा में हथियार और गोलियों के साथ उसका सरेंडर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। मुंगेर पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में एसटीएफ के डीआईजी संजय कुमार, जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर और एसपी अंजली कुमार भी मौजूद रहे।

मिलेगा इनाम और पुनर्वास पैकेज

पुलिस मुख्यालय के अनुसार आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास योजना के तहत:

तीन लाख रुपये की घोषित इनामी राशि

पांच लाख रुपये प्रोत्साहन राशि

तीन वर्षों तक प्रति माह 10 हजार रुपये

AK-47 और AK-56 के लिए 25-25 हजार

INSAS राइफल के लिए 20 हजार

गोलियों के लिए 1515 रुपये

की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

ऐतिहासिक मोड़ पर बिहार

सुरेश कोड़ा का आत्मसमर्पण केवल एक अपराधी का सरेंडर नहीं, बल्कि बिहार में दशकों से चल रहे नक्सली प्रभाव के अंत का संकेत माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के लगातार दबाव, अभियान और पुनर्वास नीति के कारण यह संभव हो पाया है। बिहार सरकार और सुरक्षा बलों के लिए यह एक बड़ी रणनीतिक सफलता है, जिससे राज्य में विकास और शांति की प्रक्रिया को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।