‘गुलामी की मानसिकता से आजादी’- बंगाल चुनाव परिणाम पर मेयर संजीव सिंह के पोस्ट से धनबाद में बढ़ी सियासी गर्मी!

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के नतीजों पर धनबाद मेयर संजीव सिंह के ‘गुलामी से आजादी’ वाले बयान से सियासत गरमा गई है। भाजपा का नाम लिए बिना दिए गए इस बयान और विधायक रागिनी सिंह के जश्न ने राजनीतिक संकेतों को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।

‘गुलामी की मानसिकता से आजादी’- बंगाल चुनाव परिणाम पर मेयर संजीव सिंह के पोस्ट से  धनबाद में बढ़ी सियासी गर्मी!
संजीव सिंह-रागिनी सिंह(फाइल फोटो)।

धनबाद (Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने जहां राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है, वहीं इसका असर अब झारखंड के धनबाद तक साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। धनबाद नगर निगम के मेयर संजीव सिंह के एक फेसबुक पोस्ट ने स्थानीय सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

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मेयर संजीव सिंह ने अपने पोस्ट में पश्चिम बंगाल की जनता को बधाई देते हुए लिखा कि “कई वर्षों के बाद जनता को गुलामी की मानसिकता से स्वतंत्र होकर जीने का मौका मिला है।” उन्होंने जनता का आभार जताया, लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने कहीं भी भाजपा या किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया।

बयान के मायने क्या? सियासी गलियारों में चर्चा तेज

संजीव सिंह के इस बयान के कई राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने हाल ही में भाजपा से बगावत कर मेयर का चुनाव जीता था, जिससे उनके और पार्टी के रिश्तों में दूरी मानी जा रही थी। अब उनके इस पोस्ट को कुछ लोग भाजपा के प्रति ‘सॉफ्ट कॉर्नर’ के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान भविष्य की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है या फिर माहौल को भांपते हुए दिया गया संतुलित संदेश।

 पत्नी रागिनी सिंह का खुला समर्थन, बढ़ी अटकलें

जहां एक ओर संजीव सिंह ने संतुलित भाषा का इस्तेमाल किया, वहीं उनकी पत्नी और झरिया से भाजपा विधायक रागिनी सिंह ने पार्टी की जीत का खुलकर जश्न मनाया। उन्होंने इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता, गृहमंत्री अमित शाह की रणनीति और पार्टी संगठन की मजबूती को दिया। रागिनी सिंह ने कहा कि यह जीत दर्शाती है कि देश की जनता विकास, सुशासन और राष्ट्रहित की राजनीति के साथ खड़ी है।

झरिया में जश्न का माहौल

भाजपा की इस बड़ी जीत के बाद झरिया में उत्सव का माहौल देखने को मिला। कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटीं, आतिशबाजी की और एक-दूसरे को बधाई दी। पूरे क्षेत्र में भाजपा समर्थकों के बीच जबरदस्त उत्साह नजर आया।

क्या बदलेंगे राजनीतिक समीकरण?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संजीव सिंह भाजपा के साथ अपने रिश्तों को फिर से मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं? या यह सिर्फ एक सामान्य प्रतिक्रिया थी? धनबाद की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। फिलहाल, एक फेसबुक पोस्ट ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है और सभी की नजरें संजीव सिंह के अगले कदम पर टिकी हैं।