Coal India में खत्म होगी ‘दावा राजनीति’! अब कर्मचारियों के वोट से तय होगी यूनियनों की ताकत

Coal India में ट्रेड यूनियनों की मान्यता अब कर्मचारियों के सीक्रेट बैलेट वोट से तय होगी। IR Code 2020 लागू होने के बाद दावा राजनीति खत्म होगी और 51% वोट पाने वाली यूनियन को मान्यता मिलेगी। महिलाओं की भागीदारी और लोकतांत्रिक ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।

Coal India में खत्म होगी ‘दावा राजनीति’! अब कर्मचारियों के वोट से तय होगी यूनियनों की ताकत
Coal India में लागू होगा नया यूनियन मॉडल।
  • Coal India में यूनियनों के लिए लागू होगा नया नियम
  • 51% वोट वाली यूनियन बनेगी सबसे बड़ी ताकत
  •  पांच साल तक वैध रहेगी मान्यता

धनबाद (Threesocieties.com Desk): देश की सबसे बड़ी कोयला कंपनी Coal India Limited में ट्रेड यूनियनों की राजनीति अब नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। वर्षों से चली आ रही “हम सबसे बड़ी यूनियन” वाली दावा राजनीति पर जल्द विराम लग सकता है। औद्योगिक संबंध संहिता (IR Code) 2020 के तहत अब यूनियनों की ताकत कर्मचारियों के सीधे वोट से तय होगी।

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8 मई 2026 को औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के केंद्रीय नियमों की अधिसूचना जारी होने के बाद कोल इंडिया और उससे जुड़ी यूनियनों में हलचल तेज हो गई है। कंपनी प्रबंधन द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने नई व्यवस्था लागू करने को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। यदि यह सिफारिशें लागू होती हैं, तो यूनियन मान्यता का पूरा ढांचा बदल जाएगा।

अब चेक-ऑफ नहीं, कर्मचारियों के वोट से तय होगी ताकत

अब तक कई जगह यूनियनों की ताकत सदस्यता और चेक-ऑफ सिस्टम के आधार पर तय मानी जाती थी, लेकिन नई व्यवस्था में सीक्रेट बैलेट चुनाव होगा। इसमें कर्मचारियों के वोट के आधार पर यूनियनों को मान्यता मिलेगी। नई व्यवस्था के अनुसार —

51 प्रतिशत या उससे अधिक वोट पाने वाली यूनियन को एकमात्र वार्ताकार यूनियन का दर्जा मिलेगा।
यदि कोई यूनियन 51 प्रतिशत वोट हासिल नहीं करती, तो 20 प्रतिशत से अधिक वोट पाने वाली यूनियनों की संयुक्त वार्ताकार परिषद बनेगी।
20 प्रतिशत से कम वोट पाने वाली यूनियनों को पांच वर्षों तक मान्यता नहीं मिलेगी।
केवल कट-ऑफ डेट तक मतदाता सूची में शामिल कर्मचारी ही मतदान कर सकेंगे।
पूरी चुनाव प्रक्रिया केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त सत्यापन अधिकारी की निगरानी में होगी।
चुनाव के बाद मिली मान्यता पांच वर्षों तक वैध रहेगी।

कंपनी स्तर पर प्रतिनिधित्व के लिए नई शर्त

नई नीति के तहत कोल इंडिया मुख्यालय स्तर पर प्रतिनिधित्व हासिल करना भी आसान नहीं होगा। किसी यूनियन को कम-से-कम पांच अनुषंगी कंपनियों में 20 प्रतिशत वोट हासिल करना अनिवार्य होगा। तभी उसे केंद्रीय वार्ताकार परिषद में जगह मिल सकेगी।

90 दिनों में पूरी होगी चुनाव प्रक्रिया

ड्राफ्ट व्यवस्था के अनुसार यूनियन चुनाव की पूरी प्रक्रिया लगभग 90 दिनों में पूरी होगी।

प्रस्तावित चुनाव कैलेंडर

पहला दिन : कट-ऑफ डेट और मतदाता निर्धारण
दिन 0-03 : यूनियनों के आवेदन
दिन 03-14 : दस्तावेजों की जांच
दिन 15-18 : प्री-बैलेट बैठक और चुनाव चिह्न आवंटन
दिन 20 : मतदाता सूची प्रकाशन
दिन 71-75 : सीक्रेट बैलेट वोटिंग
दिन 76-80 : मतगणना और परिणाम
दिन 82-89 : प्रोजेक्ट, एरिया, सब्सिडियरी और सीआइएल स्तर पर मान्यता आदेश जारी

चार-स्तरीय वार्ता प्रणाली होगी लागू

नई व्यवस्था में वार्ता प्रक्रिया को भी चार स्तरों में विभाजित किया जाएगा।

1. कोल इंडिया मुख्यालय स्तर

यहां वेतन समझौता, कैडर-ग्रेड, ट्रांसफर नीति और स्टैंडिंग ऑर्डर जैसे बड़े मुद्दों पर बातचीत होगी।

2. सब्सिडियरी स्तर

कंपनी-विशिष्ट समस्याओं और नीतियों पर चर्चा होगी।

3. एरिया स्तर

क्षेत्रीय और संचालन संबंधी मुद्दों को यहां उठाया जाएगा।

4. प्रोजेक्ट/यूनिट स्तर

स्थानीय कार्यस्थल की समस्याओं के समाधान पर फोकस रहेगा।

इसके अलावा वर्क्स कमेटी और शिकायत निवारण समिति का गठन अनिवार्य होगा। इन समितियों में महिलाओं को अनुपातिक प्रतिनिधित्व देना होगा। समिति के सदस्य केवल मान्यता प्राप्त यूनियनों से ही नामित किए जाएंगे।

यूनियन राजनीति में क्या बदल जाएगा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद यूनियन राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं —

“सबसे बड़ी यूनियन” का दावा खत्म होगा
वोट आधारित वैधता स्थापित होगी
पांच वर्षों तक स्थिर मान्यता मिलेगी
नेगोशिएशन का दायरा स्पष्ट होगा
जमीनी स्तर से मुख्यालय तक लोकतांत्रिक ढांचा मजबूत होगा

महिलाओं की भागीदारी अब अनिवार्य

1 मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार कोल इंडिया में करीब 19,135 महिला कर्मचारी कार्यरत हैं। अभी तक यूनियनों में उनकी भागीदारी सीमित रही है, लेकिन नई व्यवस्था में वर्क्स कमेटी और शिकायत निवारण समिति में महिलाओं का अनुपातिक प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा। इससे महिला कर्मचारियों की आवाज को संस्थागत मंच मिलने की उम्मीद है।

चुनावी वजह से टली थी प्रक्रिया

जानकारी के अनुसार IR Code 2020 को 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माना गया था। केंद्रीय नियमों का मसौदा 30 दिसंबर 2025 को जारी किया गया। सुझाव और आपत्तियां 28 फरवरी 2026 तक मांगी गई थीं। इसे 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की तैयारी थी, लेकिन पांच राज्यों के चुनाव के कारण प्रक्रिया टल गई। अब 8 मई 2026 की अधिसूचना के बाद कोल इंडिया में इसके जल्द लागू होने की संभावना जताई जा रही है। कोल इंडिया प्रबंधन और यूनियनों के बीच जल्द रणनीतिक बैठक होने की चर्चा है। माना जा रहा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद ट्रेड यूनियन राजनीति में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।