धनबाद क्लब पर संकट! जिला परिषद बोली- हमारी जमीन खाली करो, नोटिस की तैयारी

धनबाद क्लब पर जिला परिषद ने बड़ा दावा करते हुए जमीन अपनी बताई है। अध्यक्ष शारदा सिंह ने क्लब को नोटिस देकर खाली कराने की बात कही है। 1926 में बने क्लब पर अब बेदखली का खतरा मंडरा रहा है।

धनबाद क्लब पर संकट! जिला परिषद बोली- हमारी जमीन खाली करो, नोटिस की तैयारी
96 साल पुराने धनबाद क्लब पर बेदखली का खतरा।
  • धनबाद क्लब पर जिला परिषद का बड़ा दावा, कहा- करोड़ों की कमाई, लेकिन हमें नहीं एक रुपया भी
  • जिला परिषद ने कहा- जमीन हमारी, खाली करना होगा
  • जिला परिषद ने दिखाई सख्ती; कोर्ट तक जा सकता है मामला

धनबाद (Threesocieties.com Desk): जिले के सबसे प्रतिष्ठित और पॉश संस्थानों में गिने जाने वाले धनबाद क्लब पर अब बड़ा संकट मंडराने लगा है। जिला परिषद ने क्लब की जमीन पर अपना दावा ठोकते हुए साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में क्लब प्रबंधन को नोटिस भेजकर कार्रवाई शुरू की जा सकती है। इस घटनाक्रम ने धनबाद के सामाजिक, राजनीतिक और कारोबारी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

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लुबी सर्कुलर रोड स्थित धनबाद क्लब को लेकर जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस इलाके की जमीन जिला परिषद की परिसंपत्ति है, लेकिन इसके बदले परिषद को कोई आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिला परिषद अपनी परिसंपत्तियों से आय अर्जित करने की दिशा में काम कर रही है और इसी क्रम में क्लब को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।

सर्वे में सामने आया जमीन का दावा

जिला परिषद के अनुसार हाल ही में परिषद की परिसंपत्तियों और जमीनों का सर्वे कराया गया था। इस सर्वे के दौरान यह जानकारी सामने आई कि यूनियन क्लब और धनबाद क्लब दोनों जिला परिषद की जमीन पर संचालित हो रहे हैं। इसके बाद परिषद प्रशासन ने इस दिशा में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। अध्यक्ष शारदा सिंह का कहना है कि यदि क्लब प्रबंधन के पास जमीन आवंटन से जुड़े दस्तावेज हैं तो उन्हें जिला परिषद के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नियमों के तहत क्लब को जमीन चाहिए तो उन्हें निर्धारित प्रक्रिया और नीलामी में भाग लेना होगा।

“जिला परिषद को नहीं मिलता कोई लाभ”

जिला परिषद अध्यक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि करोड़ों रुपये की सदस्यता और आय वाले इस प्रतिष्ठित क्लब से जिला परिषद को एक रुपये तक का लाभ नहीं मिलता। परिषद आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझ रही है और पंचायतों के विकास के लिए फंड जुटाना उसकी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को क्लब से कोई फायदा नहीं मिलता। क्लब की सुविधाएं केवल सीमित और संपन्न वर्ग तक ही सीमित हैं, जबकि जिला परिषद का उद्देश्य व्यापक जनहित और ग्रामीण विकास है।

जरूरत पड़ी तो कोर्ट जाएगी जिला परिषद

शारदा सिंह ने कहा कि विवादित परिसंपत्तियों का अध्ययन किया जा रहा है और कई जगहों पर अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई भी की गई है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो इस मामले में कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। इस बयान के बाद यह साफ माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में धनबाद क्लब और जिला परिषद के बीच जमीन को लेकर बड़ा कानूनी और प्रशासनिक विवाद सामने आ सकता है।

अंग्रेजों के दौर में हुई थी क्लब की शुरुआत

धनबाद क्लब का इतिहास लगभग एक सदी पुराना माना जाता है। वर्ष 1926 में इसकी स्थापना यूरोपियन क्लब के रूप में हुई थी। बाद में करीब 1950 के आसपास इसका नाम बदलकर धनबाद क्लब रखा गया। वर्तमान में क्लब की सदस्यता आम लोगों के लिए आसान नहीं मानी जाती। जानकारी के अनुसार इसकी सदस्यता के लिए लगभग 14 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं और वर्तमान में क्लब के करीब 950 सदस्य बताए जाते हैं। यही वजह है कि क्लब को जिले के सबसे प्रभावशाली और हाई-प्रोफाइल संस्थानों में गिना जाता है।

अब सवाल यह है कि लगभग 100 साल पुराने इस प्रतिष्ठित क्लब का भविष्य क्या होगा? क्या जिला परिषद अपना दावा साबित कर पाएगी या क्लब प्रबंधन दस्तावेजों के दम पर अपनी स्थिति मजबूत करेगा? आने वाले दिनों में इस विवाद पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।