धनबाद में किसके संरक्षण में हो रही कोयले की चोरी? BCCL के पत्र से मचा बवाल

धनबाद में अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी को लेकर BCCL ने SSP को पत्र लिखकर पुलिस के असहयोग का गंभीर आरोप लगाया है। कई इलाकों में कार्रवाई अधूरी रहने से कोल माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। बाबूलाल मरांडी ने भी केंद्र और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच की मांग की है।

धनबाद में किसके संरक्षण में हो रही कोयले की चोरी? BCCL के पत्र से मचा बवाल
कोयला चोरी पर BCCL बनाम पुलिस!
  • कोयले की चोरी या सिस्टम की मिलीभगत?  BCCL के खुलासे से धनबाद में हड़कंप
  • BCCL ने पुलिस पर उठाए सवाल,SSP को लिखे पत्र ने खोली सिस्टम की पोल
  • धनबाद में अवैध खनन पर बड़ा खुलासा, BCCL बोला- पुलिस सहयोग नहीं मिला
  • BCCL ने बताया कैसे अवैध खनन के खिलाफ अधूरी रह गई कार्रवाई

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद जिला में अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) ने सीधे तौर पर स्थानीय पुलिस के असहयोग का मुद्दा उठाते हुए धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को विस्तृत पत्र भेजा है। इस पत्र में कई ऐसे मामलों का जिक्र किया गया है, जहां पुलिस बल की अनुपस्थिति के कारण अवैध खनन रोकने की कार्रवाई अधूरी रह गई।

यह भी पढ़ें:‘वर्दी और माफिया गठजोड़’ से चल रहा गुंडागर्दी का खेल! बाबूलाल मरांडी का झारखंड सरकार पर बड़ा हमला

बीसीसीएल के इस खुलासे के बाद धनबाद में कोयला माफियाओं, पुलिस प्रशासन और सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कंपनी का कहना है कि जिला प्रशासन और टास्क फोर्स की बैठकों में सहयोग का भरोसा दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बिल्कुल अलग हैं।

BCCL ने SSP को भेजा पूरा ब्यौरा

बीसीसीएल मुख्यालय के महाप्रबंधक (सिक्यूरिटी) हाफिजुल कुरैशी ने पत्र के माध्यम से बताया कि अप्रैल से मई 2026 के बीच विभिन्न क्षेत्रों में अवैध खनन और कोयला चोरी के दस से अधिक मामले दर्ज कराए गए हैं। कई मामलों में नामजद प्राथमिकी भी हुई है, लेकिन कार्रवाई के दौरान स्थानीय थानों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। कंपनी का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी नहीं रहने के कारण अवैध खनन करने वालों के हौसले बढ़ रहे हैं और राष्ट्रीय संपत्ति को लगातार नुकसान पहुंच रहा है।

गोविंदपुर क्षेत्र में अधूरी रह गई कार्रवाई

बीसीसीएल के अनुसार गोविंदपुर क्षेत्र में 13 मई 2025 को CISF की टीम अवैध खन स्थल को भरने पहुंची थी। लेकिन कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के कारण कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। इस मामले में बरोरा थाना में ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। कंपनी का कहना है कि समय पर पुलिस बल उपलब्ध होता तो अवैध खनन स्थल को पूरी तरह बंद कराया जा सकता था।

कतरास में दो बार लौटी टीम

कतरास क्षेत्र में 23 और 26 मई को CISF द्वारा अभियान चलाने की पूर्व सूचना स्थानीय थाना को दी गई थी। इसके बावजूद पर्याप्त पुलिस सहयोग नहीं मिला। नतीजा यह हुआ कि टीम को बिना कार्रवाई के लौटना पड़ा। बीसीसीएल ने इसे बेहद गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कि पुलिस की उदासीनता के कारण कोयला माफिया लगातार सक्रिय बने हुए हैं।

सिजुआ और जोगता में भी नहीं मिला सहयोग

सिजुआ क्षेत्र के लोहाबाद पांच नंबर बस्ती और कंकनी कोलियरी के पास भी पुलिस बल नहीं पहुंचने के कारण अवैध खनन रोकने की कार्रवाई टालनी पड़ी। वहीं जोगता थाना क्षेत्र में भी बीसीसीएल के अनुरोध के बावजूद समय पर पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराया गया। कंपनी ने कहा है कि यदि समय रहते समन्वय नहीं हुआ तो अवैध खनन और कोयला चोरी पर रोक लगाना मुश्किल हो जाएगा।

बाबूलाल मरांडी ने उठाए बड़े सवाल

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि धनबाद और झारखंड की स्थिति भयावह होती जा रही है। उन्होंने कहा कि अवैध कारोबार और कोयला चोरी को लेकर वह जल्द ही प्रधानमंत्री और केंद्रीय कोयला मंत्री से मुलाकात करेंगे। मरांडी ने दावा किया कि इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री और संबंधित एजेंसियों को भी पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो धनबाद में कानून-व्यवस्था की स्थिति और खराब हो सकती है।

कोयला चोरी पर फिर गरमाई राजनीति

बीसीसीएल के पत्र के सार्वजनिक होने के बाद धनबाद में कोयला चोरी का मुद्दा फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विपक्ष जहां सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठा रहा है, वहीं आम लोगों के बीच भी यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किसके संरक्षण में अवैध खनन का कारोबार चल रहा है। धनबाद को देश की कोयला राजधानी कहा जाता है, लेकिन यहां लगातार सामने आ रहे अवैध खनन के मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।