धनबाद में बड़ा घोटाला! जब्त 1000 टन अवैध कोयला ही हो गया चोरी, खनन विभाग पर उठे गंभीर सवाल

धनबाद में जिला खनन विभाग द्वारा जब्त 1030 टन अवैध कोयले में से 1000 टन से अधिक कोयला चोरी हो गया। जिला परिषद अध्यक्ष की रिपोर्ट मांगने पर बड़ा खुलासा हुआ, जिससे खनन विभाग और स्थानीय जिम्मेदारों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

धनबाद में बड़ा घोटाला! जब्त 1000 टन अवैध कोयला ही हो गया चोरी, खनन विभाग पर उठे गंभीर सवाल
जब्त कोयला (फाइल फोटो)।
  • सरकारी कब्जे से गायब 1000 टन कोयला
  • धनबाद खनन विभाग कटघरे में, रिपोर्ट मांगते ही खुला राज

धनबाद (Threesocieties.com Desk): झारखंड के धनबाद कोयलांचल से सरकारी लापरवाही और विभागीय सवालों से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिला खनन विभाग द्वारा जब्त किया गया 1030.95 टन अवैध कोयला रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। जांच में पता चला कि इसमें से केवल 30 टन कोयला ही बचा, जबकि 1000 टन से अधिक कोयला चोरी हो चुका है।

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यह खुलासा तब हुआ जब जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह ने जब्त कोयले की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी। जवाब में जिला खनन विभाग ने स्वीकार किया कि जब्त कोयला चोरी हो चुका है। इस घटना ने विभागीय कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

3 जनवरी 2023 को हुआ था कोयला जब्त

जानकारी के अनुसार, 3 जनवरी 2023 को जिला खनन विभाग ने बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के बड़ा पिछड़ी, कंचन टाकीज के पास स्थित एक चहारदीवारी के भीतर रखे 1030.95 टन अवैध कोयले को जब्त किया था। यह कार्रवाई अवैध कोयला भंडारण के खिलाफ की गई थी।जब्ती के बाद विभाग ने सरकारी नियमों के तहत कोयले की मापी कर प्रतिवेदन तैयार किया। दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि जब्त कोयले को स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि आशुतोष रजक की सुरक्षा में रखा गया है।

सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी

प्रतिवेदन में यह भी शर्त रखी गई थी कि न्यायालय में सुनवाई के दौरान आशुतोष रजक उक्त कोयले को प्रस्तुत करेंगे, अन्यथा उसके बाजार मूल्य की राशि जमा करनी होगी। इस मामले में बरवाअड्डा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई और जांच की जिम्मेदारी पुलिस अवर निरीक्षक राजीव रंजन को सौंपी गई।

जांच में सामने आई बड़ी चोरी

25 फरवरी 2023 को पुलिस अवर निरीक्षक राजीव रंजन ने अपनी जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा किया। रिपोर्ट के अनुसार, जब्त 1030.95 टन कोयले में से केवल 30 टन ही मौके पर मिला, जबकि बाकी 1000.95 टन कोयला चोरी हो चुका था।इतनी बड़ी मात्रा में कोयले की चोरी के बाद एक और प्राथमिकी दर्ज की गई, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि चोरी के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई हुई।

2026 में रिपोर्ट मांगने पर खुला मामला

यह मामला फिर तब सुर्खियों में आया जब जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह ने 11 अप्रैल 2026 को जिला खनन पदाधिकारी से जब्त कोयले की वर्तमान स्थिति पर रिपोर्ट मांगी। खनन विभाग के जवाब में स्वीकार किया गया कि कोयला चोरी हो गया है। हालांकि विभाग यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे व्यक्ति से दोगुनी कीमत वसूली गई या नहीं।

विभागीय जवाबदेही पर सवाल

धनबाद जैसे कोयलांचल क्षेत्र में 1000 टन से अधिक कोयले का सरकारी जब्ती के बाद गायब हो जाना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि संभावित मिलीभगत की ओर भी संकेत करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जब्त माल ही सुरक्षित नहीं रह सकता, तो अवैध खनन और कोयला तस्करी पर नियंत्रण कैसे संभव होगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर सरकारी कब्जे से 1000 टन कोयला गायब कैसे हो गया, और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?