धनबाद में अवैध खनन व प्रदूषण पर हाई कोर्ट सख्त , DC-SSP समेत टॉप अफसरों को कोर्ट में हाजिर होना पड़ा

झारखंड हाई कोर्ट ने धनबाद में अवैध खनन और बढ़ते वायु प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाते हुए DC को 22 अप्रैल तक ठोस सुझाव शपथपत्र में देने का आदेश दिया। अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ी।

धनबाद में अवैध खनन व प्रदूषण पर हाई कोर्ट सख्त , DC-SSP समेत टॉप अफसरों को कोर्ट में हाजिर होना पड़ा
धनबाद में अवैध खनन पर हाई कोर्ट सख्त।
  • अफसरों से मांगा एक्शन प्लान

रांची(Threesocieties.com Desk): कोयला नगरी धनबाद में बढ़ते अवैध खनन और वायु प्रदूषण के गंभीर मुद्दे पर झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासनिक मशीनरी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

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चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए धनबाद के उपायुक्त (DC) को निर्देश दिया कि वे सभी संबंधित विभागों से सुझाव लेकर 22 अप्रैल तक शपथपत्र के रूप में कोर्ट में पेश करें। मामले की अगली सुनवाई 14 मई को होगी।

 कोर्ट में पेश हुए जिले के बड़े अधिकारी

सुनवाई के दौरान अदालत में धनबाद के उपायुक्त, एसएसपी, नगर आयुक्त और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कोर्ट ने अधिकारियों से सीधे सवाल दागे—

अवैध खनन पर प्रभावी रोक कैसे लगेगी?
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे? इन सवालों ने प्रशासन की तैयारियों और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जनहित याचिका में बड़े आरोप

यह मामला ‘ग्रामीण एकता मंच’ द्वारा दायर जनहित याचिका के जरिए सामने आया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि:

धनबाद में प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है
प्रशासन और नगर निगम प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम रहे हैं
पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से अवैध खनन और कोयला परिवहन धड़ल्ले से जारी है
क्यों खतरनाक हो रही स्थिति?

धनबाद, देश के सबसे बड़े कोयला उत्पादन क्षेत्रों में से एक, आज गंभीर पर्यावरण संकट से जूझ रहा है। अवैध खनन से जमीन और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। कोयला ढुलाई से उड़ती धूल ने हवा को जहरीला बना दिया है। लोगों में दमा और अन्य सांस संबंधी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा है।
समाधान क्या हो सकते हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या से निपटने के लिए सख्त और टेक्नोलॉजी आधारित कदम जरूरी हैं:

ड्रोन सर्विलांस से अवैध खनन की निगरानी
कोयला परिवहन में ढंके हुए वाहनों को अनिवार्य करना
नियमित एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग
ग्रीन बेल्ट (हरित पट्टी) का विकास
नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई
अब 22 अप्रैल और 14 मई पर टिकी नजर

हाई कोर्ट के सख्त निर्देश के बाद अब पूरा फोकस प्रशासन की कार्रवाई पर है। 22 अप्रैल तक DC द्वारा दाखिल शपथपत्र और 14 मई की अगली सुनवाई में यह साफ हो जाएगा कि धनबाद में अवैध खनन और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कितनी गंभीरता दिखाई जाती है।

 कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ धनबाद का नहीं बल्कि पूरे झारखंड के पर्यावरण और प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन चुका है।