तेलंगाना में IAS के गढ़ में IPS की एंट्री, शिखा गोयल बनीं गृह सचिव; प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज
तेलंगाना सरकार ने प्रशासनिक परंपरा तोड़ते हुए 1994 बैच की वरिष्ठ IPS अधिकारी शिखा गोयल को गृह सचिव नियुक्त किया है। आमतौर पर IAS अधिकारियों के पास रहने वाले इस महत्वपूर्ण पद पर IPS अधिकारी की नियुक्ति ने प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
HighLights:
- तेलंगाना सरकार ने 7 वरिष्ठ IPS अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियों का आदेश जारी किया
- 1994 बैच की वरिष्ठ IPS अधिकारी शिखा गोयल को नया गृह सचिव नियुक्त किया गया
- गृह सचिव का पद परंपरागत रूप से वरिष्ठ IAS अधिकारियों के पास रहता है
- IPS अधिकारी को इस पद पर नियुक्त करना भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में दुर्लभ माना जाता है
- उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में भी पहले ऐसे प्रयोग हो चुके हैं
- प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद जताई जा रही है
हैदराबाद (Threesocieties.com Desk): तेलंगाना सरकार ने राज्य के प्रशासनिक और पुलिस ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने नौकरशाही और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश के तहत राज्य के सात वरिष्ठ IPS अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियों की घोषणा की गई है। इन नियुक्तियों में सबसे ज्यादा चर्चा 1994 बैच की वरिष्ठ IPS अधिकारी शिखा गोयल की हो रही है, जिन्हें राज्य का नया गृह सचिव नियुक्त किया गया है।
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गृह सचिव का पद किसी भी राज्य सरकार में बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जाता है। यह पद राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन, आंतरिक सुरक्षा और सरकार के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में अहम भूमिका निभाता है। परंपरागत रूप से इस पद पर वरिष्ठ IAS अधिकारियों की नियुक्ति की जाती रही है। ऐसे में किसी IPS अधिकारी को इस पद की जिम्मेदारी सौंपना एक असाधारण और दुर्लभ फैसला माना जा रहा है।
प्रशासनिक परंपराओं से अलग फैसला
भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में IAS अधिकारियों को नीति निर्माण और प्रशासनिक नेतृत्व का दायित्व दिया जाता है, जबकि IPS अधिकारियों की भूमिका मुख्य रूप से पुलिस व्यवस्था और कानून-व्यवस्था तक सीमित रहती है। यही वजह है कि गृह सचिव जैसे महत्वपूर्ण सचिव स्तर के पदों पर आमतौर पर IAS अधिकारियों की नियुक्ति होती है।
तेलंगाना सरकार का यह फैसला इस स्थापित परंपरा से अलग माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस प्रशासन का लंबा अनुभव रखने वाली शिखा गोयल की नियुक्ति से राज्य में कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज हो सकती है।
कौन हैं शिखा गोयल?
1994 बैच की वरिष्ठ IPS अधिकारी शिखा गोयल राज्य पुलिस सेवा में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। उन्हें एक सख्त, पेशेवर और परिणाम आधारित अधिकारी के रूप में जाना जाता है। विभिन्न संवेदनशील पदों पर काम करने का उनका अनुभव गृह सचिव की भूमिका में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
उत्तर प्रदेश में भी हो चुका है ऐसा प्रयोग
देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी समय-समय पर IPS अधिकारियों को पारंपरिक रूप से IAS अधिकारियों के लिए आरक्षित माने जाने वाले पदों पर जिम्मेदारी दी गई है। वर्ष 2021 में योगी सरकार के दौरान वरिष्ठ IPS अधिकारी देवेंद्र सिंह चौहान को गृह विभाग से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने पर विचार किया गया था। इसके अलावा कई अवसरों पर IPS अधिकारियों को जेल, नागरिक उड्डयन और अन्य विभागों में सचिव स्तर के पद भी सौंपे गए।
आंध्र प्रदेश में भी दिख चुका है यह मॉडल
अविभाजित आंध्र प्रदेश और बाद के वर्षों में भी कुछ वरिष्ठ IPS अधिकारियों को गृह विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं। सरकारों का मानना रहा है कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा मामलों में अनुभव रखने वाले अधिकारियों की तैनाती से प्रशासनिक निर्णयों के क्रियान्वयन में तेजी आती है।
क्या बदल सकती है प्रशासनिक सोच?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यदि यह प्रयोग सफल साबित होता है तो अन्य राज्यों में भी सचिव स्तर के पदों पर IPS अधिकारियों की नियुक्ति का रास्ता खुल सकता है। वहीं कुछ प्रशासनिक विशेषज्ञ इसे IAS और IPS सेवाओं की पारंपरिक भूमिकाओं के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक नए प्रयोग के रूप में देख रहे हैं।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिखा गोयल के नेतृत्व में तेलंगाना का गृह विभाग किस तरह काम करता है और क्या यह प्रयोग देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक नया मॉडल बन पाएगा।






