बिहार : मुजफ्फरपुर फायरिंग में किसान की मौत, थानाध्यक्ष समेत 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड
मुजफ्फरपुर के गायघाट में पुलिस फायरिंग में किसान की मौत के मामले में 8 दिन बाद बड़ा एक्शन, थानाध्यक्ष समेत 6 पुलिसकर्मी निलंबित, जानें पूरा मामला।
मुजफ्फरपुर(Threesocieties.com Desk): बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां पुलिस फायरिंग में एक वृद्ध किसान की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के आठ दिन बाद पुलिस विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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क्या है पूरा मामला?
के गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनिया गांव में पिछले सप्ताह पुलिस छापेमारी के दौरान यह घटना हुई थी। बताया जाता है कि पुलिस पाक्सो एक्ट के एक आरोपी को पकड़ने गई थी, लेकिन गलती से किसी अन्य व्यक्ति को पकड़ लिया गया। इस गलत कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने विरोध किया, जिसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। इसी दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह ने फायरिंग कर दी, जिसमें एक वृद्ध किसान को गोली लग गई और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
आठ दिन बाद बड़ी कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने जांच के बाद छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में शामिल हैं:
तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह
दारोगा मनीष कुमार
सिपाही रंजन कुमार
महिला सिपाही चांदनी कुमारी
हवलदार ओम प्रकाश
चौकिदार प्रहलाद कुमार
इसके अलावा, छापेमारी दल में शामिल दो गृहरक्षकों—अमरजीत कुमार और मनीष कुमार—के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश जिलाधिकारी से की गई है।
पहले ही दिन लिया गया था एक्शन
घटना के तुरंत बाद ही एसएसपी ने आरोपी थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया था। वहीं, मृतक किसान के परिजनों की शिकायत पर आरोपी थानाध्यक्ष के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था।
आठ घंटे तक चला बवाल
फायरिंग के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया था। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि करीब 40 थानों की पुलिस फोर्स मौके पर बुलानी पड़ी। करीब 8 घंटे तक चले हंगामे के बाद हालात पर काबू पाया जा सका।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और छापेमारी के दौरान बरती जाने वाली सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गलत व्यक्ति की गिरफ्तारी और उसके बाद फायरिंग जैसी घटनाएं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं।






