झारखंड उत्पाद सिपाही परीक्षा में “पेपर लीक” नहीं, 15 लाख की ठगी का खेल! सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़, 164 गिरफ्तार
झारखंड उत्पाद सिपाही परीक्षा 2023 में पेपर लीक की अफवाह निकली फर्जी। रांची पुलिस ने सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ कर 164 लोगों को गिरफ्तार किया। अभ्यर्थियों से 10–15 लाख रुपये लेकर ठगी की जा रही थी।
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जिस “पेपर लीक” की चर्चा पूरे राज्य में थी, वह पूरी तरह फर्जी निकली। दरअसल, यह एक सुनियोजित ठगी का मामला था, जिसमें सॉल्वर गैंग अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूल रहा था।
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रांची पुलिस ने इस अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य सरगना समेत 164 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 5 अपराधी और 159 अभ्यर्थी (7 महिलाएं) शामिल हैं।
JSSC ने साफ किया—पेपर लीक नहीं हुआ
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने स्पष्ट कहा कि तमाड़ से बरामद प्रश्नपत्र का असली परीक्षा पेपर से कोई मेल नहीं है। यानी, पेपर लीक की पूरी कहानी महज अफवाह थी, जिसे गिरोह ने ठगी के लिए फैलाया।
10 से 15 लाख में “पास कराने” का सौदा
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गैंग के एजेंट अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के नाम पर 10 से 15 लाख रुपये तक वसूल रहे थे।
अभ्यर्थियों को सुनसान जगह पर बुलाया गया
नकली प्रश्नपत्र और उत्तर रटवाए जा रहे थे
परीक्षा में “सेटिंग” का झांसा दिया गया
आधी रात छापेमारी, मौके पर मची अफरा-तफरी
11 अप्रैल 2026 को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने तमाड़ थाना क्षेत्र के एक निर्माणाधीन भवन में छापेमारी की।
150 से ज्यादा लोग मौके पर मौजूद मिले
पुलिस को देखकर भागने और सबूत छिपाने की कोशिश
सभी को घेराबंदी कर हिरासत में लिया गया
बरामद सामान:
नकली प्रश्न-उत्तर सेट
प्रिंटर और कई मोबाइल फोन
फटे एडमिट कार्ड
बैंक चेक
8 वाहन
बिहार का कुख्यात अपराधी निकला मास्टरमाइंड
गिरोह का सरगना अतुल वत्स (जहानाबाद, बिहार) बताया जा रहा है, जिसका कई बड़े पेपर लीक मामलों से कनेक्शन रहा है। उसका नाम पहले भी इन मामलों में सामने आ चुका है:
राजस्थान क्लर्क भर्ती (2017)
NEET पेपर लीक (2024)
बिहार CHO भर्ती (2024)
UP RO/ARO परीक्षा (2024)
UP पुलिस भर्ती (2024)
अभ्यर्थियों पर भी गिरेगी गाज
पुलिस और आयोग ने साफ कर दिया है कि गिरफ्तार अभ्यर्थियों पर भी कार्रवाई होगी। सभी को परीक्षा से डिबार (निष्कासित) किया जा सकता है।
पुलिस की सख्त चेतावनी
रांची पुलिस और JSSC ने अभ्यर्थियों को चेताया है कि फर्जी पेपर लीक के झांसे में न आएं। किसी भी अवैध माध्यम का इस्तेमाल करने पर कड़ी कार्रवाई होगी
उत्पाद विभाग भर्ती के नाम पर 23.85 करोड़ की ठगी, झांसे में आकर पैसे देने वाले अभ्यर्थी जाएंगे जेल
उत्पाद विभाग में भर्ती कराने के नाम पर चल रहे ठगी के बड़े खेल में ठगों ने अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए तमाड़ के रड़गांव से करीब सात किलोमीटर दूर खेतों के बीच स्थित एक अर्धनिर्मित नर्सिंग होम भवन को चुना था, ताकि किसी बाहरी व्यक्ति की नजर वहां न पड़े। यह भवन चारों ओर से सुनसान इलाके में स्थित है, जहां आसपास न तो कोई आबादी है और न ही कोई अन्य निर्माण। ठग इसी एकांत का फायदा उठाना चाहते थे। गिरोह की योजना थी कि रात 12 बजे तक सभी अभ्यर्थियों को तथाकथित प्रश्न पत्र याद करा दिया जाए और उसके बाद उन्हें वहां से हटा दिया जाए, ताकि किसी को शक न हो। हालांकि, उनकी यह योजना सफल नहीं हो सकी।
भवन में बिखरा पड़ा हुआ था प्रश्न पत्र
रांची पुलिस को समय रहते सटीक सूचना मिल गई, जिसके बाद तुरंत कार्रवाई की गई। पुलिस ने कई टीमों का गठन कर एक साथ तमाड़ में छापेमारी की। पहले पूरे इलाके की घेराबंदी की गई, ताकि कोई भी आरोपित मौके से भाग न सके। इसके बाद जब छापेमारी की गई, तो वहां मौजूद 164 लोगों को पकड़ लिया गया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने देखा कि नर्सिंग होम भवन के अंदर और आसपास फर्जी प्रश्न पत्र बिखरे पड़े थे। इससे स्पष्ट हो गया कि यहां किसी संगठित तरीके से अभ्यर्थियों को गुमराह किया जा रहा था। यह मामला शहर में अब तक का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
आरोपितों का कॉल डिटेल खंगाल रही है रांची पुलिस
आरोपितों के कॉल डिटेल्स खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि इस ठगी का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है। रांची पुलिस का कहना है कि सभी गिरफ्तार आरोपितों को जल्द ही रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि उनसे पूछताछ कर और अहम जानकारियां हासिल की जा सकें। इस कार्रवाई के बाद पुलिस को उम्मीद है कि इस तरह के अन्य गिरोहों का भी पर्दाफाश किया जा सकेगा।
उत्पाद विभाग भर्ती के नाम पर 23.85 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा
राजधानी रांची में उत्पाद विभाग में भर्ती कराने के नाम पर एक बड़े ठगी गिरोह का खुलासा हुआ है। इस गिरोह ने सैकड़ों अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे करोड़ों रुपये ऐंठ लिए। चौंकाने वाली बात यह है कि इस ठगी के जाल में फंसे अभ्यर्थियों को न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, बल्कि अंतत उन्हें जेल भी जाना पड़ा। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने कुल 23 करोड़ 85 लाख रुपये की ठगी की। हर अभ्यर्थी से लगभग 15-15 लाख रुपये वसूले गए थे।
गिरोह के सदस्यों ने दावा किया था कि वे उत्पाद विभाग की सिपाही भर्ती परीक्षा का असली प्रश्न पत्र उपलब्ध कराएंगे, जिससे अभ्यर्थी आसानी से परीक्षा पास कर सकेंगे। हालांकि जांच में यह स्पष्ट हो गया कि उनके पास कोई असली प्रश्न पत्र नहीं था। अभ्यर्थियों को पूरी तरह से फर्जी प्रश्न पत्र रटवाए जा रहे थे। शुरुआत में यह मामला प्रश्न पत्र लीक का प्रतीत हो रहा था, लेकिन जब पुलिस ने तथ्यों की जांच की और प्रश्न पत्रों का मिलान किया, तो यह पूरी तरह से ठगी का मामला निकला। अभ्यर्थियों को सुनियोजित तरीके से भ्रमित कर उनसे भारी रकम वसूली गई थी।
तमाड़ में शनिवार की रात पुलिस ने की थी छापेमारी
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब रांची पुलिस को शनिवार रात इस गिरोह और अभ्यर्थियों की गतिविधियों की गुप्त सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और कई टीमों का गठन किया गया। सभी टीमों ने एक साथ तमाड़ क्षेत्र में छापेमारी की योजना बनाई। पहले पूरे इलाके की घेराबंदी की गई, ताकि कोई भी संदिग्ध वहां से भाग न सके। इसके बाद जब छापेमारी की गई, तो मौके से 164 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को तमाड़ थाना लाया गया।
पटना में रहकर मुख्य सरगना चलाता है अपना नेटवर्क
रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने बताया कि प्रारंभिक जांच में ऐसा लगा था कि यह प्रश्न पत्र लीक का मामला है, लेकिन गहराई से जांच करने पर स्पष्ट हो गया कि यह पूरी तरह से ठगी का संगठित नेटवर्क है। पुलिस का कहना है कि गिरोह के मुख्य सरगना अतुल वत्स का पहले से आपराधिक इतिहास रहा है और वह कई अन्य परीक्षा घोटालों में भी शामिल रह चुका है। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह से जुड़े राहुल नामक आरोपित का संबंध कई चर्चित परीक्षा पेपर लीक मामलों से रहा है। इनमें राजस्थान क्लर्क भर्ती परीक्षा, नीट परीक्षा, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर भर्ती परीक्षा, रिव्यू आफिसर/असिस्टेंट रिव्यू ऑफिसर प्रारंभिक परीक्षा और उत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती परीक्षा शामिल हैं।
राहुल को पहले उत्तर प्रदेश एसटीएफ द्वारा रिव्यू ऑफिसर परीक्षा पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। वह मूल रूप से बिहार के जहानाबाद जिले के घोषी बंधुगंज का रहने वाला है, हालांकि हाल के दिनों में वह पटना के बोरिंग रोड स्थित जया अपार्टमेंट में रह रहा था। गिरोह के अन्य सदस्यों में विकास कुमार (पटना सलामी), आशिष कुमार (मांडू, रामगढ़), मुकेश कुमार (पूर्वी चंपारण, बिहार) और रमीज अंसारी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के अधिकांश सदस्य बिहार के रहने वाले हैं और पटना में रहकर पूरे देश में ठगी का नेटवर्क संचालित करते हैं।
क्या बताता है यह मामला?
यह पूरा मामला झारखंड में सक्रिय ठगी गैंगों की साजिश को उजागर करता है, जो बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाकर लाखों की ठगी कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है और अन्य एजेंटों की तलाश जारी है।
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