झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक 2026 पास: अब राज्यपाल–मुख्यमंत्री मिलकर चुनेंगे कुलपति, 65 वर्ष तय हुई अधिकतम आयु
झारखंड विधानसभा ने संशोधित झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। नए कानून के तहत राज्यपाल और मुख्यमंत्री संयुक्त रूप से पैनल से कुलपति का चयन करेंगे, जबकि नियुक्ति राज्यपाल करेंगे। कुलपति के लिए अधिकतम आयु 65 वर्ष निर्धारित की गई है।
- उच्च शिक्षा सुधार की दिशा में कदम
- VC चयन में बड़ा बदलाव_ खोज समिति देगी पैनल
- 3–5 नामों का पैनल, 65 वर्ष उम्र सीमा तय
रांची (Threesocieties.com Desk) : झारखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। झारखंड विधानसभा ने मंगलवार को संशोधित झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 को पारित कर दिया। इस नए विधेयक के लागू होने के बाद राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपति (VC) की नियुक्ति की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा।
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नए प्रावधानों के अनुसार अब राज्यपाल और मुख्यमंत्री संयुक्त रूप से कुलपति का चयन करेंगे, जबकि नियुक्ति औपचारिक रूप से राज्यपाल द्वारा की जाएगी। सरकार का दावा है कि इस नए कानून से राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनेगी।
पिछले साल का विधेयक वापस लेकर लाया गया नया प्रस्ताव
दरअसल, वर्ष 2025 में पारित झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक को कुछ आपत्तियों के कारण लोकभवन से वापस भेज दिया गया था। इसके बाद सरकार ने उसमें संशोधन कर नया झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 तैयार किया और बजट सत्र के दौरान इसे सदन के पटल पर रखा। विधेयक पर चर्चा के दौरान कुछ विधायकों ने इसे प्रवर समिति में भेजने का सुझाव भी दिया। धनबाद से भाजपा विधायक राज सिन्हा ने यह प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन विधायक अमित कुमार यादव ने किया, जबकि जयराम कुमार महतो ने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताई।
हालांकि प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार ने सभी तर्कों का जवाब देते हुए कहा कि इस बार विधेयक को पूरी तरह पुख्ता तरीके से तैयार किया गया है और पिछली सभी कमियों को दूर कर दिया गया है। इसके बाद सदन की सहमति से विधेयक को पारित कर दिया गया।
कुलपति चयन की नई प्रक्रिया
नए विधेयक के तहत कुलपति चयन के लिए एक चार सदस्यीय खोज समिति (Search Committee) का गठन किया जाएगा। यह समिति कुलपति पद के लिए योग्य उम्मीदवारों की सूची तैयार करेगी और तीन से पांच नामों का पैनल अनुशंसित करेगी।
समिति में शामिल होंगे:
राज्यपाल द्वारा नामित एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद – अध्यक्ष
किसी राष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान का निदेशक/प्रमुख
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का प्रतिनिधि
झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव
जिस विश्वविद्यालय में कुलपति का चयन होना होगा, उस विश्वविद्यालय के कुलसचिव समिति के सदस्य सचिव होंगे, लेकिन उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा।
पैनल से राज्यपाल और मुख्यमंत्री करेंगे चयन
खोज समिति द्वारा भेजे गए तीन से पांच नामों के पैनल में से राज्यपाल और मुख्यमंत्री संयुक्त रूप से किसी एक नाम का चयन करेंगे। इसके बाद राज्यपाल उस व्यक्ति को कुलपति के रूप में नियुक्त करेंगे। यदि पैनल में शामिल किसी भी नाम पर सहमति नहीं बनती है, तो राज्यपाल उसी समिति से नया पैनल या अतिरिक्त नाम भी मांग सकते हैं।
कुलपति चयन की समयसीमा तय
विधेयक में कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समयसीमा भी तय की गई है।
कुलपति पद खाली होने से कम से कम 6 महीने पहले चयन प्रक्रिया शुरू होगी
पद खाली होने से कम से कम 1 महीने पहले नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करनी होगी
सरकार का मानना है कि इससे विश्वविद्यालयों में लंबे समय तक कुलपति पद खाली रहने की समस्या समाप्त होगी।
कुलपति के लिए आयु सीमा और कार्यकाल
नए विधेयक में कुलपति पद के लिए आयु और कार्यकाल से जुड़े प्रावधान भी स्पष्ट किए गए हैं।
आवेदन के समय उम्मीदवार की अधिकतम आयु 65 वर्ष होगी
कुलपति का कार्यकाल 3 वर्ष का होगा
मुख्यमंत्री के परामर्श से राज्यपाल अधिकतम 2 वर्ष का विस्तार दे सकते हैं
विस्तार सहित कार्यकाल पूरा करने के बाद उसी विश्वविद्यालय में पुनः नियुक्ति नहीं होगी
कुलपति का कार्यकाल 70 वर्ष की आयु से अधिक नहीं हो सकता
उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार का दावा
सरकार का कहना है कि यह नया कानून झारखंड के विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार के अनुसार, यह विधेयक राज्य में कुशल और प्रभावी उच्च शिक्षा प्रणाली को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।






