झारखंड में बड़ा वाहन घोटाला? एक ही नंबर पर दौड़ रहे 35,367 वाहन, हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य में एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर 35,367 वाहनों के संचालन के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए परिवहन सचिव को नोटिस जारी किया है। मामले में कर चोरी, बसों के अवैध मॉडिफिकेशन और फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। सरकार को 10 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

झारखंड में बड़ा वाहन घोटाला? एक ही नंबर पर दौड़ रहे 35,367 वाहन, हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
झारखंड परिवहन विभाग पर हाई कोर्ट सख्त।

      HighLights

  • झारखंड हाई कोर्ट ने परिवहन सचिव को जारी किया नोटिस
  • 10 जुलाई तक राज्य सरकार से मांगा गया विस्तृत जवाब
  • 2018-19 के व्यावसायिक वाहन डेटा की जांच में सामने आया मामला
  • रोड टैक्स, बीमा और फिटनेस नियमों से बचने के लिए फर्जीवाड़े का आरोप
  • बसों के अवैध मॉडिफिकेशन और गलत कन्वर्जन का मुद्दा भी उठा
  • फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस जारी होने के आरोपों पर भी कोर्ट गंभीर

रांची(Threesocieties.com Desk): झारखंड में परिवहन व्यवस्था से जुड़े एक कथित बड़े फर्जीवाड़े पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य में एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर 35,367 वाहनों के संचालन के आरोपों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने परिवहन सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने राज्य सरकार को 10 जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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बुधवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। यह जनहित याचिका मिथुन कुमार की ओर से दायर की गई है, जिसमें राज्य के परिवहन तंत्र में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।

2018-19 की जांच में सामने आया था मामला

याचिका के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018-19 में परिवहन विभाग द्वारा व्यावसायिक वाहनों के डेटा की जांच के दौरान चौंकाने वाली जानकारी सामने आई थी। जांच में पाया गया कि हजारों वाणिज्यिक वाहन एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर का उपयोग कर रहे थे। आरोप है कि ऐसा रोड टैक्स, बीमा और फिटनेस प्रमाणपत्र से जुड़े नियमों से बचने तथा सरकारी राजस्व की चोरी के उद्देश्य से किया गया।याचिकाकर्ता का दावा है कि सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर राज्य में 35,367 वाहन समान रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ संचालित हो रहे हैं। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह झारखंड के परिवहन इतिहास के सबसे बड़े फर्जीवाड़ों में से एक माना जा सकता है।

कानून-व्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर सवाल

याचिका में कहा गया है कि एक ही नंबर पर हजारों वाहनों के संचालन से न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। सड़क दुर्घटनाओं, अपराधों और वाहन स्वामित्व से जुड़े मामलों की जांच में भारी परेशानी उत्पन्न हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन की पहचान किसी भी जांच का सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है। यदि एक ही नंबर कई वाहनों पर इस्तेमाल हो रहा हो तो अपराधियों को पकड़ना और घटनाओं की जांच करना बेहद कठिन हो सकता है।

बसों के अवैध मॉडिफिकेशन का मुद्दा भी उठा

सुनवाई के दौरान राज्य में बसों के मॉडिफिकेशन और उनके कथित गलत कन्वर्जन का मामला भी अदालत के समक्ष रखा गया। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि कई वाहन मालिक टैक्स बचाने और नियमों से बचने के लिए बसों में अवैध बदलाव कर रहे हैं।यह भी कहा गया कि ऐसे मॉडिफिकेशन से सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है, जिससे यात्रियों और विशेष रूप से स्कूली बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। अदालत ने इस मुद्दे को भी गंभीरता से लिया।

फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस पर भी सवाल

याचिका में ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि कई मामलों में लाइसेंस जारी करने से पहले आवश्यक जांच और सत्यापन प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता। कई स्तरों पर केवल औपचारिकताएं पूरी कर लाइसेंस जारी कर दिए जाते हैं।याचिकाकर्ता ने दावा किया कि फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस के इस्तेमाल के मामले भी सामने आए हैं, जिससे सड़क सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

10 जुलाई तक सरकार को देना होगा जवाब

हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवहन सचिव को नोटिस जारी किया है और राज्य सरकार से 10 जुलाई तक विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। अब सभी की नजर सरकार की रिपोर्ट और अगली सुनवाई पर टिकी है, क्योंकि यह मामला राज्य के परिवहन तंत्र में संभावित बड़े भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ा माना जा रहा है।