झारखंड में 7 साल से पुलिस बहाली ठप, 1 लाख लोगों पर सिर्फ 151 जवान, BPRD की रिपोर्ट से खुलासा

झारखंड में 7 साल से पुलिस भर्ती नहीं होने से सुरक्षा व्यवस्था पर संकट गहरा गया है। BPR&D रिपोर्ट में खुलासा—1 लाख आबादी पर सिर्फ 151 पुलिसकर्मी, जबकि जरूरत 208 की।

झारखंड में 7 साल से पुलिस बहाली ठप, 1 लाख लोगों पर सिर्फ 151 जवान, BPRD की रिपोर्ट से खुलासा
झारखंड में पुलिस बल की कमी।

रांची (Threesocieties.com Desk):  झारखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और चिंताजनक खुलासा सामने आया है। ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में पिछले 7 वर्षों से पुलिस बहाली नहीं होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है। स्थिति यह है कि एक लाख आबादी पर मात्र 151 पुलिसकर्मी ही तैनात हैं, जबकि जरूरत 208 से अधिक की है।

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2018 के बाद नहीं हुई दारोगा की बहाली

राज्य में आखिरी बार वर्ष 2018 में लगभग 2600 दारोगा (सब-इंस्पेक्टर) की नियुक्ति हुई थी। इसके बाद आबादी लगातार बढ़ती रही, लेकिन पुलिस बल में नई भर्तियां नहीं की गईं। इसका सीधा असर पुलिस-जनसंख्या अनुपात पर पड़ा है।

पुलिस-जनसंख्या अनुपात लगातार गिरा
वर्ष 2022: 1 लाख आबादी पर 162.73 पुलिसकर्मी
वर्तमान: घटकर 151.80
आवश्यकता: 208.51 पुलिसकर्मी

यह आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में पुलिस बल की उपलब्धता जरूरत से काफी कम है, जिससे कानून-व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानक से पीछे
भारत का औसत: 197 पुलिसकर्मी प्रति लाख
वास्तविक उपलब्धता: 154.96
UN मानक: 220 प्रति लाख

झारखंड की स्थिति इन दोनों मानकों से काफी पीछे है, जो सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करती है।

करीब 30% पद खाली, सिस्टम पर बढ़ा दबाव
कुल स्वीकृत पद: 1,04,449
कार्यरत पुलिस बल: 73,375
रिक्त पद: 31,074 (29.75%)

इतनी बड़ी संख्या में पद खाली होने से पुलिस पर कार्यभार बढ़ गया है, जिससे अपराध नियंत्रण प्रभावित हो रहा है।

अपराध के आंकड़े भी दे रहे खतरे का संकेत
2024: 60,606 आपराधिक मामले
2025: 62,544 मामले (3.19% वृद्धि)
लंबित केस: 48,287
लंबित कुर्की वारंट: 76,242

अपराध के बढ़ते ग्राफ और पुलिस बल की कमी का सीधा संबंध नजर आता है।

अन्य राज्यों से तुलना
राज्य              मानक              उपलब्धता          कमी (%)
झारखंड          208.51              151.80              27.2%
छत्तीसगढ़        270.09              213.89              20.8%
उत्तराखंड         198.03            174.24              12.0%
ओडिशा          150.24             126.50              15.8%
पश्चिम बंगाल     167.37            106.05               36.6%
बिहार            133.40               80.15                39.9%

हालांकि झारखंड की स्थिति बिहार और पश्चिम बंगाल से बेहतर है, लेकिन ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्य की तुलना में स्थिति कमजोर है।

गंभीर आरोप भी सामने आए

राज्य में सक्रिय कुख्यात अपराधियों के नेटवर्क को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जेल या विदेश में बैठे अपराधी भी रंगदारी और सिंडिकेट चला रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बाबूलाल मरांडी ने उठाए सवाल

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि राज्य में 2018 के बाद से दारोगा की नई नियुक्तियां नहीं हुई हैं, जबकि आबादी तेजी से बढ़ी है। उन्होंने सरकार से जल्द बहाली प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।

झारखंड में वर्ष 2018 के बाद से पुलिस बल में दारोगा की नई भर्तियां नहीं हुई हैं, जबकि आबादी लगातार बढ़ रही है।


बीपीआरडी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में राज्य में प्रति एक लाख आबादी पर 163 पुलिसकर्मी थे, जो घटकर अब 152 रह गए हैं, जबकि आवश्यकता 209 पुलिसकर्मियों की है। यह…

— Babulal Marandi (@yourBabulal) March 31, 2026

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विदेश में बैठा प्रिंस खान और जेल में बंद सुजीत सिन्हा जैसे दुर्दांत अपराधी बेधड़क अपना आपराधिक सिंडिकेट चलाकर रंगदारी/लेवी/हफ्ता वसूल रहे हैं। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि अपराधियों को संरक्षण देने के लिए ही पुलिस बल में नियुक्तियां नहीं हो रही हैं। डीजीपी, मुख्य सचिव जैसे शीर्ष अधिकारियों के इन अपराधियों से जुड़ते तार शक को और गहराते हैं। उन्होंने कहा है कि 
Hemant Soren जी, राज्य में लाखों युवा बेरोजगार बैठे हैं। 8 वर्षों से लंबित दारोगा की बहाली शीघ्र शुरू करें और प्रदेश की कानून व्यवस्था को दुरुस्त करें।