JPL फाइनल बना हादसा! '4 गेट थे पर खोला सिर्फ एक', रांची के JSCA स्टेडियम में मची भगदड़ की वजह आई सामने

रांची के JSCA अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में JPL-20 फाइनल के दौरान भारी अव्यवस्था के कारण भगदड़ मच गई। चार गेट होने के बावजूद सिर्फ एक गेट खोलने और भीड़ प्रबंधन में लापरवाही के आरोप लगे हैं। घटना में 12 से अधिक दर्शक घायल हुए, जबकि नाराज भीड़ ने वेस्ट गेट और बैरिकेडिंग तोड़ दी।

JPL फाइनल बना हादसा! '4 गेट थे पर खोला सिर्फ एक', रांची के JSCA स्टेडियम में मची भगदड़ की वजह आई सामने
JSCA स्टेडियम की अव्यवस्था से फूटा गुस्सा।

     HighLights

  • JPL-20 फाइनल के दौरान JSCA स्टेडियम में मची भगदड़
  • स्टेडियम के चार प्रवेश द्वार होने के बावजूद सिर्फ एक गेट खोले जाने का आरोप
  • भीड़ बढ़ने पर गेट बंद किए जाने से बेकाबू हुए दर्शक
  • वेस्ट गेट तोड़कर अंदर घुसी भीड़, बैरिकेडिंग भी टूटी
  • 12 से अधिक लोग घायल, कई अस्पतालों में भर्ती
  • पुलिस और स्टेडियम प्रबंधन की तैयारियों पर उठे गंभीर सवाल
  • देर रात तक 108 एंबुलेंस और स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात रही

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड की राजधानी रांची स्थित JSCA अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में मंगलवार की रात आयोजित JPL-20 फाइनल मुकाबला रोमांच से ज्यादा अव्यवस्था और अफरातफरी के लिए चर्चा में आ गया। हजारों क्रिकेट प्रेमियों की भीड़ को संभालने में स्टेडियम प्रबंधन और प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हुआ, जिसके कारण स्टेडियम के प्रवेश द्वार पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घटना में 12 से अधिक दर्शक घायल हुए, जबकि कई लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।

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प्रत्यक्षदर्शियों और दर्शकों के अनुसार, स्टेडियम में प्रवेश के लिए चार गेट मौजूद थे, लेकिन दर्शकों के लिए सिर्फ एक गेट खोला गया था। इसी वजह से हजारों लोग एक ही प्रवेश द्वार पर जमा हो गए और हालात बेकाबू हो गए।

नॉर्थ गेट से शुरू हुई अफरातफरी

जानकारी के अनुसार शुरुआती दौर में दर्शकों को नॉर्थ गेट से प्रवेश कराया जा रहा था। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, लोगों को अचानक साउथ गेट की ओर भेजने की घोषणा की गई। इससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। हजारों लोग एक साथ गेट की ओर बढ़ने लगे। धक्का-मुक्की बढ़ी और देखते ही देखते कई लोग जमीन पर गिर पड़े। बच्चों, महिलाओं और युवाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।

भीड़ का गुस्सा फूटा, टूटा वेस्ट गेट

घंटों इंतजार और अव्यवस्था से नाराज दर्शकों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुछ लोगों ने स्टेडियम के वेस्ट गेट को तोड़ दिया। स्टेडियम परिसर के बाहर लगी लोहे की बैरिकेडिंग भी क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद स्टेडियम के बाहर चप्पल, जूते और अन्य सामान बिखरे पड़े दिखाई दिए, जो अफरातफरी की भयावह तस्वीर बयां कर रहे थे।

'अंदर जगह खाली थी, बाहर लोग परेशान थे'

घटना के बाद कई दर्शकों ने आरोप लगाया कि स्टेडियम के अंदर पर्याप्त जगह उपलब्ध थी, लेकिन प्रवेश व्यवस्था पूरी तरह फेल रही। लोगों का कहना है कि भीड़ बढ़ने पर गेट बंद कर दिया गया, जिससे बाहर खड़े दर्शक बेकाबू हो गए। दर्शकों ने यह भी आरोप लगाया कि न तो पर्याप्त सुरक्षा कर्मी मौजूद थे और न ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी योजना बनाई गई थी।

12 से अधिक घायल, कई अस्पतालों में भर्ती

घटना में घायल लोगों को तत्काल विभिन्न अस्पतालों में भेजा गया। पांच घायलों को राज अस्पताल, दो को सदर अस्पताल और एक को पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके अलावा कई लोगों का निजी अस्पतालों में उपचार किया गया।अस्पताल सूत्रों के अनुसार सभी घायल खतरे से बाहर हैं, लेकिन एक युवती के पेट में गंभीर चोट लगने के कारण उसे निगरानी में रखा गया है।

देर रात तक दौड़ती रहीं एंबुलेंस

रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही लगातार 108 एंबुलेंस स्टेडियम परिसर भेजी गईं। स्वास्थ्य विभाग की टीम देर रात तक घायलों के इलाज और स्थिति की निगरानी में जुटी रही। प्रशासन ने आशंका जताई कि कुछ और घायल देर रात तक इलाज के लिए अस्पताल पहुंच सकते हैं।

पुलिस और JSCA प्रबंधन पर उठे सवाल

JPL फाइनल जैसे बड़े आयोजन में हुई इस घटना ने एक बार फिर रांची में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। खेल प्रेमियों का कहना है कि इतनी बड़ी भीड़ आने की संभावना पहले से थी, बावजूद इसके पर्याप्त तैयारी नहीं की गई।घटना के बाद लोगों ने स्टेडियम प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है।

सबसे बड़ा सवाल

जब स्टेडियम में प्रवेश के लिए चार गेट मौजूद थे, तो आखिर दर्शकों के लिए सिर्फ एक गेट ही क्यों खोला गया? यही सवाल अब JSCA प्रबंधन और प्रशासन दोनों के सामने खड़ा है। यदि समय रहते भीड़ प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था की जाती, तो शायद यह रोमांचक फाइनल मुकाबला भगदड़ और अव्यवस्था की खबरों में तब्दील नहीं होता।