रामगढ़ की मौत वाली सुरंग: अवैध कोयला खनन में घुसे 4 युवक जिंदा नहीं लौटे, ऑक्सीजन खत्म होने से गई जान

रामगढ़ के अरगड्डा क्षेत्र में अवैध कोयला खनन के दौरान बड़ा हादसा हुआ। बंद खदान में ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस के कारण चार युवकों की दम घुटने से मौत हो गई। रेस्क्यू टीम ने शवों को बाहर निकाला। घटना के बाद अवैध खनन पर प्रशासन और प्रबंधन की भूमिका सवालों के घेरे में है।

रामगढ़ की मौत वाली सुरंग: अवैध कोयला खनन में घुसे 4 युवक जिंदा नहीं लौटे, ऑक्सीजन खत्म होने से गई जान
ऑक्सीजन 2% पहुंची और बुझ गईं 4 सांसें।

 HighLights

  • अरगड्डा क्षेत्र में अवैध कोयला खनन के दौरान दम घुटने से चार की मौत
  • रेस्क्यू टीम ने करीब 30 फीट गहराई से निकाले शव
  • खदान के अंदर ऑक्सीजन का स्तर मात्र 2 प्रतिशत पाया गया
  • कार्बन डाइऑक्साइड समेत जहरीली गैसों की मौजूदगी की पुष्टि
  • मृतकों में सिरका और टोंगी गांव के चार युवक शामिल

रामगढ़ (Threesocieties.com Desk): झारखंड के रामगढ़ जिले में शनिवार को अवैध कोयला खनन एक बार फिर चार परिवारों के लिए काल बन गया। सीसीएल अरगड्डा की बंद भूमिगत खदान के समीप काजू बगान जंगल क्षेत्र में अवैध रूप से कोयला निकालने के दौरान चार युवकों की दम घुटने से मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में खदान के भीतर ऑक्सीजन की गंभीर कमी और जहरीली गैसों की मौजूदगी सामने आई है।

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घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि इस हादसे ने कोयलांचल क्षेत्र में वर्षों से जारी अवैध खनन के नेटवर्क और प्रशासनिक लापरवाही पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुबह कोयला निकालने गए थे चारों युवक

जानकारी के अनुसार टोंगी गांव के रहने वाले देवा और डब्ल्यू शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे अवैध रूप से कोयला निकालने के लिए बंद खदान में बने सुरंगनुमा रास्ते से अंदर गए थे। कुछ देर बाद सिरका बुधबाजार निवासी किशोर और आशीष भी उसी खदान में प्रवेश कर गए।काफी देर तक चारों के बाहर नहीं आने पर ग्रामीणों को अनहोनी की आशंका हुई। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस और सीसीएल प्रबंधन को दी।

मौके पर पहुंची पुलिस, रेस्क्यू और मेडिकल टीम

घटना की सूचना मिलते ही सीसीएल अरगड्डा के सुरक्षा अधिकारी रमेश कुमार और एरिया क्वालिटी मैनेजर एस.एन. तिवारी घटनास्थल पहुंचे। इसके बाद माइंस रेस्क्यू टीम और गिद्दी अस्पताल को अलर्ट किया गया।माइंस सुपरिटेंडेंट विकास कुमार के नेतृत्व में 12 सदस्यीय रेस्क्यू टीम तथा डॉ. सागर कुमार के नेतृत्व में पांच सदस्यीय मेडिकल टीम घटनास्थल पहुंची। अग्निशमन वाहन और एंबुलेंस भी तैनात की गई। करीब आधे घंटे तक चले कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद चारों युवकों को खदान से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही बुझ चुकी थीं सांसें

रेस्क्यू टीम द्वारा बाहर निकाले जाने के बाद चारों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। पहले ग्रामीण उन्हें रांची रोड स्थित होप अस्पताल ले गए, जबकि कुछ को रामगढ़ सदर अस्पताल भी ले जाया गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद चारों युवकों को मृत घोषित कर दिया। मृत्यु की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। घटनास्थल पर मौजूद लोग भी इस दर्दनाक दृश्य को देखकर भावुक हो उठे।

खदान के अंदर सिर्फ 2 प्रतिशत रह गई थी ऑक्सीजन

माइंस रेस्क्यू टीम की प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। टीम के अनुसार खदान के ऊपरी हिस्से में ऑक्सीजन का स्तर करीब 9 प्रतिशत था, जबकि करीब 30 फीट नीचे और अंदर बने लगभग 40 फीट लंबे हिस्से में यह घटकर मात्र 2 प्रतिशत रह गया था।रेस्क्यू कर्मियों ने खदान के भीतर कार्बन डाइऑक्साइड समेत अन्य जहरीली गैसों की मौजूदगी भी पाई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैसों के कारण चारों युवक बेहोश हो गए और दम घुटने से उनकी मौत हो गई।हालांकि गैस रिसाव की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। वास्तविक कारण पोस्टमार्टम और विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पुलिस ने शुरू की जांच

हादसे की सूचना मिलते ही रामगढ़ थाना प्रभारी इंस्पेक्टर नवीन प्रकाश पांडेय और कुजू ओपी प्रभारी आशुतोष कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि बंद खदान में अवैध खनन का नेटवर्क कैसे संचालित हो रहा था और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

फिर कटघरे में अवैध खनन पर रोक लगाने की व्यवस्था

रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद और बोकारो समेत झारखंड के कई कोयलांचल क्षेत्रों में बंद खदानों से अवैध कोयला खनन लंबे समय से गंभीर समस्या बना हुआ है। इसके बावजूद समय-समय पर होने वाली दुर्घटनाओं के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बंद खदानों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती और अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाई जाती, तो चार युवकों की जान बच सकती थी।यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि अवैध खनन सिर्फ कानून व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि हर दिन कई गरीब परिवारों की जिंदगी पर मंडराता हुआ मौत का साया भी है। चार युवकों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है और अब लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।