झरिया की जहरीली आग से बनेगी CNG! धनबाद के छात्रों का कमाल, देश के टॉप-10 में जगह

धनबाद के डिनोबिली स्कूल डिगवाडीह के छात्रों ने झरिया की 100 साल पुरानी भूमिगत आग को बुझाने और उससे निकलने वाली जहरीली मीथेन गैस को CNG व बिजली में बदलने का अनोखा प्रोटोटाइप तैयार किया है। यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर देश के टॉप-10 में शामिल हुआ है।

झरिया की जहरीली आग से बनेगी CNG! धनबाद के छात्रों का कमाल, देश के टॉप-10 में जगह
डिनोबिली स्कूल का प्रोटोटाइप देश के टॉप-10 में।
  • 100 साल पुरानी झरिया की आग बुझाने का मिला फॉर्मूला
  • डिनोबिली स्कूल के छात्रों ने किया कमाल
  • जहरीली मिथेन गैस से बनेगी CNG
  • झरिया की आग अब बनेगी कमाई का जरिया
  • मीथेन गैस से बनेगी CNG और बिजली

धनबाद (Threesocieties.com Desk) : एक सदी से अधिक समय से धधक रही झरिया की भूमिगत आग अब सिर्फ विनाश का कारण नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले समय में यही आग ऊर्जा उत्पादन का बड़ा स्रोत बन सकती है। धनबाद जिले के डिनोबिली स्कूल डिगवाडीह के छात्रों ने ऐसा अनोखा समाधान प्रस्तुत किया है, जो झरिया की आग को नियंत्रित करने के साथ-साथ उससे निकलने वाली जहरीली मीथेन गैस को CNG और बिजली में बदल सकता है।

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छात्रों के इस इनोवेटिव प्रोटोटाइप ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान हासिल की है। “डीएनएस नवऊर्जा” टीम ने विकसित भारत बिल्डथान 2025 प्रतियोगिता में देशभर की एक हजार से अधिक टीमों को पीछे छोड़ते हुए देश के टॉप-10 प्रोटोटाइप में अपनी जगह बनाई है।

25 मई को दिल्ली में होगा राष्ट्रीय कार्यक्रम

राष्ट्रीय स्तर का अंतिम कार्यक्रम 25 मई को नई दिल्ली में आयोजित होगा। इस प्रतियोगिता का आयोजन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। विजेता टीमों को पुरस्कार राशि सीधे मंत्रालय की ओर से प्रदान की जाएगी।इस उपलब्धि के पीछे डिनोबिली स्कूल की शिक्षिका और मेंटर अनुराधा यादव का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके मार्गदर्शन में 12वीं के छात्र उत्कृष्ट पाल, लक्की कुमार, आर्यन राज सिंह, गौरव कुमार रवानी और जागृति ने इस मॉडल को तैयार किया।

झरिया की सबसे बड़ी समस्या को चुना समाधान का विषय

मेंटर अनुराधा यादव ने बताया कि विकसित भारत बिल्डथान 2025 के तहत छात्रों को अपने क्षेत्र की किसी बड़ी समस्या का समाधान प्रस्तुत करने का टास्क मिला था। कोयलांचल क्षेत्र में झरिया की आग सबसे गंभीर समस्या है, इसलिए छात्रों ने इसी विषय को चुना।तीन चरणों के इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया के बाद पहले जिला स्तर, फिर राज्य स्तर और अंततः राष्ट्रीय स्तर पर इस मॉडल का चयन हुआ। इसके बाद दिल्ली से प्रोटोटाइप और आइडिया का वीडियो प्रस्तुत करने को कहा गया।

ऐसे काम करेगा यह मॉडल

छात्रों ने बताया कि झरिया क्षेत्र में जहां-जहां जमीन में दरारें हैं, वहां विशेष थर्मल इंसुलेटेड लेयर का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके बाद आर्टिफिशियल लैंडफार्म और स्पेशल इंसुलेटेड पाइपलाइन के जरिए भूमिगत आग से निकलने वाली मीथेन गैस को एकत्रित किया जाएगा।इस गैस को पूरी तरह बंद चैंबर में पहुंचाकर उसका प्यूरीफिकेशन किया जाएगा। इसके बाद इस मीथेन गैस को क्लीन एनर्जी में बदला जाएगा।

मीथेन गैस से बनेगी CNG और बिजली

छात्रों के अनुसार, चैंबर में एकत्रित मीथेन गैस को रिफाइनिंग प्रक्रिया के जरिए CNG में बदला जा सकेगा। इसके अलावा इसी गैस का उपयोग बिजली उत्पादन में भी किया जाएगा। इससे झरिया क्षेत्र में ऊर्जा संकट कम करने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।

वैज्ञानिक आंकड़ों ने बढ़ाई उम्मीद

भू-वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार झरिया कोयला क्षेत्र में भूमिगत आग वाले इलाकों में मीथेन गैस का उत्सर्जन लगभग 40 से 41 ग्राम प्रति सेकेंड प्रति वर्ग मीटर तक आंका गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इस गैस को नियंत्रित ढंग से संग्रहित किया जाए तो यह बड़े पैमाने पर ऊर्जा उत्पादन का स्रोत बन सकती है।

झरिया में वर्षों से बनी हुई है खतरे की स्थिति

झरिया क्षेत्र में भूमिगत आग, गैस रिसाव और भू-धंसान की समस्या पिछले 100 वर्षों से बनी हुई है। हाल ही में केंदुआडीह इलाके में बंद पड़ी खदानों से जहरीली गैस का रिसाव और भू-धंसान की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी थी।ऐसे में धनबाद के छात्रों का यह मॉडल न सिर्फ झरिया बल्कि देशभर के भूमिगत आग प्रभावित क्षेत्रों के लिए उम्मीद की नई किरण माना जा रहा है।