धनबाद: दुबई से चल रहे प्रिंस खान गैंग की जड़ें हिलेंगी! ‘कनेक्शन मैन’ मेजर फिर पुलिस रिमांड पर
धनबाद में गैंगस्टर प्रिंस खान के करीबी सैफी उर्फ मेजर को फिर 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पूछताछ में रंगदारी, हवाला, जमीन कारोबार, बड़े कारोबारी और एक सफेदपोश नेता के संरक्षण जैसे कई बड़े खुलासे सामने आए हैं।
धनबाद (Threesocieties.com Desk): वासेपुर के मोस्टवांटेड अपराधी प्रिंस खान उर्फ हैदर अली के सबसे करीबी सहयोगी सैयद सैफ अब्बास नकवी उर्फ शैफी उर्फ मेजर को एक बार फिर धनबाद पुलिस ने तीन दिनों की अतिरिक्त रिमांड पर लिया है। अदालत में पेशी के बाद पुलिस ने पांच दिन की हिरासत की मांग की थी, लेकिन मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विनय कुमार लाल की अदालत ने तीन दिन की पुलिस हिरासत मंजूर की।
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इससे पहले 29 अप्रैल 2026 को भी मेजर को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया था। अब लगातार पूछताछ में पुलिस को गैंग के नेटवर्क, फंडिंग, रंगदारी और प्रिंस खान के ठिकानों से जुड़ी बड़ी जानकारियां मिल रही हैं।
पुलिस बोली—मेजर ने किए कई बड़े खुलासे
पुलिस ने अदालत को बताया कि पूछताछ के दौरान मेजर ने कई अहम खुलासे किए हैं। उससे आगे पूछताछ में प्रिंस खान के वर्तमान ठिकाने, उसके लिए काम करने वाले लोगों, फंडिंग करने वालों और गैंग के आर्थिक नेटवर्क की गहराई से जानकारी मिल सकती है।मेजर की ओर से वरीय अधिवक्ता शाहनवाज हुसैन ने पुलिस रिमांड का विरोध किया, लेकिन अदालत ने पुलिस की दलीलों को गंभीर मानते हुए उसे फिर से तीन दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
12 घंटे की पूछताछ में खुला रंगदारी का नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार, पहले दिन धनबाद थाना में मेजर से करीब 12 घंटे तक मैराथन पूछताछ हुई। इस दौरान उसने कई ऐसे नाम उजागर किए, जो अब तक पर्दे के पीछे रहकर पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। बताया जा रहा है कि धनबाद का एक प्रभावशाली कबाड़ कारोबारी गैंग का प्रमुख सहयोगी था। वह व्यवसायियों से नियमित रंगदारी वसूलकर रकम गैंग तक पहुंचाता था। इतना ही नहीं, एक मैरेज हॉल में भी उसका निवेश था, जिसमें प्रिंस खान को पार्टनर बनाया गया था।
पुलिस पूछताछ में मेजर ने बताया कि कौन-कौन गैंग को संरक्षण देता था और प्रिंस खान व अन्य लोगों के बीच संपर्क स्थापित कराने में अहम भूमिका निभाता था। मोबाइल नंबर, संपर्क सूत्र और कारोबारी लिंक भी संबंधित लोगों के जरिए उपलब्ध कराए जाते थे। इस खुलासे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
रंगदारी के लिए फायरिंग और बमबाजी
मेजर ने बताया कि वर्ष 2022 से अब तक धनबाद में व्यवसायियों के ठिकानों पर हुई अधिकांश फायरिंग और बमबाजी की घटनाएं प्रिंस खान गिरोह द्वारा कराई गई थीं। इन घटनाओं का मकसद रंगदारी की रकम तय कराना होता था। एक बार रकम तय होने के बाद संबंधित कारोबारी को आमतौर पर परेशान नहीं किया जाता था। कई बड़े कारोबारी हर महीने तय रकम गैंग तक पहुंचाते थे।
हवाला से विदेश भेजी जाती थी रकम
पूछताछ में यह भी सामने आया कि रंगदारी की रकम हवाला के जरिए विदेश भेजी जाती थी। पुलिस को शक है कि यह रकम दुबई में बैठे प्रिंस खान तक पहुंचाई जाती थी।मेजर ने यह भी बताया कि बिहार और झारखंड में गैंग ने कई संपत्तियां खरीदी हैं। आठ लेन सड़क, भूली और पांडरपाला इलाके में बड़े पैमाने पर जमीन खरीद-बिक्री का खेल चल रहा था।
सैफी ने ही दिखाया था दुबई का रास्ता
सूत्रों के मुताबिक, नन्हे हत्याकांड के बाद हालात बिगड़ने पर मेजर ने ही प्रिंस खान को दुबई भागने की सलाह दी थी। इसके बाद प्रिंस विदेश से गैंग ऑपरेट करने लगा और मेजर पीछे से पूरे नेटवर्क को संभालता रहा। उसे गैंग का “कनेक्शन मैन” कहा जाता था। कौन कारोबारी टारगेट होगा, कहां शूटर भेजने हैं, किससे रंगदारी लेनी है—इन सबमें मेजर की भूमिका निर्णायक थी।
दो अन्य मामलों में भी प्रोडक्शन वारंट
बैंक मोड़ थाना पुलिस ने मेजर को दो अन्य मामलों में न्यायिक हिरासत में लेने के लिए भी आवेदन दिया। अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए उसे 6 मई और 8 मई को पेश करने का आदेश दिया है। मेजर की जमानत अर्जी पर भी सुनवाई हुई, जिसमें बचाव पक्ष ने दावा किया कि उसे झूठा फंसाया गया है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए नई तारीख तय की है।
झारखंड में 60 से ज्यादा केस दर्ज
सैफी उर्फ मेजर के खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में 60 से अधिक मामले दर्ज हैं। केवल धनबाद जिले में ही 15 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। धनबाद पुलिस का मानना है कि मेजर की गिरफ्तारी से प्रिंस खान के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि सोशल मीडिया पर धमकी भरे ऑडियो-वीडियो जारी करने से लेकर रंगदारी की पूरी रणनीति में उसकी केंद्रीय भूमिका थी। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी में जुट गई है।






