कोयले से कपड़ा उद्योग तक: BCCL ने अपनाया आदित्य बिड़ला मॉडल, विस्थापितों को मिलेगा रोजगार!

कोयला खनन से आगे बढ़ते हुए BCCL अब पुनर्वासित और परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर तलाश रही है। इसी उद्देश्य से BCCL की टीम ने बेंगलुरु स्थित आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड की वस्त्र निर्माण इकाई का अध्ययन किया। रोजगार आधारित औद्योगिक मॉडल को कोयलांचल में लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

कोयले से कपड़ा उद्योग तक: BCCL ने अपनाया आदित्य बिड़ला मॉडल, विस्थापितों को मिलेगा रोजगार!
अब सिर्फ खनन नहीं, रोजगार भी मिशन।

      Highlights

  • BCCL के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में उच्चस्तरीय टीम ने बेंगलुरु का दौरा किया।
  • आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड की वस्त्र निर्माण इकाई का किया अध्ययन।
  • पुनर्वासित और परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार सृजन की संभावनाओं पर चर्चा।
  • वस्त्र उद्योग आधारित रोजगार मॉडल को कोयलांचल में लागू करने पर विचार।
  • अध्ययन के आधार पर BCCL तैयार करेगी भविष्य की कार्ययोजना।

धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयला उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखने वाली भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) अब रोजगार सृजन के नए मॉडल तलाशने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। खनन परियोजनाओं से प्रभावित और पुनर्वासित परिवारों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बीसीसीएल के शीर्ष अधिकारियों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल बेंगलुरु पहुंचा, जहां उसने आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (ABFRL) की अत्याधुनिक वस्त्र निर्माण इकाई का अध्ययन किया।

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बीसीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) मनोज कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने फैक्ट्री की उत्पादन प्रणाली, सप्लाई चेन, गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था और तकनीकी प्रबंधन का बारीकी से अध्ययन किया। इस दौरान कंपनी के अधिकारियों ने वस्त्र निर्माण उद्योग के संचालन, उत्पादन क्षमता और रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी।

रोजगार सृजन को लेकर गंभीर है BCCL

बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि कंपनी केवल कोयला उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि खनन परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए सम्मानजनक और स्थायी रोजगार सुनिश्चित करना भी उसकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत सफल औद्योगिक मॉडलों का अध्ययन किया जा रहा है ताकि कोयलांचल क्षेत्र में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप रोजगार आधारित उद्योग विकसित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि वस्त्र उद्योग अपेक्षाकृत कम लागत में अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाला क्षेत्र है। यदि इस मॉडल को कोयलांचल में सफलतापूर्वक लागू किया गया तो हजारों युवाओं, महिलाओं और विस्थापित परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है।

आदित्य बिड़ला समूह के अधिकारियों से हुई विस्तृत चर्चा

अध्ययन भ्रमण के दौरान दोनों संस्थानों के अधिकारियों के बीच संभावित सहयोग और औद्योगिक मॉडल के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर चर्चा हुई। आदित्य बिड़ला समूह की ओर से मुख्य आपूर्ति श्रृंखला अधिकारी स्वामीनाथन रामचंद्रन, मुख्य स्थिरता अधिकारी डॉ. नरेश त्यागी, कॉरपोरेट अफेयर्स के वरिष्ठ अधिकारी तथा मैन्युफैक्चरिंग हेड सुधाकरन गुरुनाथन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में रोजगार सृजन, कौशल विकास, स्थानीय संसाधनों के उपयोग तथा उद्योग स्थापना की व्यवहारिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने ऐसे मॉडल पर चर्चा की, जो कोयला क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

कोयलांचल में खुल सकते हैं नए उद्योगों के द्वार

विशेषज्ञों का मानना है कि खनन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर अक्सर कोयला उद्योग तक सीमित रहते हैं। ऐसे में यदि वस्त्र निर्माण या अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को बढ़ावा दिया जाता है तो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है। महिलाओं और युवाओं के लिए भी बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

बीसीसीएल प्रबंधन का मानना है कि खदान प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को केवल मुआवजा या आवास तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्हें स्थायी आय और रोजगार उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। इसी सोच के तहत कंपनी रोजगार आधारित औद्योगिक मॉडल विकसित करने की दिशा में प्रयासरत है।

दूसरे दिन होगी कार्ययोजना पर चर्चा

दौरे के दूसरे दिन औद्योगिक मॉडल के व्यावहारिक क्रियान्वयन, निवेश संभावनाओं और रोजगार आधारित गतिविधियों के विस्तार पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर बीसीसीएल भविष्य की रणनीति तैयार करेगी। यदि यह पहल सफल होती है तो कोयलांचल क्षेत्र में रोजगार के नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है और खनन प्रभावित हजारों परिवारों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का रास्ता खुल सकता है।