Jharkhand : ₹200 करोड़ बकाया से शराब संकट गहराया, कंपनियों ने दी सप्लाई रोकने की चेतावनी

झारखंड में शराब आपूर्ति संकट गहराने लगा है। JSBCL पर शराब कंपनियों का ₹200 करोड़ से अधिक बकाया होने से सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। उद्योग संगठनों ने राज्य सरकार से तत्काल भुगतान जारी करने की मांग की है।

Jharkhand : ₹200 करोड़ बकाया से शराब संकट गहराया, कंपनियों ने दी सप्लाई रोकने की चेतावनी
झारखंड में शराब की सप्लाई पर संकट!

      HighLights

  • JSBCL पर शराब आपूर्ति कंपनियों का ₹200 करोड़ से अधिक बकाया
  • 31 अगस्त 2025 तक की आपूर्ति का भुगतान अब तक लंबित
  • फरवरी 2026 में केवल 35% राशि का आंशिक भुगतान हुआ
  • बकाया नहीं चुकाने पर राज्य में शराब आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में शराब की आपूर्ति पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। राज्य की सरकारी एजेंसी झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) पर शराब आपूर्ति करने वाली कंपनियों का ₹200 करोड़ से अधिक बकाया होने के कारण उद्योग जगत में चिंता बढ़ गई है। अल्कोहलिक पेय उद्योग से जुड़े प्रमुख संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो राज्य में शराब की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

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जानकारी के अनुसार, यह बकाया राशि 31 अगस्त 2025 तक की गई शराब, बीयर और वाइन की आपूर्ति से संबंधित है। हैरानी की बात यह है कि करीब नौ महीने बीत जाने के बावजूद कंपनियों को उनका पूरा भुगतान नहीं मिल सका है। इसके चलते कई कंपनियां बैंक ऋण और अन्य वित्तीय स्रोतों के सहारे झारखंड में आपूर्ति बनाए रखने को मजबूर हैं।

उद्योग संगठनों ने जताई गंभीर चिंता

देश के शराब उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन प्रमुख संगठन—कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (CIABC), ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) और इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISWAI)—ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इन संगठनों का कहना है कि देश में बिकने वाली शराब, बीयर और वाइन की कुल बिक्री का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इनके सदस्य उत्पादकों और कंपनियों के माध्यम से होता है। ऐसे में झारखंड में भुगतान संकट का असर व्यापक स्तर पर पड़ सकता है।

फरवरी में हुआ था आंशिक भुगतान

सूत्रों के अनुसार, JSBCL ने फरवरी 2026 में कुल बकाया राशि का लगभग 35 प्रतिशत भुगतान जारी किया था। हालांकि इसके बाद भी ₹200 करोड़ से अधिक की राशि अब तक लंबित है। उद्योग संगठनों का कहना है कि लगातार भुगतान में देरी के कारण कंपनियों की बैलेंस शीट पर भारी दबाव बढ़ रहा है। बड़ी मात्रा में रकम फंसे रहने से कार्यशील पूंजी (Working Capital) प्रभावित हो रही है, जिससे भविष्य में आपूर्ति व्यवस्था बाधित हो सकती है।

राज्य में सप्लाई प्रभावित होने की आशंका

यदि बकाया भुगतान जल्द नहीं हुआ तो झारखंड में शराब, बीयर और वाइन की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि कंपनियों के लिए लंबे समय तक वित्तीय दबाव झेलते हुए सप्लाई जारी रखना संभव नहीं होगा। उद्योग प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि लंबित भुगतान को प्राथमिकता के आधार पर जारी किया जाए, ताकि संभावित आपूर्ति संकट को टाला जा सके और बाजार में उपलब्धता सामान्य बनी रहे।

सरकार के सामने चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि शराब बिक्री से झारखंड सरकार को हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में यदि आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है तो इसका असर सरकारी राजस्व पर भी पड़ सकता है। इसलिए सरकार के लिए यह केवल उद्योग का नहीं बल्कि राजस्व प्रबंधन का भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। फिलहाल शराब उद्योग और आपूर्ति कंपनियों की निगाहें राज्य सरकार और JSBCL के अगले कदम पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में भुगतान संबंधी निर्णय से यह तय होगा कि झारखंड में शराब आपूर्ति सामान्य बनी रहेगी या संकट और गहरा जाएगा।