EPFO का बड़ा फैसला: अब ₹1800 से ज्यादा PF कटौती आपकी मर्जी से, कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत

EPFO ने PF नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए 15,000 रुपये की वेतन सीमा से ऊपर के योगदान को स्वैच्छिक बना दिया है। साथ ही PF निकासी प्रक्रिया को आसान करते हुए 13 कैटेगरी को घटाकर 3 कर दिया गया है। जानिए नए नियमों का कर्मचारियों और कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा।

EPFO का बड़ा फैसला: अब ₹1800 से ज्यादा PF कटौती आपकी मर्जी से, कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत
PF कटौती और निकासी के नियम बदले।

     HighLights:

  • ट्रैफिक जाम के दौरान व्यक्ति को आया हार्ट अटैक और वह कार में ही बेहोश हो गया
  • बस में सफर कर रही दो नर्सों ने तुरंत उतरकर मौके पर CPR देना शुरू किया
  • अस्पताल पहुंचने तक लगातार CPR देने से मरीज की जान बच गई
  • जांच में हृदय की धमनी में ब्लॉकेज मिला, जिसके बाद इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी की गई

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। Employees' Provident Fund Organisation (EPFO) ने प्रोविडेंट फंड योगदान और निकासी के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब 15,000 रुपये प्रति माह की कानूनी वेतन सीमा तक ही 12 प्रतिशत PF योगदान अनिवार्य होगा, जबकि इससे अधिक राशि का योगदान पूरी तरह कर्मचारी और नियोक्ता की इच्छा पर निर्भर करेगा।

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नए प्रावधानों के मुताबिक यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 1 लाख रुपये प्रति माह है, तब भी अनिवार्य PF योगदान केवल 15,000 रुपये की वेतन सीमा के आधार पर यानी 1,800 रुपये प्रति माह ही रहेगा। इससे अधिक राशि जमा करना अब कर्मचारी का स्वैच्छिक निर्णय होगा।

अतिरिक्त PF योगदान अब पूरी तरह स्वैच्छिक

बुधवार को जारी एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड्स स्कीम-2026 के अनुसार कोई भी कर्मचारी कानूनी वेतन सीमा से अधिक वेतन पर निर्धारित दर या उससे अधिक किसी भी दर पर अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदान कर सकता है। हालांकि, नियोक्ता के लिए इस अतिरिक्त राशि के बराबर योगदान देना अनिवार्य नहीं होगा। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को किसी भी समय इस अतिरिक्त योगदान को कम करने या बंद करने की स्वतंत्रता भी दी गई है। इससे कर्मचारियों को अपनी वित्तीय जरूरतों और रिटायरमेंट प्लानिंग के अनुसार बचत तय करने की सुविधा मिलेगी।

PF निकासी के नियम हुए आसान

EPFO ने PF निकासी प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सरल बना दिया है। अब एडवांस निकासी की 13 अलग-अलग कैटेगरी को घटाकर केवल तीन प्रमुख श्रेणियों में समेट दिया गया है। इनमें शामिल हैं:

जरूरी जरूरतें जैसे बीमारी, शिक्षा और शादी।
घर से जुड़ी जरूरतें।
विशेष परिस्थितियां और आपात स्थितियां।

इस बदलाव का उद्देश्य कर्मचारियों को कम कागजी प्रक्रिया और अधिक सुविधा उपलब्ध कराना है।

अब 100 प्रतिशत तक निकाल सकेंगे एडवांस

नए नियमों के तहत कर्मचारी अपने "एलिजिबल बैलेंस" का 100 प्रतिशत तक एडवांस निकाल सकेंगे। इस बैलेंस में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के योगदान शामिल होंगे। हालांकि इसके साथ एक नई शर्त भी जोड़ी गई है। कर्मचारियों को अपने खाते में कुल योगदान का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा न्यूनतम बैलेंस के रूप में बनाए रखना होगा।

कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को भी मिलेगा फायदा

नई स्कीम में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के PF योगदान को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत "प्रिंसिपल एम्प्लॉयर" यानी मुख्य नियोक्ता को कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के PF योगदान को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। यदि कोई कॉन्ट्रैक्टर अलग से पंजीकृत नहीं है तो ऐसी स्थिति में कर्मचारियों के PF योगदान की जिम्मेदारी सीधे मुख्य नियोक्ता की होगी।

कंपनियों के लिए बढ़ी जवाबदेही

नई स्कीम के तहत कंपनियों को अब हर महीने नियमित कंप्लायंस और विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त फाइलिंग करनी होगी। इसके अलावा प्रत्येक नियोक्ता को स्कीम लागू होने के 15 दिनों के भीतर फॉर्म-V के माध्यम से एक संयुक्त रिटर्न दाखिल करना होगा।इस रिटर्न में कर्मचारियों के आधार नंबर, पैन, यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN), ग्रॉस वेज और EPF वेज जैसी जानकारियां देना अनिवार्य होगा।

कर्मचारियों को मिलेगी ज्यादा वित्तीय आजादी

EPFO का मानना है कि इन बदलावों से कर्मचारियों को अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स और मासिक आय के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिलेगी। इन प्रावधानों पर Central Board of Trustees (CBT) की बैठकों में विस्तार से चर्चा की गई और सहमति के बाद इन्हें अंतिम रूप दिया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि निजी क्षेत्र में कॉस्ट-टू-कंपनी (CTC) आधारित वेतन संरचना के चलते कंपनियां और कर्मचारी मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार कर सकेंगे, जिससे कर्मचारियों को तत्काल आय और दीर्घकालिक बचत दोनों में फायदा मिल सके।