पटना NEET छात्रा मौत मामला: CBI की एंट्री से बढ़ी हलचल, स्पेशल केस 7S/26 दर्ज कर SIT से लेगी पूरा रिकॉर्ड
पटना NEET छात्रा संदिग्ध मौत मामले में CBI ने स्पेशल केस 7S/26 के तहत FIR दर्ज की। SIT और राज्य पुलिस से सभी दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर केंद्रीय एजेंसी जल्द शुरू करेगी गहन जांच।
पटना (Threesocieties.com Desk)। बिहार की राजधानीपटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में अब जांच की कमान पूरी तरह केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने संभाल ली है। एजेंसी ने इस मामले में आधिकारिक रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है और इसे स्पेशल केस नंबर 7S/26 के रूप में रजिस्टर किया गया है। CBI की एंट्री के साथ ही मामले में नई हलचल तेज हो गई है और जांच के दायरे के विस्तार की संभावना जताई जा रही है।
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SIT से कब्जे में लिए जाएंगे सभी दस्तावेज
सूत्रों के अनुसार, FIR दर्ज करने के तुरंत बाद CBI की टीम राज्य पुलिस और पहले से गठित विशेष जांच दल (SIT) से अब तक की जांच से जुड़े सभी दस्तावेज, साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और केस डायरी अपने कब्जे में लेगी।इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर केंद्रीय एजेंसी आगे की जांच की विस्तृत रूपरेखा तैयार करेगी। बताया जा रहा है कि CBI की टीम जल्द ही पटना पहुंचकर संबंधित पुलिस अधिकारियों, गवाहों और छात्रा से जुड़े अन्य व्यक्तियों से पूछताछ शुरू कर सकती है।
राजनीतिक रूप ले चुका था मामला
छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील हो गया था। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की थी।विधानसभा से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे पर लगातार विरोध-प्रदर्शन और हंगामा होता रहा। मामले में पारदर्शिता और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज होती गई थी।
मुख्यमंत्री के अनुरोध पर मिली CBI जांच की मंजूरी
बढ़ते राजनीतिक दबाव और जनभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से इस मामले की CBI जांच कराने का औपचारिक अनुरोध किया था। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी साझा की थी। राज्य सरकार के अनुरोध को केंद्र द्वारा मंजूरी मिलने के बाद अब CBI ने औपचारिक रूप से केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या खुलेंगे नये राज?
अब सभी की निगाहें CBI की जांच पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय एजेंसी की गहन पड़ताल से छात्रा की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा होगा और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या आपराधिक साजिश सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी। माना जा रहा है कि CBI की जांच इस मामले को नई दिशा दे सकती है और कई अहम तथ्यों से पर्दा उठ सकता है।
24 दिन, चार IPS-दो DSP और चार पुलिस इंस्पेक्टरों की टीम, फिर भी नहीं हो सका मामले का खुलासा
पटना चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र में हॉस्टल में बेहोश मिली छात्रा की मौत मामले में पहले पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठे, फिर पोस्टमार्टम और फारेंसिक रिपोर्ट आने के बाद उनकी कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई। मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन करना पड़ा। इसमें दो आईपीएस टीम की निगरानी और समीक्षा कर रहे थे। एक आईपीएस के नेतृत्व में एएसपी, दो डीएसपी और चार इंस्पेक्टरों वाली एसआईटी जांच में जुटी थी। इनके सहयोग में भी 35 से अधिक पुलिसकर्मी थी।
एसआईटी 24 दिनों तक सभी बिन्दुओं पर छानबीन की। इसके बाद भी एसआईटी किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। शुरू में थाना पुलिस की जांच इस मामले को सुसाइड की तरफ मोड़ रही थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के साथ यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता की बात कहीं गई और फारेंसिंक रिपोर्ट में छात्रा के अंत:वस्त्र पर मानव स्पर्म के अवशेष मिलने की रिपोर्ट ने पुलिस को जांच का दायरा बढ़ाने का मजबूर कर दिया।
सीसीटीवी फुटेज, वीडियो बयान, दर्जन भर नंबर का सीडीआर, मोबाइल जांच, पटना से लेकर जहानाबाद तक हुई जांच, मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने वाले की पहचान की गई। फोरेंसिंक जांच में स्पर्म के अवशेष मिलने पर 22 लोगों का ब्लैक सैंपल तक लिया गया।इसके बाद भी एसआईटी इस स्थिति में नहीं थी कि वह बता सके कि आखिर छात्रा के साथ यौन हिंसा की घटना कहां हुई? कब हुई? और दोषी कौन है? अब इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी की इंट्री हो गई है। लोगों को उम्मीद है कि सीबीआई किसी ठोस नतीजे पर पहुंचेगी और दोषियों को बेनकाब करेगी।
सभी बिन्दु पर जांच कर चुकी है एसआईटी
सीबीआई में केस दर्ज होने के पहले एसआईटी अब तक कई बिन्दुओं पर जांच कर चुकी है। पैन ड्राइव में 150 से अधिक लोगों का बयान, रेलवे स्टेशन से हास्टल, जहानाबाद से पटना तक का एक महीन का सीसीटीवी फुटेज है।हॉस्टल, अस्पताल और स्वजनों से मिले छात्रा के सामान, दवा की जानकारी, जिस ऑटो से स्टेशन से हॉस्टल तक छात्रा आई थी और जिस वाहन से हॉस्टल से वह जहानाबाद कई थी, उसके चालक का बयान, वाहन का ब्यौरा, हॉस्टल संचालक, बिल्डिंग मालिक, मेड, वार्डन, स्वजन, पड़ोसी से लेकर हॉस्टल की छात्राओं का बयान का वीडियो रिकार्डिंग की गई है।
छात्रा की ट्रैवल हिस्ट्री, उसके मोबाइल से मिले साक्ष्य, डायरी से लेकर उसे कौन उसे अस्पताल ले गया था? उस समय हास्टल में कौन-कौन मौजूद था? उसे कमरे से बाहर कैसे निकाला गया था? हॉस्टल के कैमरे में उसे बेहोशी की हालत में ले जाते हुए, तीनों अस्पताल में उसका क्या उपचार हुआ? कौन चिकित्सक और कर्मी थे? घटना की सूचना सबसे पहले कौन और किस थाना के पदाधिकारी को दिया? पुलिस सूचना के कितने देर बाद अस्पताल पहुंची?
अस्पताल में पुलिस पहले किससे और कब संपर्क की थी? पुलिस अपना अपना मोबाइल नंबर किसे दी थी? पुलिस पहली बार हॉस्टल कब पहुंची थी? वहां से कब क्या जब्त की थी? शुरू में किस चिकित्सक के बयान के आधार पर पुलिस अपना बयान जारी किया था? छात्रा के उपचार के दौरान कौन कौन सी दवा, कौन सी जांच हुई थी?अस्पताल का सीसीटीवी फुटेज? दवा का रैपर मिलने के बाद किस दुकान का जिक्र किया गया? दुकानदार का बयान से लेकर जहानाबाद में भी हर बिन्दु पर छानबीन कर चुकी है। सिर्फ विसरा रिपोर्ट और एम्स की राय अब तक पुलिस के हाथ नहीं लगी थी।यहां तक की डीएनए मिलान के लिए 25 लोगों का ब्लड सैंपल भी लिया गया था। इन सभी बातों का जिक्र पुलिस की केस डायरी में है।
तह तक नहीं पहुंच सकी एसआईटी
संगीन अपराध में तत्काल घटनास्थल पर पहुंचने से लेकर शुरू के दो से तीन दिन महत्वपूर्ण बताए जाते है। इस मामले में शुरूआती जांच में देर हुई। पहले थाना पुलिस की जांच और फिर जांच रिपोर्ट से केस की थ्योरी बदल गई। पहले पुलिस छात्रा के मोबाइल में गूगल सर्च हिस्ट्री में नींद की दवा और सुसाइड सर्च करने?यूरिन में नींद की दवा का डोज मिलने और निजी अस्पताल की महिला चिकित्सक के बयान के पर मामले को सुसाइड की तरफ इशारा दी। फिर संदिग्ध मौत और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यौन हिंसा की बिंदु पर जांच शुरू की। इस तरह मामला उलझते चला गया। यहां तक अस्पताल से सूचना मिलने के बाद भी केस में देरी हुई। आवेदन में शरीर और सिर पर चोट के निशान व उसके साथ गलत होने का संदेह जताया गया था, इसके बाद भी पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने इंतजार करने की जगह आनन फानन में बयान देना।
केस डायरी लेगी सीबीआई, कई लोगों से हो सकती है पूछताछ
पुलिस अधिकारी की मानें तो केस दर्ज करने के बाद सीबीआई केस डायरी लेगी। केस डायरी के जरिए यह पता करेगी कि पुलिस किन किन बिन्दुओं पर क्या क्या जांच कर चुकी है। सीबीआई का खुद का लैब है।जरूरत पड़ी तो उस लैब से जब्त सामानों की जांच करेगी। जरूरत पड़ी तो पटना पुलिस से भी मदद ले सकती है। तत्कालीन थानाध्यक्ष से लेकर कई लोगों से पूछताछ कर सकती है। हॉस्टल से लेकर अस्पताल और जहानाबाद भी जा सकती है।
सीबीआई के सामने भी कई चुनौतियां
छात्रा छह जनवरी को बेहोशी हालत में भर्ती हुई थी। 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। इसके बाद 12 फरवरी को सीबीआई केस दर्ज की। घटना को 37 दिन गुजर चुके है। हॉस्टल भी खाली हो चुका है। ऐसे में समय बीतने के साथ साक्ष्य भी कमजोर हुए होंगे। फिर से बयान और भरोसा जितने के साथ ही अन्य जांच रिपोर्ट को देखना।






