BJP के ‘इलेक्शन इंजीनियर’ सुनील बंसल: ‘साइलेंट स्ट्राइक’ से ढहा ‘ दीदी’ का किला! रणनीति से बदल गया बंगाल का गेम?”
सुनील बंसल कौन हैं? कैसे BJP के इस ‘साइलेंट स्ट्रैटेजिस्ट’ ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के मजबूत किले को चुनौती दी। जानिए उनकी रणनीति, सियासी सफर और 2026 चुनाव का पूरा गणित।
नई दिल्ली/कोलकाता(Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा किसी चेहरे की नहीं, बल्कि एक ऐसे नाम की है जो कैमरे से दूर रहकर पूरा ‘गेम’ बदल देता है—सुनील बंसल। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इस ‘साइलेंट स्ट्रैटेजिस्ट’ ने 2026 के विधानसभा चुनाव में ऐसी रणनीति बिछाई कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC को अपने ही गढ़ में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा।
यह भी पढ़ें:PF वालों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब ATM से सीधे निकाल सकेंगे PF का पैसा, EPFO जल्द लॉन्च करेगा नई सुविधा
कौन हैं ‘इलेक्शन इंजीनियर’ सुनील बंसल?
राजस्थान से आने वाले 57 वर्षीय सुनील बंसल का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। 1989 में राजस्थान विश्वविद्यालय में महासचिव बने। RSS के प्रचारक के रूप में संगठन की बारीकियां सीखीं। बाद में BJP में शामिल होकर संगठनात्मक राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई। उनकी पहचान हमेशा ‘लो-प्रोफाइल लेकिन हाई-इम्पैक्ट’ नेता की रही है।
अमित शाह के सबसे भरोसेमंद ‘फील्ड कमांडर’
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जब अमित शाह यूपी के प्रभारी बने, तब सुनील बंसल को उनके साथ जोड़ा गया। यहीं से शुरू हुआ ‘बंसल मॉडल’—
बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करना
‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत’ अभियान
पन्ना प्रमुख सिस्टम का प्रभावी क्रियान्वयन
2017, 2019 और 2022—तीनों चुनावों में BJP की जीत में बंसल की अहम भूमिका रही।
बंगाल में ‘साइलेंट वार’—क्या था बंसल का प्लान?
???? 1. साइलेंट वोटर पर फोकस
बंसल ने उन मतदाताओं को टारगेट किया जो शोर नहीं करते, लेकिन चुनाव का नतीजा तय करते हैं।
???? 2. डेटा और माइक्रो मैनेजमेंट
हर विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवार की पकड़ का गहराई से विश्लेषण किया गया।
???? 3. बूथ लेवल पर मजबूत पकड़
BJP ने पहली बार बंगाल में बूथ स्तर तक इतना संगठित नेटवर्क तैयार किया।
???? 4. लोकल इश्यू को नेशनल नैरेटिव बनाना
संदेशखाली और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय बहस में लाकर TMC को बैकफुट पर धकेला गया।
TMC के गढ़ में सेंध—कहां चूकी ममता बनर्जी?
बंसल की रणनीति का सबसे बड़ा असर उन इलाकों में दिखा, जहां TMC अजेय मानी जाती थी।
अंदरूनी कलह को खत्म कर BJP को एकजुट किया
हाशिए पर पड़े नेताओं को मुख्यधारा में लाया
RSS और संगठन के बीच मजबूत तालमेल बनाया
इससे TMC को पहली बार अपने ‘सेफ जोन’ में भी कड़ी चुनौती मिली।
ओडिशा और तेलंगाना में भी दिखा ‘बंसल इफेक्ट’
ओडिशा में नवीन पटनायक के लंबे शासन को चुनौती
लोकसभा में 21 में 20 सीटें BJP के खाते में
तेलंगाना में 17 में 8 सीटों पर जीत
यानी जहां भी जिम्मेदारी मिली, वहां बंसल ने संगठन को ‘चुनावी मशीन’ में बदल दिया।
2027 चुनाव: क्या फिर मिलेगा बड़ा रोल?
अब नजर 2027 के विधानसभा चुनावों पर है— उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड जैसे बड़े राज्य दांव पर होंगे। सवाल यही है— ???? क्या BJP फिर से सुनील बंसल को ‘ट्रंप कार्ड’ के तौर पर इस्तेमाल करेगी?
क्या ‘साइलेंट स्ट्रैटेजी’ एक बार फिर चुनावी नतीजे पलट देगी?






