झारखंड पुलिस का ‘ऑपरेशन क्लीन’ शुरू: दागी थानेदार होंगे आउट, CM के आदेश पर सीक्रेट लिस्ट तैयार

झारखंड पुलिस मुख्यालय ने ‘ऑपरेशन क्लीन’ शुरू किया है। दागी, विवादित और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे थानेदारों व पुलिस अधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बड़े स्तर पर ट्रांसफर और फील्ड पोस्टिंग में बदलाव की तैयारी है।

झारखंड पुलिस का ‘ऑपरेशन क्लीन’ शुरू: दागी थानेदार होंगे आउट, CM के आदेश पर सीक्रेट लिस्ट तैयार
पुलिस मुख्यालय सख्त: बड़े फेरबदल की तैयारी।
  • मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद झारखंड पुलिस में शुरू हुआ ‘ऑपरेशन क्लीन’
  • दागी, निष्क्रिय और विवादित अधिकारियों की गोपनीय सूची तैयार
  • भ्रष्टाचार, विभागीय जांच और शिकायतों वाले थानेदारों पर विशेष नजर
  •  बड़े पैमाने पर थानेदारों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की तैयारी
  •  बोकारो और चतरा जैसी घटनाओं के बाद मुख्यालय ने तेज किया एक्शन

रांची(Threesocieties.com Desk): झारखंड में पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय ने राज्यभर में ‘ऑपरेशन क्लीन’ शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत ऐसे पुलिस अधिकारियों और थाना प्रभारियों की पहचान की जा रही है, जिन पर भ्रष्टाचार, लापरवाही, विभागीय जांच या गंभीर शिकायतों के आरोप हैं।

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सूत्रों के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों के एसएसपी और एसपी से ऐसे अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्ट मांगी है, जिनका ट्रैक रिकॉर्ड विवादों से जुड़ा रहा है या जिनके खिलाफ जांच लंबित है। इन रिपोर्टों की समीक्षा सीधे मुख्यालय स्तर पर की जा रही है।

तीन स्तरों पर हो रही स्क्रीनिंग

जानकारी के मुताबिक, इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की तीन स्तरों पर स्क्रीनिंग की जा रही है। विशेष रूप से उन अधिकारियों पर नजर रखी जा रही है जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), न्यायालय या विभागीय जांच से जुड़े मामले लंबित हैं। इतना ही नहीं, ऐसे थाना प्रभारी जिनके खिलाफ लगातार शिकायतें आ रही हैं या जिनके कार्यकाल में गंभीर लापरवाही सामने आई है, उनके रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।

दागी अधिकारियों को फील्ड से हटाने की तैयारी

पुलिस मुख्यालय सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन क्लीन का मकसद विवादित अधिकारियों को थानों से हटाकर गैर-फील्ड पोस्टिंग या पुलिस लाइन भेजना है। आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर थानेदारों के ट्रांसफर और नई पोस्टिंग भी की जा सकती है।मुख्यालय का मानना है कि साफ छवि वाले, सक्रिय और अनुभवी अधिकारियों को थानों की जिम्मेदारी देकर कानून-व्यवस्था और बेहतर बनाई जा सकती है।

बोकारो और चतरा की घटनाओं के बाद बढ़ी सख्ती

बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में सामने आए कई गंभीर मामलों के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। बोकारो में छात्रा अपहरण मामले में पुलिस की कथित लापरवाही और साक्ष्य छिपाने के आरोपों के बाद हाईकोर्ट की फटकार के पश्चात पूरे थाने के 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित करना पड़ा था। वहीं, चतरा जिले के वशिष्ठ नगर जोरी थाना में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कथित रिश्वत मांगने का ऑडियो सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी।

पुलिसिंग की साख सुधारने की कोशिश

पुलिस मुख्यालय की इस कवायद को राज्य में पुलिसिंग की गिरती साख सुधारने और आम जनता का भरोसा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।यदि यह अभियान पूरी गंभीरता से लागू होता है, तो आने वाले दिनों में झारखंड पुलिस महकमे में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं।