बिहार: 33 साल बाद इंसाफ: 85 साल के बुजुर्ग समेत 5 दोषियों को जेल, जज बोले- ‘कानून से कोई बच नहीं सकता’

हाजीपुर की अदालत ने 33 साल पुराने गोलीकांड मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। 85 वर्षीय बुजुर्ग समेत पांच दोषियों को कारावास की सजा मिली। कोर्ट ने कहा- ‘कानून से कोई बच नहीं सकता।’

बिहार: 33 साल बाद इंसाफ: 85 साल के बुजुर्ग समेत 5 दोषियों को जेल, जज बोले- ‘कानून से कोई बच नहीं सकता’
1992 में चलाई थी गोली, 2026 में मिली सजा।
  • •33 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में आया फैसला
  • 85 वर्षीय बुजुर्ग को 3 साल, चार अन्य दोषियों को 10-10 साल जेल
  •  हाजीपुर कोर्ट ने कहा- न्याय में देरी हो सकती है, लेकिन अपराधी बच नहीं सकता
  • 1992 में दंपति को गोली मारने के मामले में सुनाई गई सजा

हाजीपुर (Threesocieties.com Desk): अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच पाना आसान नहीं होता। वैशाली जिले की अदालत ने 33 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में ऐसा फैसला सुनाया, जिसने एक बार फिर यह संदेश दिया कि न्याय में देरी हो सकती है, लेकिन अपराधी अंततः कानून के शिकंजे में आता ही है।

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हाजीपुर स्थित जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने 1992 में हुए गोलीकांड मामले में एक ही परिवार के पांच लोगों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। इनमें 85 वर्षीय दीप राय को उम्र और शारीरिक स्थिति को देखते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी गई, जबकि अन्य चार दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।

जज की टिप्पणी बनी फैसले की सबसे बड़ी बात

सजा सुनाते समय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की टिप्पणी पूरे फैसले की सबसे महत्वपूर्ण बात बन गई। अदालत ने कहा कि भले ही दोषी की उम्र 85 वर्ष हो चुकी है और वह शारीरिक रूप से कमजोर हो, लेकिन उम्र अपराध से मुक्ति का आधार नहीं बन सकती। कोर्ट ने साफ कहा— “कानून से कोई बच नहीं सकता। न्याय में देरी हो सकती है, लेकिन न्याय की प्रक्रिया रुकती नहीं है।” हालांकि मानवीय आधार पर अदालत ने बुजुर्ग दोषी को अपेक्षाकृत कम सजा दी।

1992 में रास्ते के विवाद से शुरू हुआ था खूनी संघर्ष

मामला 10 नवंबर 1992 का है। जुड़ावनपुर थाना क्षेत्र के राघोपुर गांव में अदालत राय अपनी पत्नी रामसखी देवी के साथ घर के बाहर बैठे हुए थे। इसी दौरान रास्ते पर शीशे के टुकड़े बिछाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि विरोध करने पर आरोपियों ने पहले मारपीट की और बाद में पति-पत्नी पर गोली चला दी। गोली लगने से दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी।

नौ लोगों पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी

घटना के बाद पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच पूरी होने के बाद मार्च 1993 में अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। मामले में 1999 में आरोप तय हुए और फिर लंबी सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाह पेश किए गए।

सुनवाई के दौरान चार आरोपियों की हो गई मौत

करीब तीन दशक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान चार आरोपियों की मौत हो गई। बावजूद इसके बाकी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलता रहा। 26 मई को अदालत ने दीप राय, जगदीश राय उर्फ जीशा राय, नरेश राय, नागदेव राय और नकेश्वर राय को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई और अब अंतिम फैसला सुनाया गया।

फैसले ने दिया बड़ा संदेश

33 वर्ष पुराने इस मामले में आया फैसला केवल एक मुकदमे का अंत नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।इस फैसले ने यह साबित किया कि अपराध चाहे कितना भी पुराना हो जाए, कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराधी अंततः न्याय के कटघरे तक पहुंचता ही है।