हजारीबाग ट्रेजरी घोटाला: 21 SBI खातों के जरिए 25 करोड़ की मनी ट्रेल, 10 साल तक DDO कोड से खेलते रहे कर्मचारी
हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। करीब 27-28 करोड़ रुपये की सरकारी राशि को 21 SBI खातों में ट्रांसफर कर लेयरिंग की गई। DDO कोड के दुरुपयोग और डिजिटल रिकॉर्ड में हेरफेर के जरिए 10 वर्षों तक सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।
HighLights:
- हजारीबाग पुलिस कार्यालय से जुड़े 27-28 करोड़ रुपये के गबन मामले में बड़ा खुलासा।
- जांच में सामने आया कि घोटाले की राशि को पहले 21 बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।
- एसपी कार्यालय के DDO कोड का दुरुपयोग कर वर्षों तक सरकारी धन निकाला गया।
- तीन पुलिसकर्मियों ने डिजिटल रिकॉर्ड में हेरफेर कर करोड़ों रुपये के गबन की बात स्वीकार की।
- जांच एजेंसी को मनी ट्रेल और लेयरिंग से जुड़े महत्वपूर्ण बैंकिंग दस्तावेज मिले हैं।
रांची (Threesocieties.com Desk): हजारीबाग पुलिस कार्यालय से जुड़े करीब 27 से 28 करोड़ रुपये के बहुचर्चित सरकारी धन गबन मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं। मामले की जांच कर रही सीआईडी को अब उन 21 बैंक खातों का विवरण मिला है जिनके जरिए घोटाले की रकम को अलग-अलग चरणों में ट्रांसफर और लेयरिंग कर खपाया गया।
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जांच में सामने आया है कि सरकारी राशि को सीधे निकालने के बजाय पहले विभिन्न खातों में भेजा गया और फिर कई स्तरों पर रूट कर उसकी वास्तविक पहचान छिपाने की कोशिश की गई। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह कोई साधारण गबन नहीं बल्कि सुनियोजित वित्तीय अपराध था।
DDO कोड का दुरुपयोग कर निकाले गए करोड़ों रुपये
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब ट्रेजरी अधिकारी उज्ज्वल कुमार चौरसिया ने लिखित शिकायत दर्ज कराई। वित्त विभाग के झारखंड स्टेट ईएमयू कोषांग द्वारा किए गए डेटा एनालिसिस में भारी अनियमितताएं सामने आने के बाद जांच शुरू हुई। जांच में पता चला कि हजारीबाग एसपी कार्यालय के DDO कोड HZBPOL007 का दुरुपयोग करते हुए पिछले लगभग 10 वर्षों के दौरान दो बैंक खातों में अवैध रूप से 15 करोड़ 41 लाख 41 हजार 485 रुपये ट्रांसफर किए गए।
इसके बाद अप्रैल में गठित जांच समिति और एडिशनल एसपी अमित कुमार ने एसपी कार्यालय के अकाउंट्स सेक्शन से जुड़े कंप्यूटर डेटा और पिछले दस वर्षों के बिलों की जांच की। जांच में सॉफ्ट कॉपी और हार्ड कॉपी बिलों के बीच गंभीर विसंगतियां पाई गईं, हालांकि भुगतान की कुल राशि दोनों में समान दिखाई गई थी।
मुख्य खातों में भेजी गई थी करोड़ों की रकम
जांच एजेंसियों के अनुसार, घोटाले की बड़ी राशि मुख्य रूप से दो खातों में भेजी गई थी। इनमें से एक खाता शंभू सिंह के नाम पर तथा दूसरा संगीता चौधरी के नाम पर बताया जा रहा है। इसके बाद रकम को अन्य खातों में स्थानांतरित कर उसकी मनी ट्रेल को जटिल बनाने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क सरकारी धन को वैध दिखाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।
तीन पुलिसकर्मियों ने स्वीकार किया रिकॉर्ड में हेरफेर
अकाउंट्स सेक्शन में तैनात कांस्टेबल संख्या 1031 शंभू कुमार, कांस्टेबल संख्या 82 रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज सिंह और कांस्टेबल संख्या 25 धीरेंद्र सिंह ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि वे पिछले 8 से 10 वर्षों से डिजिटल सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करते रहे।जांच एजेंसियों के अनुसार इन कर्मचारियों ने 21 बैंक खातों के जरिए करीब 27 से 28 करोड़ रुपये का गबन किया। इस स्वीकारोक्ति के बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है तथा अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
CID के हाथ लगी 21 खातों की सूची
जांच के दौरान सीआईडी को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के 21 खातों का विवरण मिला है जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर घोटाले की राशि को ट्रांसफर और लेयरिंग करने में किया गया। इन खातों के जरिए पिछले 8 से 10 वर्षों के दौरान लगातार अवैध लेनदेन किए जाने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियां अब इन खातों से जुड़े लाभार्थियों, लेनदेन के पैटर्न और रकम के अंतिम गंतव्य का पता लगाने में जुटी हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की भी जांच
जांच एजेंसियां अब इस मामले को केवल सरकारी धन गबन तक सीमित नहीं मान रही हैं। करोड़ों रुपये की रकम को विभिन्न खातों में घुमाने और लेयरिंग करने के तरीके को देखते हुए मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में कई और लोगों से पूछताछ हो सकती है और मामले में नई गिरफ्तारियां भी संभव हैं। यदि जांच में वित्तीय नेटवर्क के और लिंक सामने आते हैं तो यह झारखंड के सबसे बड़े सरकारी वित्तीय घोटालों में शामिल हो सकता है।






