अमेरिका में गौतम अडाणी को बड़ी राहत! DOJ ने सभी आपराधिक आरोप लिए वापस, केस हमेशा के लिए बंद

अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अडाणी और सागर अडाणी के खिलाफ सभी आपराधिक आरोप वापस लेते हुए न्यूयॉर्क में चल रहे प्रतिभूति और धोखाधड़ी मामले को स्थायी रूप से बंद कर दिया है। अदालत ने कहा कि आरोपों को आगे बढ़ाने के पर्याप्त आधार नहीं मिले।

अमेरिका में गौतम अडाणी को बड़ी राहत! DOJ ने सभी आपराधिक आरोप लिए वापस, केस हमेशा के लिए बंद
गौतम अडाणी (फाइल फोटो)।

वाशिंगटन, डी.सी.(Threesocieties.com Desk): भारत के उद्योग जगत से जुड़ी सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय कानूनी लड़ाइयों में से एक माने जा रहे अदाणी समूह मामले में अब बड़ा मोड़ आ गया है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने अदाणी समूह के चेयरमैन Gautam Adani और उनके भतीजे Sagar Adani के खिलाफ लगाए गए सभी आपराधिक आरोप औपचारिक रूप से वापस ले लिए हैं। इसके साथ ही न्यूयॉर्क में चल रहा प्रतिभूति एवं वायर धोखाधड़ी मामला हमेशा के लिए बंद हो गया है।

यह भी पढ़ें:धनबाद पहुंचे करणी सेना प्रमुख सूरजपाल सिंह अम्मू, उदय प्रताप सिंह को जल्द बड़ी जिम्मेदारी के संकेत

अमेरिकी अभियोजकों द्वारा अदालत में दाखिल दस्तावेजों में कहा गया कि मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार और साक्ष्य नहीं मिले। अदालत ने भी अभियोजन पक्ष की सिफारिश स्वीकार करते हुए केस को “with prejudice” यानी स्थायी रूप से खारिज करने का आदेश दिया। इसका अर्थ है कि अब इसी मामले को दोबारा नहीं खोला जा सकेगा।

यह भी पढ़ें: गौतम अदाणी ने बिहार को दी ‘नई रोशनी’, मस्तीचक से 700 करोड़ की हेल्थ क्रांति का आगाज

क्या था पूरा मामला?

यह मामला 2024 के अंत में सामने आया था, जब अमेरिकी एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि अदाणी समूह ने भारतीय अधिकारियों से जुड़े कथित 26.5 करोड़ डॉलर के रिश्वत मामले को निवेशकों से छिपाया और अमेरिकी निवेशकों से पूंजी जुटाने के दौरान पर्याप्त खुलासा नहीं किया। मामले में प्रतिभूति धोखाधड़ी (Securities Fraud) और वायर फ्रॉड (Wire Fraud) जैसे आरोप लगाए गए थे। हालांकि, गौर करने वाली बात यह रही कि अमेरिकी अभियोजकों ने अदाणी परिवार को विदेशी भ्रष्टाचार अधिनियम (Foreign Corrupt Practices Act) के तहत रिश्वतखोरी जैसे गंभीर आरोपों में नामित नहीं किया था।

अदालत में क्यों कमजोर पड़ा केस?

मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान अभियोजकों को ऐसे पर्याप्त सबूत नहीं मिले जो आरोपों को अदालत में टिकाए रख सकें। इसके अलावा, अमेरिकी अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से जुड़े सवाल भी इस केस में बड़ी चुनौती बने। अदाणी समूह की कानूनी टीम ने अदालत में दलील दी कि अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों का “अत्यधिक क्षेत्रीय विस्तार” किया जा रहा है और एसईसी (SEC) के पास आवश्यक अधिकार क्षेत्र नहीं है।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि किसी भी प्रतिवादी को सीधे तौर पर बॉन्ड जारी करने या निवेशकों को गुमराह करने से नहीं जोड़ा जा सका। कई महीनों तक चली कानूनी समीक्षा और बातचीत के बाद अमेरिकी न्याय विभाग ने अंततः मामले को समाप्त करने का फैसला लिया।

SEC और OFAC मामलों में भी हुआ समझौता

पिछले सप्ताह अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग U.S. Securities and Exchange Commission (SEC) ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े निवेशक खुलासों के मामले में सिविल आरोपों का निपटारा किया था। इस समझौते के तहत: गौतम अडाणी ने 60 लाख डॉलर व  सागर अडाणी ने 120 लाख डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई थी। हालांकि, दोनों ने किसी भी गलती को स्वीकार नहीं किया। इसके अलावा अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने भी ईरानी एलपीजी आयात से जुड़े प्रतिबंध उल्लंघन मामले में अदाणी समूह के साथ 27.5 करोड़ डॉलर के समझौते की घोषणा की थी। अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता विस्तृत सहयोग और स्वैच्छिक खुलासों के आधार पर हुआ।

अडाणी समूह के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा केस वापस लेने से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच अदाणी समूह की साख को बड़ा सहारा मिल सकता है। पिछले कुछ वर्षों में समूह लगातार वैश्विक जांच और विवादों के कारण दबाव में था। अब अमेरिकी अदालत से राहत मिलने के बाद समूह के लिए विदेशी निवेश जुटाने और वैश्विक बाजार में भरोसा मजबूत करने की राह आसान हो सकती है।हालांकि, कारोबारी और राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों द्वारा पहले लगाए गए आरोपों के बाद अब यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में बना हुआ है।

क्या दोबारा खुल सकता है मामला?

अदालत द्वारा मामले को स्थायी रूप से खारिज किए जाने के बाद कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि समान आरोपों पर दोबारा मुकदमा चलाना बेहद कठिन होगा। अमेरिकी अदालत के आदेश ने इस पूरे मामले को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है।