झारखंड: IIT छात्रा छेड़खानी केस में IAS सैयद रियाज अहमद को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने रद्द की FIR

झारखंड हाई कोर्ट ने आईआईटी मंडी की छात्रा से कथित छेड़खानी मामले में आईएएस सैयद रियाज अहमद के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया। खूंटी में एसडीओ रहते उन पर आरोप लगे थे। कोर्ट ने दोनों पक्षों के समझौते और गवाहों के मुकरने को आधार बनाया।

झारखंड: IIT छात्रा छेड़खानी केस में IAS सैयद रियाज अहमद को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने रद्द की FIR
आईएएस सैयद रियाज अहमद(फाइल फोटो)।

रांची (Threesocieties.com Desk) : झारखंड हाई कोर्ट ने चर्चित आईआईटी छात्रा छेड़खानी मामले में आईएएस अधिकारी सैयद रियाज अहमद को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ खूंटी महिला थाना में दर्ज प्राथमिकी और उससे जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया। यह फैसला दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते और मामले में कमजोर पड़ चुके साक्ष्यों को देखते हुए सुनाया गया।

यह भी पढ़ें: धनबाद में ब्लास्टिंग से दहशत! घरों में पड़ रही दरारें, आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एके चौधरी की एकल पीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि मामले की प्रकृति ऐसी नहीं है जिसे जघन्य अपराध की श्रेणी में रखा जाए और न्यायहित में कार्यवाही समाप्त करना उचित होगा।

चार सितंबर 2024 के आरोप गठन आदेश को भी किया रद्द

आईएएस सैयद रियाज अहमद ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर खूंटी के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा चार सितंबर 2024 को पारित आरोप गठन आदेश को चुनौती दी थी।सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मामले में छह गवाहों का परीक्षण किया गया था, जिनमें पांच गवाह अपने पूर्व बयान से मुकर गए। वहीं छठा गवाह प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और उसकी जानकारी केवल सुनी-सुनाई बातों पर आधारित थी।

पीड़िता ने भी केस आगे नहीं बढ़ाने की जताई इच्छा

मामले में नया मोड़ तब आया जब याचिकाकर्ता और पीड़िता की ओर से हाई कोर्ट में संयुक्त प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। इसमें बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है और अब पीड़िता इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता रोहन मजूमदार ने अदालत को बताया कि समझौते के बाद दोषसिद्धि की संभावना बेहद कम रह गई है। ऐसे में प्राथमिकी और निचली अदालत के आदेश को निरस्त किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया गया हवाला

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम Court के विभिन्न फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी मामले में समझौते के बाद न्यायहित प्रभावित नहीं होता और अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति का नहीं है, तो आपराधिक कार्यवाही समाप्त की जा सकती है।कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यह मामला आपसी गलतफहमी और परिस्थितियों का परिणाम प्रतीत होता है, जिसे अब दोनों पक्षों ने सुलझा लिया है।

2022 में सामने आया था मामला

यह मामला जुलाई 2022 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब खूंटी में एसडीओ पद पर तैनात सैयद रियाज अहमद पर आईआईटी मंडी की एक छात्रा ने छेड़खानी का आरोप लगाया था।बताया गया था कि एक जुलाई 2022 की रात शैक्षणिक भ्रमण पर झारखंड आई छात्राओं और छात्रों को एसडीओ आवास पर पार्टी के लिए बुलाया गया था। आरोप था कि उसी दौरान पीड़िता के साथ छेड़खानी की कोशिश की गई।

इसके बाद चार जुलाई 2022 को खूंटी महिला थाना में मामला दर्ज हुआ था। पांच जुलाई को अहमद को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था, जबकि 16 जुलाई 2022 को उन्हें जमानत मिल गई थी।

हिमाचल से झारखंड आई थीं छात्राएं

जानकारी के मुताबिक सभी छात्राएं हिमाचल प्रदेश स्थित आईआईटी मंडी से शैक्षणिक भ्रमण पर झारखंड आई थीं। घटना के बाद पीड़िता अपने साथियों के साथ एसडीओ आवास से बाहर निकल गई थी। फिलहाल सैयद रियाज अहमद झारखंड के लातेहार जिले में डीडीसी के पद पर कार्यरत हैं।