'एनकाउंटर या साजिश?' भरत तिवारी मामले पर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान, जंतर-मंतर से उठेगी न्याय की आवाज
भोजपुर के बिलौटी गांव के रहने वाले भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है। 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन, देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर आंदोलन तेज होने जा रहा है।
HighLights:
- कथित एनकाउंटर मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी।
- 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन का ऐलान।
- देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान चलाकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन।
- परिवार और समर्थकों ने हत्या की धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई।
- भरत तिवारी की मां ने ₹1400 करोड़ के घोटाले को छिपाने के लिए हत्या का आरोप लगाया।
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुए कथित एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। परिवार, समर्थकों और कई सामाजिक संगठनों ने इस मामले को केवल एक पुलिस कार्रवाई नहीं बल्कि न्याय और मानवाधिकार से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए देशव्यापी आंदोलन का एलान किया है।
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भरत तिवारी की तेरहवीं के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में घोषणा की गई कि 17 जुलाई को जंतर-मंतर पर विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे देश में हस्ताक्षर अभियान चलाकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
न्याय संघर्ष मोर्चा ने किया आंदोलन का ऐलान
वीर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष मोर्चा के संयोजक पंकज त्रिपाठी, क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. अनिल कुमार सिंह और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि जब तक भरत तिवारी को न्याय नहीं मिलता, तब तक कानूनी लड़ाई और जन आंदोलन दोनों जारी रहेंगे।
हत्या की धाराओं में एफआईआर की मांग
अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में हत्या से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने कथित एनकाउंटर में शामिल अधिकारियों के स्थानांतरण और निष्पक्ष जांच की भी मांग की।उनका कहना था कि यदि जांच प्रभावित करने वाले अधिकारी पद पर बने रहते हैं तो निष्पक्ष जांच संभव नहीं होगी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार पर दबाव बनाने और सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने भी उठाए सवाल
पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि भरत तिवारी के साथ अन्याय हुआ है तो उनके परिवार को न्याय और उचित मुआवजा मिलना चाहिए। चौबे ने दावा किया कि भरत तिवारी समाज सेवा और जनहित के मुद्दों को उठाने में सक्रिय थे।
मां का बड़ा आरोप- 'घोटाला उजागर करने की कीमत बेटे ने जान देकर चुकाई'
भरत तिवारी की मां आशा तिवारी ने दावा किया कि उनके बेटे की हत्या ₹1400 करोड़ के कथित घोटाले की जानकारी सार्वजनिक होने से रोकने के लिए की गई।उन्होंने आरोप लगाया कि विकास योजनाओं के लिए आए फंड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी और भरत तिवारी इस मामले से जुड़े तथ्यों को उजागर करने वाले थे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और जांच एजेंसियों ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
स्मारक निर्माण पर भी विवाद
कथित एनकाउंटर स्थल पर भरत तिवारी का स्मारक बनाने की योजना भी विवादों में घिर गई है। प्रशासन ने सरकारी भूमि पर बिना अनुमति निर्माण कार्य को रोक दिया है।प्रशासन का कहना है कि किसी भी सरकारी जमीन पर निर्माण से पहले संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होता है। इसके अलावा आसपास के भू-स्वामियों की आपत्तियों को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
बिलौटी में भरत तिवारी का ब्रह्मभोज : 8000 लोग; 300 पुलिस कर्मी और नेताओं का रेला

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में मंगलवार को भरत तिवारी की श्रद्धांजलि सभा सह ब्रह्मभोज में बड़ी संख्या में लोग जुटे। कार्यक्रम में करीब आठ हजार लोगों ने ब्रह्मभोज में भोजन ग्रहण किया, जबकि 10 हजार से अधिक लोग दिवंगत भरत तिवारी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। श्रद्धांजलि सभा में बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और झारखंड से भी लोग पहुंचे। हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान संगठनों से जुड़े सैकड़ों लोग निजी वाहनों से कार्यक्रम में शामिल हुए। कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक संजय तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी, उद्योगपति अजय सिंह, जन सुराज नेत्री पद्मा ओझा, अधिवक्ता अनिल मिश्रा, हरियाणा कांग्रेस के अतुल वत्स, समाजवादी पार्टी के नेता और कई जनप्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 300 से अधिक महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। आसपास के कई थानों की पुलिस बल को भी लगाया गया। भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत तिवारी के ब्रह्मभोज और श्रद्धांजलि सभा में 10,000 से अधिक लोग जुटे, जिसमें विभिन्न राज्यों के नेता और किसान संगठन शामिल थे। सुरक्षा के लिए 300 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे।
भोजपुर में भरत तिवारी के ब्रह्मभोज पर कटाव पीड़ितों को बांटे गए वस्त्र
शाहपुर में भरत तिवारी के ब्रह्मभोज पर उनके माता-पिता ने जवइनियां गांव के कटाव पीड़ित परिवारों को वस्त्र वितरित किए। यह पहल बेटे की समाज सेवा की भावना को आगे बढ़ाने और उसकी स्मृति को सम्मान देने के लिए की गई। कथित पुलिस एनकाउंटर में मारे गए बिलौटी गांव निवासी भरत तिवारी के ब्रह्मभोज के अवसर पर उनके माता-पिता ने सामाजिक सरोकार का परिचय दिया। इस मौके पर जवइनियां गांव के कटाव पीड़ित परिवारों के बीच साड़ी और धोती का वितरण किया गया। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष लाभुकों ने इस पहल का लाभ उठाया।
समाज सेवा की सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास
भरत तिवारी की मां आशा देवी और पिता काशीनाथ तिवारी ने कहा कि उनका पुत्र जवइनियां गांव के कटाव पीड़ित परिवारों की समस्याओं और उनके पुनर्वास के लिए लगातार संघर्ष करता रहा। उन्होंने कहा कि बेटे को वापस तो नहीं लाया जा सकता, लेकिन उसके आदर्शों और समाज सेवा की भावना को आगे बढ़ाने के लिए यह छोटा-सा प्रयास किया गया है। कार्यक्रम के दौरान कटाव प्रभावित परिवारों को वस्त्र वितरित किए गए। साड़ी और धोती मिलने पर लाभुकों ने भरत तिवारी के माता-पिता की इस मानवीय पहल की सराहना की और दिवंगत भरत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों ने कहा कि जरूरतमंदों की मदद करना दिवंगत की स्मृति को सम्मान देने का सार्थक माध्यम है।
अब सबकी नजर जांच पर
भरत तिवारी मामले ने बिहार की राजनीति और प्रशासन दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक ओर परिवार और समर्थक इसे हत्या बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस अपने दावों पर कायम है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया यह तय करेगी कि यह मामला पुलिस मुठभेड़ था या फिर किसी बड़ी साजिश का हिस्सा। फिलहाल 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाला प्रदर्शन इस पूरे मामले को राष्ट्रीय बहस का विषय बना सकता है।






