झारखंड: DSP डबल सैलरी विवाद पर बड़ा खुलासा: ‘फर्जीवाड़ा नहीं, क्लर्कियल गलती से आया DA एरियर, पूरी राशि लौटाई गई
झारखंड में DSP द्वारा दोहरा वेतन निकालने के आरोपों पर झारखंड पुलिस सर्विस एसोसिएशन ने सफाई दी है। एसोसिएशन ने कहा कि यह कोई घोटाला नहीं बल्कि क्लर्कियल गलती थी। अतिरिक्त DA एरियर की राशि अधिकारियों ने सरकारी खजाने में वापस जमा कर दी है।
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में कुछ डीएसपी द्वारा फर्जी तरीके से दोहरा वेतन निकालने की खबरों पर अब बड़ा खुलासा सामने आया है। झारखंड पुलिस सर्विस एसोसिएशन ने इन खबरों का कड़ा खंडन करते हुए साफ किया है कि यह कोई घोटाला, फर्जीवाड़ा या ट्रेजरी से सांठगांठ का मामला नहीं है, बल्कि केवल क्लर्कियल गलती के कारण महंगाई भत्ता (DA) एरियर का दोहरा भुगतान हुआ था।
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एसोसिएशन ने यह भी बताया कि संबंधित अधिकारियों ने अतिरिक्त राशि की जानकारी मिलते ही पूरी रकम सरकारी खाते में वापस जमा कर दी थी। ऐसे में इसे ‘डबल सैलरी स्कैम’ बताना पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में कुछ समाचार पत्रों में यह खबर प्रकाशित हुई थी कि राज्य के 14 कोषागारों से सांठगांठ कर कई डीएसपी, शिक्षक और चतुर्थवर्गीय कर्मियों ने फर्जी तरीके से दोहरा वेतन निकाला। इस खबर में विशेष रूप से पलामू जिले में तैनात रहे चार पुलिस उपाधीक्षकों का नाम प्रमुखता से सामने आया था। इन अधिकारियों में मुकेश कुमार महतो, मणिभूषण प्रसाद (सेवानिवृत्त), मो. नौशाद आलम और राजेश यादव (परिवीक्षाधीन डीएसपी) शामिल बताए गए थे। इस खबर के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई थी और इसे बड़े वित्तीय अनियमितता के रूप में देखा जाने लगा था।
ऑडिट में सामने आई सच्चाई
झारखंड पुलिस सर्विस एसोसिएशन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधान महालेखाकार झारखंड द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 के ऑडिट के दौरान यह पाया गया कि इन अधिकारियों के खातों में महंगाई भत्ता (DA) एरियर का दोहरा भुगतान हो गया था। यह राशि कोई लाखों में नहीं, बल्कि लगभग 6 हजार रुपये या उससे भी कम थी। यानी पूरा मासिक वेतन दो बार मिलने जैसी खबरें पूरी तरह गलत थीं। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यह भुगतान ट्रेजरी स्तर पर हुई प्रक्रियात्मक चूक या क्लर्कियल गलती का परिणाम प्रतीत होता है।
अधिकारियों ने तुरंत लौटाई राशि
एसोसिएशन के अध्यक्ष अमर कुमार पाण्डेय और उपाध्यक्ष संजय कुमार द्वारा जारी बयान में कहा गया कि जैसे ही संबंधित पुलिस उपाधीक्षकों को अतिरिक्त भुगतान की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत ट्रेजरी चालान के माध्यम से पूरी राशि सरकारी खजाने में वापस जमा कर दी। इससे साफ है कि अधिकारियों की ओर से किसी प्रकार की धोखाधड़ी या जानबूझकर गलत भुगतान लेने की मंशा नहीं थी।
मीडिया से तथ्यों की पुष्टि की अपील
एसोसिएशन ने उन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है जिनमें यह कहा गया कि अधिकारियों ने अपना पूरा वेतन दो बार प्राप्त किया। संगठन का कहना है कि यह केवल डीए एरियर की छोटी राशि थी, जिसे बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया।साथ ही, यह भी कहा गया कि इस चूक के लिए जिम्मेदार कर्मियों की पहचान की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो। झारखंड पुलिस सर्विस एसोसिएशन ने मीडिया संस्थानों से अपील की है कि इस प्रकार की संवेदनशील खबरों को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि जरूर करें और संबंधित पक्ष का भी पक्ष लिया जाए।
राजनीतिक और प्रशासनिक असर
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी भुगतान प्रणाली, ट्रेजरी प्रबंधन और ऑडिट प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अब एसोसिएशन की सफाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मामला किसी बड़े भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक त्रुटि का था। फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच में क्लर्कियल गलती के लिए जिम्मेदार कर्मचारी कौन पाए जाते हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।






