फर्जी ED डायरेक्टर बन भोजपुर DM को किया कॉल, पटना से दबोचा गया शातिर अभिषेक भोपल्का उर्फ अभिषेक अग्रवाल

आरा में फर्जी ED डायरेक्टर बनकर भोजपुर DM को कॉल करने वाले अभिषेक भोपल्का उर्फ अभिषेक अग्रवाल को पटना से गिरफ्तार किया गया। आरोपी पहले भी खुद को हाईकोर्ट चीफ जस्टिस बताकर DGP को फोन कर चुका है। IPS अधिकारियों संग वायरल तस्वीरों ने मामले को और सनसनीखेज बना दिया है।

फर्जी ED डायरेक्टर बन भोजपुर DM को किया कॉल, पटना से दबोचा गया शातिर अभिषेक भोपल्का उर्फ अभिषेक अग्रवाल
अभिषेक भोपल्का उर्फ अभिषेक अग्रवाल 9फाइल फोटो)।
  •  IPS अफसरों संग वायरल तस्वीरों से मचा था बवाल

आरा (Threesocieties.com Desk): बिहार के भोजपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शातिर ठग ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का निदेशक बताकर भोजपुर के जिलाधिकारी (DM) तनय सुल्तानिया को फोन कर प्रशासनिक दबाव बनाने की कोशिश की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और आरोपी को पटना से गिरफ्तार कर लिया।

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गिरफ्तार आरोपी की पहचान अभिषेक भोपल्का उर्फ अभिषेक अग्रवाल के रूप में हुई है, जो पटना के बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी पहले भी कई बड़े अधिकारियों को इसी तरह फर्जी पहचान बताकर ठग चुका है।

27 अप्रैल को DM को किया था कॉल
जानकारी के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 को आरोपी ने भोजपुर DM तनय सुल्तानिया को फोन किया और खुद को दिल्ली से बोल रहा ED निदेशक बताया। उसने बातचीत के दौरान प्रशासनिक दबाव बनाने और प्रभाव जमाने की कोशिश की। हालांकि, DM को बातचीत के दौरान कुछ संदेह हुआ, जिसके बाद मामला तुरंत पुलिस तक पहुंचा। प्रशासन ने इसे गंभीर सुरक्षा और संवैधानिक मामला मानते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए।

तकनीकी जांच से खुली ठग की पोल
मामले में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस शुरू किया। कॉल डिटेल, लोकेशन ट्रैकिंग और मोबाइल डेटा के आधार पर आरोपी की पहचान हुई। इसके बाद पटना में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से 2.61 लाख रुपये नकद, कई मोबाइल फोन और घटना में इस्तेमाल किया गया उपकरण बरामद किया है। पूछताछ के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पहले भी DGP को बना चुका है निशाना
यह पहला मामला नहीं है जब अभिषेक भोपल्का ने बड़े अधिकारियों को अपनी जालसाजी का शिकार बनाया हो। वर्ष 2022 में भी उसने खुद को हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बताकर तत्कालीन DGP को फोन किया था। उस समय भी मामला काफी चर्चित हुआ था और आरोपी जेल भेजा गया था। बावजूद इसके, जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर वही पुराना खेल शुरू कर दिया।

IPS अधिकारियों संग वायरल तस्वीरों ने बढ़ाई सनसनी
चार साल पहले गिरफ्तारी के दौरान आरोपी की कई तस्वीरें सामने आई थीं, जिनमें वह कई IPS अधिकारियों के साथ नजर आ रहा था। इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया था। जांच में यह भी सामने आया था कि आरोपी का संपर्क करीब दो दर्जन अधिकारियों तक था। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि ये संपर्क किस स्तर तक और किन उद्देश्यों से थे।

पुलिस अब नेटवर्क खंगालने में जुटी
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अकेले काम करता था या उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। यह भी जांच की जा रही है कि उसने किन-किन अधिकारियों और विभागों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश की। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की है और कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी हैं। पुलिस को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज
इस घटना के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में सतर्कता बढ़ा दी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के नाम पर आने वाले कॉल की पुष्टि किए बिना कोई कार्रवाई न की जाए। फर्जी पहचान के जरिए अधिकारियों तक पहुंच बनाने की यह घटना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।