रांची (Threesocieties.com Desk) : झारखंड में डीजीपी नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। तदाशा मिश्रा को उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले नियमावली में संशोधन कर नियमित डीजीपी बनाए जाने के फैसले पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई है।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय के गृह सचिव गोविंद मोहन ने इस विषय में पहले ही पत्र लिखकर तदाशा मिश्रा को सेवानिवृत्त मानते हुए पत्र राज्य सरकार को भेजा था। इसके बाद केंद्रीय गृह सचिव के पत्र का हवाला देते हुए रिमाइंडर भी राज्य सरकार को भेजा गया है।
क्या है पूरा विवाद?
झारखंड सरकार ने डीजीपी नियुक्ति नियमावली में बदलाव करते हुए तदाशा मिश्रा को नियमित डीजीपी नियुक्त कर दिया। यह नियुक्ति उनकी रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले की गई, जिस पर केंद्र ने सवाल खड़े कर दिए। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि मिश्रा को सेवानिवृत्त माना जाएगा और उनकी नियुक्ति वैध नहीं है। इसके बाद केंद्र की ओर से रिमाइंडर भी भेजा गया।
UPSC और सुप्रीम कोर्ट की एंट्री
डीजीपी नियुक्ति को लेकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने भी राज्य सरकार को पत्र लिखकर कहा कि नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार पैनल के जरिए की जानी चाहिए।यह निर्देश प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामला के तहत दिए गए हैं, जिसमें डीजीपी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और मेरिट आधारित बनाने का आदेश दिया गया था। हालांकि झारखंड सरकार ने UPSC को पैनल भेजने की प्रक्रिया नहीं अपनाई। इस पर UPSC ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया, जिसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ शो-कॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब झारखंड सरकार की डीजीपी नियुक्ति पर सवाल उठे हैं। इससे पहले अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को भी केंद्र ने गलत ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने हालिया टिप्पणियों में स्पष्ट किया है कि प्रभारी डीजीपी बनाना नियमों के खिलाफ है। UPSC पैनल से बाहर जाकर नियुक्ति करना अवैध है।
राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौती
अब झारखंड सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी संशोधित नियमावली को कानूनी रूप से सही साबित करने की है। अगर सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार के फैसले को गलत ठहराता है, तो डीजीपी नियुक्ति को रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा, UPSC झारखंड समेत अन्य राज्यों को भी शो-कॉज नोटिस जारी कर सकता है, जिससे मामला और गंभीर हो सकता है।
निष्कर्ष
झारखंड में डीजीपी नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब संवैधानिक और कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। केंद्र और राज्य के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, जिसका असर राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के गृह सचिव गोविंद मोहन ने इस विषय में पहले ही पत्र लिखकर तदाशा मिश्रा को सेवानिवृत्त मानते हुए पत्र राज्य सरकार को भेजा था। इसके बाद केंद्रीय गृह सचिव के पत्र का हवाला देते हुए रिमाइंडर भी राज्य सरकार को भेजा गया है।
सेवानिवृत मानी जाएंगी झारखंड डीजीपी तदाशा मिश्रा, यूपीएससी ने भेजा था सरकार को पत्र
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि 1994 बैच की आइपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। ऐसे में उन्हें दिया गया सेवा विस्तार नियमों के अनुरूप नहीं है। यूपीएससी ने इस विस्तार को अवैध ठहराते हुए राज्य सरकार की बनाई गई नई नियमावली पर भी सवाल उठाए थे।
आयोग ने अपने पत्र में कहा है कि डीजीपी की नियुक्ति केवल यूपीएससी द्वारा चयनित पैनल के आधार पर ही की जानी चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार को योग्य आइपीएस अधिकारियों की सूची आयोग को भेजनी होगी। इसी सूची में से योग्य अधिकारियों का पैनल तैयार कर अंतिम चयन किया जाएगा। यूपीएससी ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित प्रक्रिया से बाहर जाकर की गई नियुक्ति वैध नहीं मानी जाएगी।
मामले की शुरुआत तब हुई जब तदाशा मिश्रा की सेवानिवृत्ति से ठीक दो दिन पहले राज्य सरकार ने डीजीपी नियुक्ति से संबंधित नियमावली में संशोधन कर उन्हें दो वर्षों का सेवा विस्तार दे दिया। इस कदम को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे, जिसे अब यूपीएससी ने औपचारिक रूप से चुनौती दी है।
पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल
यह पहला मामला नहीं है जब राज्य सरकार के निर्णय पर यूपीएससी ने आपत्ति जताई हो। इससे पहले 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को भी सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार दिया गया था। उस समय भी आयोग ने इस फैसले का विरोध किया था और इसे नियमों के विरुद्ध बताया था। अनुराग गुप्ता को हटाकर तदाशा मिश्रा को पहले प्रभारी डीजीपी बनाया गया। इसके बाद उनकी सेवानिवृत्ति से दो दिन पूर्व ही उन्हें नियमित डीजीपी के पद पर नियुक्त करते हुए अधिसूचना जारी कर दी गई।